झारखंड भाजपा का 48 घंटे का अल्टीमेटम: JPSC-JSSC धांधली की CBI जांच और छात्रों पर दर्ज FIR वापसी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2 सितंबर को राज्य सरकार को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम जारी किया — छात्र आंदोलनकारियों पर दर्ज प्राथमिकियाँ तत्काल वापस ली जाएँ और जेपीएससी (JPSC) तथा जेएसएससी (JSSC) की कथित परीक्षा धांधली की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच की सिफारिश की जाए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 48 घंटों में छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो पार्टी उनके साथ सड़क पर उतरेगी।
मुख्य घटनाक्रम
आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा के सांसदों, विधायकों और प्रदेश पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्य सचिव से भेंट कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में छात्र आंदोलन के दौरान एवं उसके उपरांत राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज सभी प्राथमिकियों को तत्काल रद्द करने की माँग प्रमुख रूप से शामिल है। साथ ही, कथित धांधली के कारण रद्द या स्थगित की गई सभी JPSC और JSSC परीक्षाओं की CBI जांच की अनुशंसा करने की भी माँग रखी गई है।
भाजपा के आरोप और माँगें
साहू ने आरोप लगाया कि झारखंड के छात्र वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं, किंतु JPSC और JSSC की परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएँ सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों ने करीब एक महीने तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, इसके बावजूद उन पर पुलिस कार्रवाई की गई और बड़ी संख्या में प्राथमिकियाँ दर्ज की गईं। भाजपा का यह भी आरोप है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई एकतरफा रही, जबकि आंदोलन के दौरान हिंसा करने के आरोपी सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं को बख्शा गया।
पार्टी ने माँग की है कि JPSC आयोग के अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद अन्य जिम्मेदार सदस्यों की भूमिका की भी जांच हो और दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध गिरफ्तारी सहित कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, उन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी माँग रखी गई है जिनके अधीन कार्यरत कनिष्ठ कर्मचारियों को परीक्षा धांधली के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला
ज्ञापन में भाजपा ने छात्र आंदोलनों से संबंधित मुकदमों के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख किया है। पार्टी का तर्क है कि शीर्ष अदालत के निर्देशों की रोशनी में इन प्राथमिकियों को बनाए रखना विधिसम्मत नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन तेज हुए हैं और न्यायालयों ने भी इस मसले पर संज्ञान लिया है।
सरकार पर जवाबदेही की चेतावनी
आदित्य साहू ने स्पष्ट किया कि यदि 48 घंटों के भीतर छात्रहित से जुड़ी माँगों पर सरकार ने ठोस कार्रवाई नहीं की, तो भाजपा छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन की राह पकड़ेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की स्थिति के लिए पूरी तरह राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। गौरतलब है कि यह झारखंड में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर विपक्ष और छात्र संगठनों द्वारा उठाई गई माँगों की एक लंबी श्रृंखला की कड़ी है।
राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले घंटों में सरकार का रुख यह तय करेगा कि झारखंड में राजनीतिक तनाव और बढ़ता है या शांत होता है।