बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी: पाकिस्तानी सेना ने महिलाओं समेत तीन नागरिकों को उठाया
सारांश
Key Takeaways
- 22 अप्रैल को खुजदार जिले की समीना को FC और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने घर से उठाया, परिवार से मारपीट की।
- 14 अप्रैल को केच जिले की 22 वर्षीय गुल बानुक को FC और CTD ने रात में घर से अपहृत किया।
- 19 अप्रैल को पंजगुर के 20 वर्षीय मैकेनिक अख्तर हुसैन को FC ने जबरन उठाया।
- 28 वर्षीय बलूच लेखक दाद शाह को 21 अप्रैल को दूसरी बार गायब किया गया — बहन फोजिया बलूच के मानवाधिकार कार्य को दबाने की कोशिश।
- फ्रंट लाइन डिफेंडर्स और बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने पाकिस्तान से तत्काल दमन रोकने की मांग की।
- बलूचिस्तान में महिलाओं को जबरन गायब करना परिवारों और असहमति को दबाने का हथियार बन चुका है — मानवाधिकार संगठन।
क्वेटा, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक और अंतरराष्ट्रीय संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने शुक्रवार को खुलासा किया कि पाकिस्तानी फ्रंटियर कॉर्प्स (FC), मिलिट्री इंटेलिजेंस और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने अप्रैल के दूसरे और तीसरे हफ्ते में महिलाओं समेत कम से कम तीन आम नागरिकों को उनके घरों से जबरदस्ती उठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया।
तीन गुमशुदगियों का ब्योरा
22 अप्रैल की रात खुजदार जिले के इस्तखली इलाके में FC और मिलिट्री इंटेलिजेंस के जवान समीना के घर में घुसे। परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करने के बाद उसे हिरासत में लेकर किसी अनजान जगह ले जाया गया।
पंजगुर जिले के शापतन इलाके का रहने वाला 20 वर्षीय मैकेनिक अख्तर हुसैन को 19 अप्रैल को FC के जवानों ने जबरदस्ती उठा लिया। उसके परिवार को अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
केच जिले के सिंगाबाद कार्की इलाके में 14 अप्रैल को देर रात FC और CTD के जवानों ने 22 वर्षीय गुल बानुक को उसके घर से उठा लिया। बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) के अनुसार, उसके अपहरण के बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है।
मानवाधिकार संगठनों की कड़ी निंदा
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने कहा, "बलूच महिलाओं को जबरदस्ती गायब करना तथाकथित सुरक्षा के नाम पर किया जा रहा है। ये काम पूरे समुदायों के खिलाफ सामूहिक सजा के बराबर हैं।" संगठन ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं को परिवारों को चुप कराने और असहमति दबाने के लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने एक अन्य मामले पर भी ध्यान दिलाया। 28 वर्षीय बलूच लेखक दाद शाह को 21 अप्रैल को दूसरी बार जबरदस्ती गायब किया गया। वह बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की सदस्य फोजिया बलूच के भाई हैं। संगठन ने इसे उनकी बहन के मानवाधिकार कार्य को दबाने की सोची-समझी कोशिश बताया।
बढ़ता दमन और अंतरराष्ट्रीय चिंता
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने कहा, "पाकिस्तान में अधिकारी अपने नागरिकों और मानवाधिकार रक्षकों के खिलाफ बेखौफ होकर काम करते हैं।" संगठन ने यह भी कहा कि धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पिछले कुछ वर्षों में और अधिक बढ़ी है।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएं बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामलों पर पाकिस्तान को पहले भी आगाह कर चुकी हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्टों में यह पैटर्न दशकों से दर्ज है।
पाकिस्तान से अपील और आगे की राह
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तत्काल अपील की है कि वे बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के खिलाफ सभी प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयां बंद करें। संगठन ने मांग की कि सभी मानवाधिकार रक्षकों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में काम करने दिया जाए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाला देश बताने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, बलूचिस्तान में यह दमन का चक्र जारी रहेगा।