जनसंख्या वृद्धि पर संकीर्ण सोच गलत: मांझी बोले — बच्चा पैदा होता है तो हाथ-दिमाग भी लाता है

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जनसंख्या वृद्धि पर संकीर्ण सोच गलत: मांझी बोले — बच्चा पैदा होता है तो हाथ-दिमाग भी लाता है

सारांश

केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने गया में कहा कि जनसंख्या वृद्धि को संकीर्ण नजरिए से नहीं देखना चाहिए। बागेश्वर बाबा के बयान की पृष्ठभूमि में दिए इस बयान ने बिहार और देश में जनसंख्या नीति पर बहस को नई धार दे दी है।

Key Takeaways

  • केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने 25 अप्रैल को गया में जनसंख्या वृद्धि पर संकीर्ण सोच न रखने की अपील की।
  • यह बयान बागेश्वर बाबा के नागपुर में दिए गए उस कथित बयान के जवाब में आया जिसमें चार संतानें पैदा करने की अपील थी।
  • मांझी ने कहा — "हर बच्चा पेट के साथ हाथ और दिमाग भी लेकर आता है", जो मानव संसाधन की क्षमता को रेखांकित करता है।
  • उन्होंने 140 करोड़ की आबादी को 'विश्व गुरु' भारत की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ा।
  • NFHS-5 के अनुसार बिहार की प्रजनन दर 3.0 है, जो राष्ट्रीय औसत 2.0 से डेढ़ गुना अधिक है।
  • मांझी ने शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को जनसंख्या प्रबंधन का असली हल बताया।

गया, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार, 25 अप्रैल को गया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जनसंख्या वृद्धि को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में जनसंख्या बढ़ने या संतानोत्पत्ति को लेकर समाज को संकीर्ण मानसिकता से बाहर निकलना होगा।

बागेश्वर बाबा के बयान के बाद उठा विवाद

यह बयान धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बागेश्वर बाबा के उस कथित आह्वान की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें उन्होंने हाल ही में नागपुर दौरे के दौरान लोगों से चार संतानें पैदा करने और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को समर्पित करने की अपील की थी।

मांझी ने स्वीकार किया कि उन्हें बागेश्वर बाबा के बयान का पूरा संदर्भ ज्ञात नहीं है, लेकिन उन्होंने इस अवसर का उपयोग जनसंख्या को लेकर एक व्यापक और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए किया।

मांझी का मुख्य तर्क — हर बच्चा संभावनाओं का भंडार

जीतन राम मांझी ने कहा, "मनुष्य केवल पेट लेकर नहीं आता, बल्कि काम करने के लिए दो हाथ और सोचने के लिए एक दिमाग भी साथ लाता है।" उनका यह कथन जनसंख्या को बोझ नहीं, बल्कि मानव संसाधन के रूप में देखने की पुरानी आर्थिक अवधारणा से मेल खाता है।

उन्होंने आगे कहा कि यह अनुमान लगाना असंभव है कि कोई बच्चा भविष्य में कितना महान व्यक्ति बनेगा। यदि रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित किए जाएं और प्रभावी शासन सुनिश्चित हो, तो सभी नागरिकों का भरण-पोषण किया जा सकता है।

ऐतिहासिक संदर्भ — विश्व गुरु भारत और जनसंख्या

केंद्रीय मंत्री ने एक ऐतिहासिक तर्क भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत की वर्तमान जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है और प्राचीन काल में जब भारत को 'विश्व गुरु' का दर्जा प्राप्त था, तब भी जनसंख्या के आकार को लेकर कोई संकट नहीं था। उनका संकेत था कि जनसंख्या स्वयं में समस्या नहीं, बल्कि उसके प्रबंधन की नीति महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि भारत 2023 में चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन गया। इस संदर्भ में जनसंख्या नीति को लेकर देशभर में बहस तेज हुई है।

मांझी का स्पष्टीकरण — अनियंत्रित वृद्धि की वकालत नहीं

मांझी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि के समर्थक नहीं हैं। उनका जोर इस बात पर था कि यदि जनसंख्या बढ़ती है, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता पर निवेश बढ़ाए ताकि हर नागरिक आत्मनिर्भर बन सके।

यह बयान उनके अपने मंत्रालय की नीति से भी जुड़ता है — एमएसएमई मंत्रालय लघु उद्यमों के माध्यम से रोजगार सृजन में अग्रणी भूमिका निभाता है।

राजनीतिक निहितार्थ और बिहार की संदर्भभूमि

बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.0 है, जो राष्ट्रीय औसत 2.0 से काफी अधिक है। ऐसे में मांझी का यह बयान बिहार की जनसंख्या नीति पर चल रही बहस को नई दिशा दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आरएसएस द्वारा हिंदू जन्म दर बढ़ाने के समर्थन और विपक्षी दलों द्वारा जनसंख्या नियंत्रण की मांग के बीच यह बयान एक राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी हो सकती है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्र सरकार जनसंख्या नीति पर कोई ठोस दिशानिर्देश जारी करती है और बिहार विधानसभा में इस विषय पर कोई नई बहस छिड़ती है।

Point of View

लेकिन इसकी परतें खोलने पर एक जटिल राजनीतिक संतुलन नजर आता है। एक तरफ आरएसएस-बागेश्वर बाबा का हिंदू जन्म दर बढ़ाने का आग्रह है, दूसरी तरफ विपक्ष की जनसंख्या नियंत्रण की मांग — मांझी इन दोनों के बीच एक 'विकासवादी' मध्यमार्ग खींचने की कोशिश कर रहे हैं। विडंबना यह है कि बिहार, जहां से मांझी आते हैं, वहां NFHS-5 के अनुसार प्रजनन दर 3.0 है और शिशु मृत्यु दर, कुपोषण व बेरोजगारी के आंकड़े अभी भी चिंताजनक हैं — ऐसे में 'रोजगार दो, सब ठीक होगा' वाला तर्क जमीनी हकीकत से कितना मेल खाता है, यह सवाल बड़ा है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

जीतन राम मांझी ने जनसंख्या वृद्धि पर क्या कहा?
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने 25 अप्रैल को गया में कहा कि जनसंख्या बढ़ाने या संतानोत्पत्ति को लेकर समाज को संकीर्ण सोच नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजगार और शिक्षा से सभी का भरण-पोषण संभव है।
बागेश्वर बाबा ने जनसंख्या को लेकर क्या बयान दिया था?
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बागेश्वर बाबा ने नागपुर दौरे के दौरान कथित तौर पर लोगों से चार संतानें पैदा करने और उनमें से एक को आरएसएस को समर्पित करने की अपील की थी। इसी बयान की पृष्ठभूमि में मांझी का यह बयान आया।
क्या मांझी अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि के समर्थक हैं?
नहीं, मांझी ने स्पष्ट किया कि वे अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि की वकालत नहीं कर रहे। उनका जोर इस बात पर था कि जनसंख्या बढ़े तो शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता पर सरकारी निवेश भी उतना ही बढ़ना चाहिए।
बिहार की प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से कितनी अधिक है?
NFHS-5 के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.0 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.0 है। यही कारण है कि मांझी का यह बयान बिहार में जनसंख्या नीति की बहस को और तेज कर सकता है।
जनसंख्या नीति को लेकर आरएसएस का क्या रुख रहा है?
आरएसएस भारत में हिंदू आबादी की उच्च जन्म दर का ऐतिहासिक रूप से समर्थन करती रही है। बागेश्वर बाबा का हालिया बयान इसी विचारधारा की अभिव्यक्ति माना जा रहा है।
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