झारखंड: 22 परीक्षाएं रद्द होने की अधिसूचना के बाद छात्रों ने 26 दिन बाद समाप्त किया जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में 25 जुलाई से चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह 19 अगस्त को 26वें दिन समाप्त हो गया। झारखंड सरकार द्वारा जेपीएससी सिविल सर्विस और जेएसएससी-सीजीएल सहित कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने और 45 परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच की अधिसूचना जारी होने के बाद छात्रों ने आंदोलन विराम देने का निर्णय लिया।
आंदोलन समाप्ति की औपचारिक घोषणा
आंदोलन समाप्त करने की औपचारिक घोषणा शाम चार बजे की गई। इसके बाद शाम छह बजे छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से आभार यात्रा निकाली, जिसमें आंदोलन के दौरान साथ देने वाले लोगों, संगठनों और समर्थकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच के रामावतार महतो ने बताया कि मंच ने 25 जुलाई से परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ यह सत्याग्रह शुरू किया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंच की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है, जिससे आंदोलन को विराम देने का रास्ता खुला।
सरकार पर भरोसा, लेकिन शर्तें तय
छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का स्थायी अंत नहीं, बल्कि सरकार को जांच पूरी करने का अवसर देने की एक सुविचारित पहल है। सरकार ने गड़बड़ियों की व्यापक और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है, और इसी आधार पर फिलहाल धरना-प्रदर्शन रोकने का निर्णय लिया गया है।
आंदोलनकारियों ने सरकार को जांच पूरी करने के लिए 60 दिनों का समय दिया है। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में जांच निष्पक्ष और सही तरीके से नहीं हुई, या किसी प्रकार की लापरवाही अथवा पक्षपात सामने आया, तो वे दोबारा सड़क पर उतरने से नहीं हिचकेंगे।
मुख्यमंत्री सोरेन के प्रति आभार
रामावतार महतो ने छात्र हित में लिए गए फैसलों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और जांच की दिशा में उठाए गए कदमों से छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
पिछले कई सप्ताहों से जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों ने धरना, प्रदर्शन, सत्याग्रह और भूख हड़ताल सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए थे। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि झारखंड में यह पहली बार नहीं है जब परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर छात्रों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ा हो।
आगे की राह
सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने के साथ-साथ कुछ परीक्षाओं को स्थगित करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाने की घोषणा की है। अब छात्रों की नजर 60 दिनों में जांच की प्रगति पर टिकी रहेगी। यदि सरकार इस समयसीमा में ठोस और पारदर्शी कार्रवाई करती है, तो झारखंड की परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक सुधार की उम्मीद बनती है।