जम्मू-कश्मीर: LG के जाली हस्ताक्षर मामले में क्राइम ब्रांच ने सकलैन मुश्ताक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने 1 अक्टूबर 2026 को उपराज्यपाल (LG) के जाली हस्ताक्षर और फर्जी लेटरहेड के इस्तेमाल से जुड़े एक गंभीर मामले में श्रीनगर की सब-जज अदालत में चार्जशीट दाखिल की। पुलवामा के डीरी निवासी आरोपी सकलैन मुश्ताक डार के खिलाफ यह चार्जशीट एफआईआर नंबर 29/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं में दर्ज की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला अनंतनाग के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसएसपी) को भेजे गए एक फर्जी सरकारी संचार से जुड़ा है। आरोपी ने कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल के नाम पर नकली ऑफिशियल लेटरहेड और जाली हस्ताक्षर का उपयोग कर यह पत्र तैयार किया था।
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस फर्जी संचार का मकसद अनंतनाग जिला पुलिस प्रशासन के कामकाज को गैरकानूनी तरीके से प्रभावित करना था — यानी सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी की आड़ लेकर प्रशासनिक तंत्र को भटकाने की कोशिश।
चार्जशीट में लगाई गई धाराएँ
ईओडब्ल्यू ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 204, 319(2), 336(2) और 340(2) के तहत आरोपी के विरुद्ध अभियोग-पत्र दाखिल किया है। जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर अधिकारियों ने कहा कि जांच को 'साबित' माना गया है और मामला अब न्यायिक निर्णय के लिए अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है।
गौरतलब है कि ईओडब्ल्यू विशेष रूप से उन हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधों की जांच के लिए गठित है, जिनमें विशेष तकनीकी दक्षता और पूर्णकालिक जांच की आवश्यकता होती है। सामान्य कानून-व्यवस्था में लगी क्षेत्रीय पुलिस ऐसे जटिल मामलों की व्यापक जांच करने में सक्षम नहीं होती।
प्रशासन की चेतावनी और अपील
क्राइम ब्रांच ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा कि नागरिकों को सरकारी अधिकारियों की आड़ में भेजे जाने वाले किसी भी संदिग्ध पत्र या संचार की प्रामाणिकता तुरंत जाँचनी चाहिए। किसी भी ऐसी संदिग्ध घटना की सूचना एसएसपी ईओडब्ल्यू श्रीनगर (क्राइम ब्रांच जम्मू-कश्मीर) अब्दुल वहीद शाह के संज्ञान में लाई जा सकती है या आधिकारिक ईमेल के माध्यम से भेजी जा सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र को कमज़ोर करने के प्रयासों पर सुरक्षा एजेंसियाँ कड़ी नज़र रखे हुए हैं। फर्जी सरकारी पत्रों के ज़रिए पुलिस प्रशासन को गुमराह करने की यह कोशिश, केंद्र शासित प्रदेश में कानून के शासन के लिए एक गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
आगे की कार्यवाही
मामला अब श्रीनगर सब-जज अदालत के समक्ष विचाराधीन है और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में त्वरित कार्यवाही का उद्देश्य ऐसे अपराधों के प्रति एक कड़ा संदेश देना है। आने वाले सप्ताहों में सुनवाई की तारीख तय होने की संभावना है।