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जेपी नड्डा की अध्यक्षता में स्वास्थ्य मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक, राजभाषा प्रसार पर बनी कार्ययोजना

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जेपी नड्डा की अध्यक्षता में स्वास्थ्य मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक, राजभाषा प्रसार पर बनी कार्ययोजना

सारांश

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हिंदी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक में राजभाषा को स्वास्थ्य संचार का आधार बनाने का आह्वान किया। राजभाषा पदों की समयबद्ध समीक्षा और वित्त मंत्रालय से समन्वय के निर्देश दिए गए।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 1 सितंबर को नई दिल्ली में हिंदी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की।
मंत्रालय और अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग की स्थिति की समीक्षा की गई।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी सरल हिंदी में जन-सामान्य तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया गया।
राजभाषा से संबंधित रिक्त पदों की सूची तैयार कर समयबद्ध समीक्षा के निर्देश दिए गए।
आवश्यकतानुसार वित्त मंत्रालय के साथ समन्वय कर पदों को पुनः सृजित करने की योजना बनाई जाएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में 1 सितंबर को नई दिल्ली में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक आयोजित हुई। बैठक में मंत्रालय और उसके अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग की समीक्षा की गई तथा स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी सरल हिंदी में जन-सामान्य तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक का मुख्य एजेंडा

बैठक में मंत्रालय के विभिन्न संबद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा के उपयोग की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। समिति के सदस्यों से हिंदी के प्रयोग को और व्यापक बनाने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं व सेवाओं से जुड़ी जानकारी को आम नागरिकों तक उनकी अपनी भाषा में पहुँचाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए। पिछली बैठक के बाद से मंत्रालय द्वारा किए गए प्रयासों की भी समीक्षा हुई।

नड्डा का संबोधन

नड्डा ने समिति सदस्यों के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का कार्य सीधे तौर पर जन-जीवन से जुड़ा है, इसलिए जनता से उनकी अपनी भाषा में संवाद करना मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से प्रभावी संवाद स्थापित करने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और उनकी प्रदायगी को बेहतर बनाया जा सकता है।

नड्डा ने पिछली बैठक के बाद से राजभाषा के प्रचार-प्रसार में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने भाषा को भारतीयता को सशक्त करने का माध्यम बताते हुए कहा कि देश अब पश्चिमी औपनिवेशिक प्रभाव से बाहर निकलते हुए अपनी भारतीय भाषाओं की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक महत्वपूर्ण अवसरों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों से हिंदी में अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।

राजभाषा पदों पर निर्देश

बैठक में नड्डा ने मंत्रालय के विभिन्न विभागों और संस्थानों में राजभाषा से संबंधित रिक्त पदों की समीक्षा कर उन्हें पुनः सृजित करने और समयबद्ध तरीके से भरने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित पदों की सूची शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वित्त मंत्रालय के साथ भी इस विषय पर समन्वय किया जा सके।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि देश की बड़ी आबादी हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में ही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ग्रहण करती है। सरल हिंदी में स्वास्थ्य सूचनाएँ उपलब्ध कराने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ने की संभावना है।

आगे की राह

राजभाषा पदों की सूची तैयार कर वित्त मंत्रालय के साथ समन्वय की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है। समिति के सुझावों के आधार पर मंत्रालय भविष्य की कार्ययोजना को अंतिम रूप देगा, जिससे हिंदी में स्वास्थ्य संचार को संस्थागत रूप दिया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। राजभाषा पदों का वर्षों से रिक्त रहना यह दर्शाता है कि घोषणाएँ पहले भी हुई हैं, पर संस्थागत अनुसरण कमज़ोर रहा है। वित्त मंत्रालय से समन्वय की शर्त इस प्रक्रिया को और लंबा खींच सकती है। जब तक पदों की भर्ती और हिंदी सामग्री की गुणवत्ता के लिए मापने योग्य लक्ष्य तय नहीं होते, यह बैठक एक और प्रशासनिक अनुष्ठान बनकर रह सकती है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वास्थ्य मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक कब और कहाँ हुई?
यह बैठक 1 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें मंत्रालय और उसके अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग की समीक्षा की गई।
इस बैठक में क्या मुख्य निर्णय लिए गए?
बैठक में राजभाषा से संबंधित रिक्त पदों की सूची तैयार कर उन्हें समयबद्ध तरीके से पुनः सृजित करने और भरने के निर्देश दिए गए। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी सरल हिंदी में जन-सामान्य तक पहुँचाने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
जेपी नड्डा ने हिंदी के महत्व पर क्या कहा?
नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्य सीधे जन-जीवन से जुड़ा है, इसलिए जनता से उनकी अपनी भाषा में संवाद करना ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से प्रभावी संवाद से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बेहतर होगी।
राजभाषा पदों पर क्या कार्रवाई होगी?
नड्डा ने निर्देश दिया कि मंत्रालय के विभिन्न विभागों में राजभाषा से जुड़े रिक्त पदों की सूची शीघ्र तैयार कर उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए। आवश्यकतानुसार वित्त मंत्रालय के साथ समन्वय कर इन पदों को पुनः सृजित किया जाएगा।
इस पहल का आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी सरल हिंदी में उपलब्ध कराने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे स्वास्थ्य योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जागरूकता बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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