8 अक्टूबर 2026
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कानपुर: तीन तलाक पीड़िता आफरीन की दास्तान — 16 साल, 2 बच्चे, फिर भी बेघर

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कानपुर: तीन तलाक पीड़िता आफरीन की दास्तान — 16 साल, 2 बच्चे, फिर भी बेघर

सारांश

कानपुर में आफरीन नाम की महिला का दर्द — 16 साल की शादी, दो बच्चे, और फिर भी 12 अगस्त की रात बेटों के सामने तीन तलाक। तीन तलाक को आपराधिक घोषित किए जाने के वर्षों बाद भी यह मामला कानून के असरदार क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

कानपुर की आफरीन ने पति पर 16 साल की शादी के बाद तीन तलाक देने और घर से निकालने का आरोप लगाया।
कथित तीन तलाक 12 अगस्त की रात रात 9:30 बजे दोनों बेटों के सामने दिया गया।
चमनगंज पुलिस स्टेशन में दहेज उत्पीड़न, मारपीट और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज।
महिला का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती शिकायतें महीनों तक दर्ज नहीं कीं; डीसीपी (सेंट्रल) अतुल श्रीवास्तव ने पहले सुलह-कोशिश की पुष्टि की।
पीड़िता ने पति की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की है; मामले की जाँच जारी है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आफरीन नाम की एक महिला ने अपने पति पर कथित तौर पर तीन तलाक देने, मारपीट करने और घर से निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को बताया कि 16 वर्षों की शादी और दो बच्चों के बावजूद उन्हें घर से बाहर कर दिया गया। चमनगंज पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज होने के बाद महिला ने पति की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की है।

घटनाक्रम की शुरुआत

आफरीन के अनुसार, 7 जुलाई को उन्होंने अपने पति को उसी इलाके में रहने वाली एक अन्य महिला के साथ कथित रूप से रंगे हाथों पकड़ा। उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं था और वह कई बार पति को समझाने की कोशिश कर चुकी थीं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। उस दिन की मुठभेड़ के बाद सभी रिश्तेदारों को बुलाया गया, मगर पति ने साफ कह दिया कि वह दूसरी महिला से निकाह करेगा।

महिला का आरोप है कि पति न केवल उनके साथ मारपीट करते थे, बल्कि घर का खर्च भी नहीं उठाते थे। उन्होंने कहा, 'मैंने यह सोचकर सब सह लिया कि इसका असर मेरे परिवार और बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए।'

तीन तलाक की रात

आफरीन के अनुसार, 12 अगस्त की रात करीब रात 9:30 बजे उनके पति ने उनके दो बेटों के सामने तीन तलाक का उच्चारण किया और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। यह घटना तब हुई जब मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत तीन तलाक पहले से ही एक दंडनीय अपराध है।

गौरतलब है कि भारत में 2019 में तीन तलाक को आपराधिक कृत्य घोषित किया जा चुका है, फिर भी इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं, जो कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हैं।

पुलिस कार्रवाई और प्रशासन का रुख

महिला की शिकायत पर चमनगंज पुलिस स्टेशन में दहेज उत्पीड़न, मारपीट, नाजायज संबंध और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। हालाँकि, महिला का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती शिकायतें लंबे समय तक दर्ज नहीं कीं और एफआईआर अक्टूबर में जाकर दर्ज हुई।

कानपुर के डीसीपी (सेंट्रल) अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि शुरू में सुलह-समझौते की कोशिश की जा रही थी, लेकिन जैसे ही तीन तलाक का मामला सामने आया, तुरंत एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जाँच जारी है।

पीड़िता की माँग

आफरीन ने प्रशासन से माँग की है कि उनके पति को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। दो बच्चों की माँ का कहना है कि उन्हें और उनके बच्चों को अब भी पति की ओर से परेशान किए जाने का डर है।

यह मामला तीन तलाक कानून लागू होने के बाद भी इस कुप्रथा की जारी मौजूदगी को उजागर करता है। जाँच के नतीजे और पुलिस की आगामी कार्रवाई तय करेगी कि पीड़िता को कितनी जल्दी न्याय मिलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य से इस तरह के मामले सामने आना दर्शाता है कि कानून का जागरूकता-स्तर पर प्रसार अभी भी अधूरा है। इससे भी गंभीर सवाल यह है कि पीड़िता की शुरुआती शिकायतें महीनों तक क्यों दर्ज नहीं हुईं — पुलिस की 'सुलह-पहले' नीति कभी-कभी पीड़ित महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा की पहुँच में देरी का कारण बन जाती है। यह मामला अकेला नहीं है; राष्ट्रीय महिला आयोग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जिनमें थाना-स्तर पर FIR दर्ज करने में हिचकिचाहट सामने आती है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर तीन तलाक मामला क्या है?
कानपुर की आफरीन नाम की महिला ने अपने पति पर 16 साल की शादी और दो बच्चों के बाद 12 अगस्त की रात तीन तलाक देने और घर से निकालने का आरोप लगाया है। चमनगंज पुलिस स्टेशन में दहेज उत्पीड़न और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
तीन तलाक कानून भारत में क्या कहता है?
भारत में 2019 में पारित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत एक साथ तीन तलाक देना एक दंडनीय अपराध है, जिसमें तीन साल तक की कैद का प्रावधान है। यह कानून तत्काल तीन तलाक को गैर-कानूनी और शून्य घोषित करता है।
FIR दर्ज होने में देरी क्यों हुई?
डीसीपी (सेंट्रल) अतुल श्रीवास्तव के अनुसार, शुरू में मामले में सुलह-समझौते की कोशिश की जा रही थी। जैसे ही तीन तलाक का मामला स्पष्ट हुआ, तुरंत एफआईआर दर्ज की गई। हालाँकि, महिला का आरोप है कि उनकी शुरुआती शिकायतों को महीनों तक नजरअंदाज किया गया।
पीड़िता ने पुलिस से क्या माँग की है?
आफरीन ने माँग की है कि उनके पति को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें और उनके बच्चों को अभी भी पति की ओर से परेशानी का खतरा है।
इस मामले में किन धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई है?
पुलिस ने दहेज के लिए उत्पीड़न, मारपीट, नाजायज रिश्ते और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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