बेंगलुरु में झारखंड की सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूजा दत्ता की संदिग्ध मौत, जांच में गंभीर अवसाद के संकेत

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बेंगलुरु में झारखंड की सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूजा दत्ता की संदिग्ध मौत, जांच में गंभीर अवसाद के संकेत

सारांश

बेंगलुरु के अडुगोडी में झारखंड की सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूजा दत्ता का शव तीन महीने बाद मिला — दीवारों पर स्टिकी नोट्स, बंद फोन, टूटे रिश्ते। कोविड में पति की मौत के बाद एकाकी जीवन जी रही इस महिला की कहानी महानगरों में प्रवासी पेशेवरों के मानसिक स्वास्थ्य संकट की गहरी परत उघाड़ती है।

Key Takeaways

  • पूजा दत्ता (34 वर्ष, झारखंड) का अर्ध-सड़ा शव बेंगलुरु के अडुगोडी स्थित किराए के मकान में मिला।
  • पुलिस जांच में दीवारों पर स्टिकी नोट्स और लिखावट से गंभीर अवसाद के संकेत मिले।
  • पूजा ने एक साल पहले नौकरी छोड़ी थी और तब से परिवार व दोस्तों से संपर्क पूरी तरह बंद था।
  • कोविड महामारी के दौरान पति की मौत के बाद से उनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी।
  • पुलिस ने अभी तक हत्या के कोई सबूत नहीं पाए; कॉल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
  • परिवार ने बेंगलुरु में ही अंतिम संस्कार का निर्णय लिया।

बेंगलुरु के अडुगोडी इलाके में झारखंड की 34 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूजा दत्ता का अर्ध-सड़ा हुआ शव उनके किराए के मकान में मिला, जिसके बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है। बुधवार, 29 अप्रैल को जांच अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पूजा गंभीर अवसाद से पीड़ित थीं और उन्होंने परिवार व दोस्तों से पूरी तरह संपर्क तोड़ लिया था। यह घटना सोमवार रात सामने आई थी।

मामले का पूरा घटनाक्रम

जांच के अनुसार, पूजा दत्ता एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थीं और उन्होंने लगभग एक साल पहले नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद उन्होंने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया और बाद में सिम कार्ड भी बदल लिया। पुलिस के अनुसार उनके नए सिम कार्ड की वैधता भी तीन महीने पहले समाप्त हो चुकी थी।

पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पूजा को पिछले तीन महीनों से नहीं देखा था। जांच अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक साल से उनका परिवार या किसी परिचित से कोई संपर्क नहीं था।

घर में मिले अवसाद के संकेत

घर की तलाशी के दौरान पुलिस को दीवारों पर लिखे नोट और लेख मिले, जिनसे जांचकर्ताओं को यह विश्वास हुआ कि वह गंभीर अवसाद से पीड़ित थीं। पूजा ने अपने घर की दीवारों पर जगह-जगह स्टिकी नोट्स चिपका रखे थे, जिन पर 'अकेलापन', 'प्यार', 'भरोसा', 'संतुष्टि', 'शांति' और 'अहंकार' जैसे शब्द लिखे थे।

यह ऐसे समय में आया है जब महानगरों में अकेले रहने वाले प्रवासी पेशेवरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि बेंगलुरु जैसे आईटी हब में ऐसे मामले अब असामान्य नहीं रहे।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और त्रासदी

परिवार के सदस्य बेंगलुरु पहुँच गए हैं और उन्होंने पुष्टि की कि नौकरी छूटने के बाद से उनका पूजा से कोई संपर्क नहीं था। परिवार ने पुलिस को यह भी बताया कि कोविड महामारी के दौरान पूजा के पति का निधन हो गया था, जिसके बाद से उनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी।

परिवार ने यह भी बताया कि वे पूजा का शव उनके पैतृक स्थान पर नहीं ले जाएंगे क्योंकि उनकी माँ अस्वस्थ हैं; इसके बजाय बेंगलुरु में ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।

जांच की दिशा और अगले कदम

जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह पता चले कि हत्या की गई थी। साथ ही, पुलिस उस युवक की संलिप्तता की भी जांच कर रही है जो कथित तौर पर अक्सर उनके घर आता-जाता था।

पुलिस मौत के कारणों में असफल रिश्ते या पारिवारिक समस्याओं की संभावना की भी जांच कर रही है। तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और पिछले एक साल के कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के नतीजे आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

Point of View

नौकरी का जाना, और एक साल तक किसी से कोई संपर्क नहीं — यह त्रासदी की नहीं, व्यवस्था की विफलता की तस्वीर है। बेंगलुरु जैसे आईटी हब में लाखों प्रवासी कर्मचारी बिना किसी सामाजिक सुरक्षा जाल के रहते हैं, और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ अभी भी उन तक नहीं पहुँचतीं। यह मामला नीति-निर्माताओं और कंपनियों दोनों के लिए एक कड़ा सवाल छोड़ता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

पूजा दत्ता कौन थीं और उनका शव कहाँ मिला?
पूजा दत्ता झारखंड की 34 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं जो बेंगलुरु के अडुगोडी इलाके में किराए के मकान में रहती थीं। उनका अर्ध-सड़ा हुआ शव सोमवार रात उनके घर में मिला।
पुलिस जांच में अब तक क्या पता चला है?
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पूजा गंभीर अवसाद से पीड़ित थीं। घर की दीवारों पर स्टिकी नोट्स और लिखावट मिली है, और पिछले एक साल से परिवार व दोस्तों से उनका कोई संपर्क नहीं था।
क्या यह हत्या का मामला है?
जांच अधिकारियों के अनुसार अभी तक हत्या का कोई सबूत नहीं मिला है। पुलिस अवसाद, असफल रिश्ते और पारिवारिक समस्याओं सहित सभी संभावनाओं की जांच कर रही है।
पूजा दत्ता की पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या थी?
परिवार के अनुसार कोविड महामारी के दौरान पूजा के पति का निधन हो गया था, जिसके बाद से उनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। नौकरी छोड़ने के बाद से परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं था।
आगे जांच किस दिशा में जाएगी?
पुलिस तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है और पिछले एक साल के कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। साथ ही एक युवक की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है जो कथित तौर पर अक्सर उनके घर आता-जाता था।
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