JPC ने ओडिशा में राजनीति अपराधमुक्ति विधेयकों की जांच की, मंत्रियों पर हिरासत नियम प्रस्तावित

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JPC ने ओडिशा में राजनीति अपराधमुक्ति विधेयकों की जांच की, मंत्रियों पर हिरासत नियम प्रस्तावित

भुवनेश्वर में 29 अप्रैल 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न संगठनों के साथ तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तृत चर्चा की। इन विधेयकों का मूल उद्देश्य भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को अपराधमुक्त करना और संवैधानिक नैतिकता को सुदृढ़ बनाना है।

कौन से तीन विधेयक हैं जांच के दायरे में

JPC के समक्ष विचाराधीन तीन विधेयक हैं — संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025; जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025; और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025। इन तीनों विधेयकों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया था। लोकसभा में व्यवधान के बाद इन्हें नवंबर 2025 में संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था।

मुख्य घटनाक्रम और समिति की कार्यप्रणाली

JPC ने 4 दिसंबर 2025 को अपनी पहली बैठक की थी और तब से राज्य सरकारों, संस्थानों और विशेषज्ञों सहित हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया जारी है। सारंगी ने मीडिया को बताया कि समिति ने अब तक ओडिशा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों की सरकारों के साथ-साथ कई संस्थानों से भी परामर्श किया है। हितधारकों को दिल्ली में भी आमंत्रित किया गया है।

विधेयकों का सबसे अहम प्रावधान

सारंगी ने एक महत्वपूर्ण प्रावधान का उल्लेख किया — विधेयकों में प्रस्ताव है कि यदि कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या यहाँ तक कि प्रधानमंत्री भी एक निर्धारित अवधि से अधिक समय तक हिरासत में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा। यह प्रावधान राजनीतिक जवाबदेही की दिशा में एक दूरगामी कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि भारत में दर्जनों सांसदों और विधायकों पर आपराधिक मामले लंबित हैं, और यह विधेयक उसी संदर्भ में लाए गए हैं।

हितधारकों की प्रतिक्रिया और सहमति

सारंगी के अनुसार, कुछ प्रावधानों पर मतभेद अवश्य हैं, परंतु विधेयकों के मूल उद्देश्य पर व्यापक सहमति देखी गई है। उन्होंने कहा,

Nation Press