जम्मू-कश्मीर: आरक्षण फाइल एलजी दफ्तर में अटकी, NC प्रवक्ता इमरान नबी डार ने यूटी मॉडल को बताया बाधा
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने 21 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में कहा कि जम्मू-कश्मीर में आरक्षण से जुड़ी फाइल उपराज्यपाल (एलजी) दफ्तर में अटकी पड़ी है, जबकि सरकार द्वारा गठित सब-कमेटी निर्धारित समयसीमा में अपनी सिफारिशें सौंप चुकी है। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) मॉडल और नौकरशाही के दबदबे को निर्वाचित सरकार के कामकाज में सबसे बड़ी बाधा करार दिया।
आरक्षण फाइल का अटकाव
डार ने स्पष्ट किया कि आरक्षण मसले पर बनी सब-कमेटी ने तय छह महीने की समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंप दीं। संबंधित कार्यालयों से जो आपत्तियाँ उठाई गईं, उन्हें भी दूर कर फाइल वापस भेजी गई। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्यवश वह फाइल एलजी ऑफिस में पड़ी हुई है और लोग हमसे सवाल कर रहे हैं।' डार ने एलजी से अनुरोध किया कि आरक्षण की फाइल को जल्द से जल्द अगले पड़ाव तक पहुँचाया जाए।
डेली वेजर्स का मुद्दा: एक साल में भी रिपोर्ट नहीं
20 से 25 वर्षों से सेवाएँ दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों (डेली वेजर्स) के भविष्य को लेकर भी डार ने गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार, मुख्य सचिव ने इस मुद्दे पर रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय माँगा था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकांश कर्मचारी अब सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब पहुँच चुके हैं, जिससे हज़ारों परिवारों का भविष्य अधर में लटका है। डार ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक करने और सिफारिशें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार को भेजने की माँग की।
यूटी मॉडल और नौकरशाही की चुनौती
डार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में यूटी का मौजूदा ढाँचा और सरकारी दफ्तरों में नौकरशाही का वर्चस्व निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए काम करना कठिन बना देता है। उन्होंने यह भी बताया कि NC के प्रतिनिधि केंद्रीय गृह मंत्री से मिले थे — अब उसे भी एक साल हो गया है — और गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत बिजनेस रूल्स लागू करने का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। डार ने तीखे शब्दों में कहा, 'कहीं न कहीं ऐसा लग रहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को सजा दी जा रही है।'
सरकार की उपलब्धियाँ और आगे की राह
डार ने दो वर्षों में उमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा किए गए कार्यों की भी जानकारी दी। इनमें स्टेटहुड बहाली का प्रस्ताव — जिसे BJP को छोड़कर सभी दलों का समर्थन मिला — फॉरेस्ट राइट्स एक्ट लागू करना, दरबार मूव व्यवस्था की वापसी, और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली शामिल है। इसके अलावा विधायक निधि (CDF) को ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹4 करोड़ किया गया। प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल पारित हुआ, मैरिज असिस्टेंस ₹50 हज़ार से बढ़ाकर ₹75 हज़ार की गई, महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा जारी रखी गई और दिव्यांगजनों के लिए अहम कदम उठाए गए।
केंद्र से जवाबदेही की माँग
डार ने कहा कि वंचित परिवारों को फिलहाल 6 सिलेंडर, मुफ्त राशन और 200 यूनिट मुफ्त बिजली मिल रही है, लेकिन अभी और काम करना बाकी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत सरकार को यह समझना होगा कि जम्मू-कश्मीर के लोग भी इस देश का हिस्सा हैं और उनके अधिकारों को उसी तरह संबोधित किया जाना चाहिए जैसा अन्य राज्यों में होता है। पाँच वर्षीय घोषणापत्र के तहत NC सरकार के दो साल पूरे होने पर डार ने कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद सरकार अपने वादों को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है।