ज्योति वाघमारे का उद्धव ठाकरे पर हमला: 'बाला साहेब के सिद्धांत भूले, शिंदे किसानों के लिए 50 ट्रक राहत भेज रहे'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना की नेता और सांसद ज्योति वाघमारे ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में उद्धव ठाकरे गुट पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वे बाला साहेब ठाकरे के सिद्धांतों को भूल चुके हैं, जबकि एकनाथ शिंदे सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए 50 ट्रक राहत सामग्री रवाना कर रहे हैं। वाघमारे ने आरोप लगाया कि जहाँ किसान सूखे से बेहाल हैं, वहीं उद्धव ठाकरे सत्ता परिवर्तन के नारे लगाने में व्यस्त हैं।
बाला साहेब के सिद्धांतों की याद
वाघमारे ने कहा कि बाला साहेब ठाकरे ने शिवसेना को यह शिक्षा दी थी कि 80 प्रतिशत कार्य समाज सेवा का होना चाहिए और केवल 20 प्रतिशत राजनीति। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य से, उनके बेटे इन सिद्धांतों को भूल गए हैं।' उनके अनुसार शिवसेना की असली पहचान हमेशा से जनसेवा रही है, न कि केवल सत्ता की लालसा।
शिंदे की किसान राहत पहल
वाघमारे ने बताया कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में करीब 50 ट्रक राहत सामग्री सूखा प्रभावित क्षेत्रों की ओर रवाना की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे ने महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से मुंबई आने की योजना बना रहे लाखों शिवसैनिकों को रोक दिया और उनसे अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर किसानों की सेवा करने को कहा, ताकि ज़रूरतमंदों को सही समय पर मदद मिल सके।
विपक्ष पर सीधा निशाना
वाघमारे ने संजय राउत, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सुप्रिया सुले के बयानों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश का संचालन नेताओं के भाषणों से नहीं, बल्कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के अनुसार होता है। उनका आरोप था कि विपक्षी नेता बाबासाहेब आंबेडकर, संविधान और देश की जनता के हितों के विरुद्ध काम कर रहे हैं।
सीजेपी पर टिप्पणी
वाघमारे ने सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) पर भी निशाना साधा और कहा कि ये संगठन केवल लोगों को भड़काने का प्रयास करता है। उनके शब्दों में, 'इनका इरादा गलत है, इसलिए ये सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री के आवास पर प्रदर्शन करने जाते हैं।'
आगे क्या होगा
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच यह वैचारिक द्वंद्व आने वाले समय में और तीखा होने के संकेत हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की दशा एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। शिंदे गुट की राहत पहल को उनके समर्थकों द्वारा बाला साहेब की विरासत के दावे को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।