30 सितंबर 2026
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झारखंड प्रतियोगी छात्रों का अल्टीमेटम: 7 अक्टूबर तक JPSC सुधार नहीं तो 'छात्र महाजुटान'

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झारखंड प्रतियोगी छात्रों का अल्टीमेटम: 7 अक्टूबर तक JPSC सुधार नहीं तो 'छात्र महाजुटान'

सारांश

झारखंड के प्रतियोगी छात्रों ने राज्य सरकार को 7 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है — JPSC में अध्यक्ष की नियुक्ति और परीक्षा सुधार समिति के गठन की माँग पर। दो महीने पहले दिए गए आश्वासन पर अमल न होने से छात्रों में रोष है, और 22 से अधिक परीक्षाएं रद्द होने का इतिहास इस आंदोलन को और धार देता है।

मुख्य बातें

झारखंड के प्रतियोगी छात्रों ने 30 सितंबर 2026 को रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार को 7 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया।
मांग पूरी न होने पर 'छात्र महाजुटान' आयोजित करने की चेतावनी दी गई है।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति बनाने का पुराना आश्वासन करीब दो महीने बाद भी अधूरा है।
पिछले कुछ वर्षों में विवादों के चलते 22 से अधिक परीक्षाएं रद्द की जा चुकी हैं।
दरोगा भर्ती का अंतिम विज्ञापन 2017 में निकला था; तब से कोई नई भर्ती नहीं हुई।
छात्रों ने UPSC की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, नेगेटिव मार्किंग और 90 दिन की मुख्य परीक्षा तैयारी अवधि की माँग रखी।

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में पारदर्शिता, नियमित भर्ती और प्रक्रियागत सुधार की मांग को लेकर राज्य के प्रतियोगी छात्रों ने झारखंड सरकार को 7 अक्टूबर 2026 तक का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं हुईं, तो पूरे राज्य से अभ्यर्थियों को जुटाकर 'छात्र महाजुटान' आयोजित किया जाएगा।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

रांची में 30 सितंबर 2026 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र प्रतिनिधि हर्षित सिंह और खूंटी की अभ्यर्थी निशात परवीन ने बताया कि पिछला आंदोलन स्थगित कराते समय वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में एक परीक्षा सुधार समिति गठित करने का आश्वासन दिया गया था। छात्रों का दावा है कि करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी वह समिति अस्तित्व में नहीं आई है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद नया नहीं है। छात्रों ने बताया कि गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पिछले कुछ वर्षों में 22 से अधिक परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है।

रिक्त पद और भर्ती की स्थिति

छात्र प्रतिनिधियों ने JPSC में अध्यक्ष और बोर्ड सदस्यों के रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग की। उनका कहना है कि आयोग में महत्वपूर्ण पद खाली रहने से परीक्षाओं, साक्षात्कार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच गहरी अनिश्चितता बनी हुई है।

भर्ती की अनियमितता का उदाहरण देते हुए छात्रों ने बताया कि दरोगा भर्ती का अंतिम विज्ञापन 2017 में जारी हुआ था और नियुक्ति 2018 में हुई थी — उसके बाद इस पद के लिए कोई नई भर्ती नहीं निकली। इसी प्रकार, एलडीसी भर्ती के लिए 2020 में आवेदन लेने के बाद विज्ञापन वापस ले लिया गया।

परीक्षा सुधार की प्रमुख मांगें

छात्रों ने UPSC की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने और उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की माँग रखी। प्रारंभिक परीक्षा में ई-ऑप्शन और नेगेटिव मार्किंग लागू करने, श्रेणीवार कटऑफ और मार्कशीट सार्वजनिक करने तथा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम 90 दिन का समय देने की भी मांग की गई।

मुख्य परीक्षा में शॉर्ट आंसर आधारित प्रश्न शामिल करने, झारखंड से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देने, क्षेत्रीय भाषाओं के मूल्यांकन में स्केलिंग पैटर्न लागू करने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता सुनिश्चित करने की भी माँग रखी गई। इंटरव्यू तक पहुँचने लेकिन अंतिम मेरिट सूची में स्थान न पाने वाले अभ्यर्थियों को अन्य सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने और छात्रों से जुड़े मामलों में सरकार की ओर से अदालत में प्रभावी पैरवी की भी माँग की गई।

आगे की राह

छात्र प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि 7 अक्टूबर तक यदि परीक्षा सुधार समिति का गठन नहीं होता और JPSC में अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति नहीं होती, तो राज्यभर से अभ्यर्थियों को एकजुट कर 'छात्र महाजुटान' का आयोजन किया जाएगा। यह आंदोलन झारखंड की सरकारी भर्ती प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार की व्यापक माँग का प्रतिनिधित्व करता है, और आने वाले दिनों में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया ही इसकी दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य की भर्ती तंत्र की संरचनात्मक विफलता का दस्तावेज़ है। सरकार का आश्वासन देकर समिति न बनाना यह बताता है कि नीति-स्तर पर इच्छाशक्ति की कमी है। JPSC अध्यक्ष का पद रिक्त रहना आयोग की निष्क्रियता को और गहरा करता है — यह संयोग नहीं, प्रशासनिक उपेक्षा का संकेत है। जब तक भर्ती कैलेंडर और स्वतंत्र सत्यापन तंत्र नहीं बनता, तब तक हर आश्वासन अगले आंदोलन की ज़मीन तैयार करता रहेगा।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड प्रतियोगी छात्रों ने 7 अक्टूबर का अल्टीमेटम क्यों दिया है?
छात्रों ने JPSC-JSSC में पारदर्शिता, नियमित भर्ती और परीक्षा सुधार समिति के गठन की मांग को लेकर यह अल्टीमेटम दिया है। पिछले आंदोलन के दौरान वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन करीब दो महीने बाद भी वह समिति नहीं बनी।
'छात्र महाजुटान' क्या है और इसका क्या प्रभाव हो सकता है?
'छात्र महाजुटान' झारखंड के प्रतियोगी छात्रों द्वारा प्रस्तावित एक बड़ा राज्यव्यापी आंदोलन है, जिसमें पूरे राज्य से अभ्यर्थियों को एकजुट किया जाएगा। यह आंदोलन तब शुरू होगा जब 7 अक्टूबर 2026 तक सरकार प्रमुख मांगें पूरी नहीं करती।
झारखंड में कितनी परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं और क्यों?
छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद 22 से अधिक परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं। इन विवादों ने हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी और भविष्य को प्रभावित किया है।
छात्रों की परीक्षा सुधार संबंधी प्रमुख मांगें क्या हैं?
छात्रों ने UPSC की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, प्रारंभिक परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग, श्रेणीवार कटऑफ और मार्कशीट जारी करने, मुख्य परीक्षा से पहले कम से कम 90 दिन की तैयारी अवधि, और उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन की गोपनीयता सुनिश्चित करने की मांग रखी है।
JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों का छात्रों पर क्या असर पड़ रहा है?
आयोग में महत्वपूर्ण पद खाली रहने से परीक्षाओं के आयोजन, साक्षात्कार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि नेतृत्वहीन आयोग से त्वरित निर्णय लेना संभव नहीं होता, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया बाधित होती है।
राष्ट्र प्रेस
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