दशहरा रैली में एकनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर हमला: '2019 में भाजपा के नाम पर वोट लेकर जनादेश से धोखा किया'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित दशहरा रैली के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखे आरोप लगाए और कहा कि उन्होंने 2019 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नाम पर वोट माँगकर मतदाताओं के जनादेश के साथ खुला धोखा किया। शिंदे ने रैली में अपने आलोचकों को भी करारा जवाब दिया और किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
जनादेश से धोखे का आरोप
शिंदे ने सीधे तौर पर ठाकरे की राजनीतिक वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा, '2019 में वोटों की सबसे बड़ी चोरी हुई, जब आपने भाजपा के नाम पर चुनाव लड़ा और बाद में महाविकास अघाड़ी के साथ मिलकर सरकार बना ली। यह मतदाताओं के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे 'पिछले दरवाजे' से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, जो किसी भी लोकतांत्रिक मानदंड पर खरा नहीं उतरता।
गौरतलब है कि 2019 के विधानसभा चुनावों में BJP-शिवसेना गठबंधन के रूप में लड़ने के बाद उद्धव ठाकरे ने BJP से नाता तोड़कर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई थी। शिंदे के ये बयान उसी राजनीतिक घटनाक्रम को केंद्र में रखते हैं।
राहुल गांधी पर भी निशाना
शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट तक हाल ही में निकाले गए मार्च को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस तरह का मार्च पहले कभी नहीं हुआ था। यह टिप्पणी महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी एकता के प्रयासों के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
किसानों के लिए सरकारी प्रतिबद्धता
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने रैली में कहा कि महाराष्ट्र इस समय सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहा है और किसान गहरे संकट में हैं। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा, 'मैं सिर्फ भाषण देने वालों में से नहीं हूँ। हम लोगों तक राशन पहुँचाने वाले हैं। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मैंने किसानों को राहत पहुँचाने के लिए नौकरशाही के नियमों को दरकिनार कर दिया था।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसानों के बच्चों की शिक्षा और शादियों की ज़िम्मेदारी उठाना शिवसेना का काम रहा है।
विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए शिंदे ने राज्य सरकार की ₹32,000 करोड़ की कर्जमाफी योजना का हवाला दिया और ₹5,000 के तत्काल वित्तीय पैकेज को आपातकालीन सहायता के रूप में उचित ठहराया।
शिवसेना के 60 साल और विरासत का दावा
शिंदे ने रेखांकित किया कि शिवसेना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं और उनकी शाखा संगठन की असली परंपराओं को जीवित रखे हुए है। यह बयान उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के उस दावे के प्रत्युत्तर में आया है जिसमें वे खुद को बाल ठाकरे की विरासत का उत्तराधिकारी बताते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों धड़े शिवसेना नाम और पार्टी चिह्न पर अपना-अपना दावा जताते रहे हैं।
आगे की राजनीति
शिंदे ने स्पष्ट किया कि वे रोज़-रोज़ की बयानबाज़ी में उलझने के बजाय अपने विकास कार्यों और ज़मीनी प्रयासों के ज़रिए राजनीतिक विरोधियों को जवाब देंगे। विश्लेषकों के अनुसार दशहरा रैली का यह मंच परंपरागत रूप से शिवसेना के लिए राजनीतिक एजेंडा तय करने का अवसर रहा है — इस बार दोनों धड़ों ने इसका पूरा उपयोग किया।