झारखंड भाजपा का 48 घंटे का अल्टीमेटम: छात्र मुकदमे वापस नहीं हुए तो सड़क पर उतरेगी पार्टी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड भाजपा ने 2 सितंबर 2026 को राज्य सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है — छात्र आंदोलनकारियों पर दर्ज प्राथमिकियाँ तत्काल वापस ली जाएँ और जेपीएससी-जेएसएससी की कथित परीक्षा धांधली की सीबीआई जाँच सुनिश्चित की जाए, अन्यथा पार्टी छात्रों के साथ सड़क पर उतरेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने स्पष्ट किया कि यदि समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी।
मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में सांसदों, विधायकों और प्रदेश पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्य सचिव से मुलाकात कर औपचारिक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में छात्र आंदोलन के दौरान और उसके बाद राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज सभी प्राथमिकियाँ तत्काल रद्द करने की माँग की गई है।
परीक्षा धांधली और छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
भाजपा का आरोप है कि जेपीएससी और जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएँ सामने आई हैं, जिसके चलते कई परीक्षाएँ कथित धांधली के कारण रद्द या स्थगित करनी पड़ीं। इसके विरोध में छात्रों ने करीब एक महीने तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया। साहू ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर कार्रवाई की और बड़ी संख्या में प्राथमिकियाँ दर्ज की गईं, जबकि हिंसा के आरोपी सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
भाजपा की प्रमुख माँगें
पार्टी ने ज्ञापन में कई सूत्री माँगें रखी हैं। पहली, छात्र आंदोलन से जुड़ी सभी प्राथमिकियाँ तत्काल वापस ली जाएँ — इस संदर्भ में पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला भी दिया है जो छात्र आंदोलनों से जुड़े मुकदमों पर लागू होता है। दूसरी, कथित धांधली के कारण रद्द या स्थगित की गई सभी परीक्षाओं की सीबीआई जाँच की अनुशंसा की जाए। तीसरी, आयोग के अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद अन्य जिम्मेदार सदस्यों की भूमिका की जाँच हो और दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही की माँग
भाजपा ने यह भी माँग की है कि उन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जाँच की जाए, जिनके अधीन काम करने वाले कनिष्ठ कर्मचारियों को परीक्षा धांधली के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पार्टी का तर्क है कि जब कनिष्ठ स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है, तो वरिष्ठ अधिकारी जवाबदेही से नहीं बच सकते। यह मुद्दा झारखंड में प्रशासनिक पारदर्शिता की व्यापक बहस से जुड़ा है।
आगे क्या होगा
साहू ने स्पष्ट किया कि 48 घंटे की समयसीमा में सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो भाजपा छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी और इस स्थिति के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में छात्र रोजगार और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर पहले से ही असंतोष व्याप्त है।