8 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी: पाकिस्तानी सेना ने महिलाओं समेत तीन नागरिकों को उठाया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी: पाकिस्तानी सेना ने महिलाओं समेत तीन नागरिकों को उठाया

सारांश

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी FC, मिलिट्री इंटेलिजेंस और CTD ने अप्रैल में महिलाओं समेत तीन नागरिकों को जबरन उठाया। बलूच लेखक दाद शाह को दूसरी बार गायब किया गया। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान से तत्काल कार्रवाई रोकने की मांग की।

मुख्य बातें

22 अप्रैल को खुजदार जिले की समीना को FC और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने घर से उठाया, परिवार से मारपीट की।
14 अप्रैल को केच जिले की 22 वर्षीय गुल बानुक को FC और CTD ने रात में घर से अपहृत किया।
19 अप्रैल को पंजगुर के 20 वर्षीय मैकेनिक अख्तर हुसैन को FC ने जबरन उठाया।
28 वर्षीय बलूच लेखक दाद शाह को 21 अप्रैल को दूसरी बार गायब किया गया — बहन फोजिया बलूच के मानवाधिकार कार्य को दबाने की कोशिश।
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स और बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने पाकिस्तान से तत्काल दमन रोकने की मांग की।
बलूचिस्तान में महिलाओं को जबरन गायब करना परिवारों और असहमति को दबाने का हथियार बन चुका है — मानवाधिकार संगठन।

क्वेटा, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक और अंतरराष्ट्रीय संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने शुक्रवार को खुलासा किया कि पाकिस्तानी फ्रंटियर कॉर्प्स (FC), मिलिट्री इंटेलिजेंस और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने अप्रैल के दूसरे और तीसरे हफ्ते में महिलाओं समेत कम से कम तीन आम नागरिकों को उनके घरों से जबरदस्ती उठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया।

तीन गुमशुदगियों का ब्योरा

22 अप्रैल की रात खुजदार जिले के इस्तखली इलाके में FC और मिलिट्री इंटेलिजेंस के जवान समीना के घर में घुसे। परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करने के बाद उसे हिरासत में लेकर किसी अनजान जगह ले जाया गया।

पंजगुर जिले के शापतन इलाके का रहने वाला 20 वर्षीय मैकेनिक अख्तर हुसैन को 19 अप्रैल को FC के जवानों ने जबरदस्ती उठा लिया। उसके परिवार को अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।

केच जिले के सिंगाबाद कार्की इलाके में 14 अप्रैल को देर रात FC और CTD के जवानों ने 22 वर्षीय गुल बानुक को उसके घर से उठा लिया। बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) के अनुसार, उसके अपहरण के बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है।

मानवाधिकार संगठनों की कड़ी निंदा

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने कहा, "बलूच महिलाओं को जबरदस्ती गायब करना तथाकथित सुरक्षा के नाम पर किया जा रहा है। ये काम पूरे समुदायों के खिलाफ सामूहिक सजा के बराबर हैं।" संगठन ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं को परिवारों को चुप कराने और असहमति दबाने के लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने एक अन्य मामले पर भी ध्यान दिलाया। 28 वर्षीय बलूच लेखक दाद शाह को 21 अप्रैल को दूसरी बार जबरदस्ती गायब किया गया। वह बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की सदस्य फोजिया बलूच के भाई हैं। संगठन ने इसे उनकी बहन के मानवाधिकार कार्य को दबाने की सोची-समझी कोशिश बताया।

बढ़ता दमन और अंतरराष्ट्रीय चिंता

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने कहा, "पाकिस्तान में अधिकारी अपने नागरिकों और मानवाधिकार रक्षकों के खिलाफ बेखौफ होकर काम करते हैं।" संगठन ने यह भी कहा कि धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पिछले कुछ वर्षों में और अधिक बढ़ी है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएं बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामलों पर पाकिस्तान को पहले भी आगाह कर चुकी हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्टों में यह पैटर्न दशकों से दर्ज है।

पाकिस्तान से अपील और आगे की राह

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तत्काल अपील की है कि वे बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के खिलाफ सभी प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयां बंद करें। संगठन ने मांग की कि सभी मानवाधिकार रक्षकों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में काम करने दिया जाए।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाला देश बताने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, बलूचिस्तान में यह दमन का चक्र जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राज्य-प्रायोजित पैटर्न है जिसमें महिलाओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है — परिवारों को चुप कराने और मानवाधिकार आंदोलनों को कुचलने के लिए। विडंबना यह है कि पाकिस्तान एक ओर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकारों की दुहाई देता है और दूसरी ओर उसकी सुरक्षा एजेंसियां बेखौफ होकर नागरिकों को उठा रही हैं। दाद शाह का दूसरी बार अपहरण यह बताता है कि यह महज सुरक्षा अभियान नहीं, बल्कि असहमति की आवाज़ों को जड़ से खत्म करने की रणनीति है। जब तक संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शक्तियां ठोस जवाबदेही की मांग नहीं करतीं, यह चक्र नहीं टूटेगा।
RashtraPress
8 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में हाल ही में किन नागरिकों को जबरन गायब किया गया?
अप्रैल 2025 में समीना (खुजदार), गुल बानुक (केच) और अख्तर हुसैन (पंजगुर) को पाकिस्तानी FC, CTD और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने जबरदस्ती उठाया। इनमें से किसी का भी अब तक पता नहीं चला है।
दाद शाह कौन हैं और उन्हें क्यों गायब किया गया?
दाद शाह 28 वर्षीय बलूच लेखक हैं और बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की सदस्य फोजिया बलूच के भाई हैं। फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के अनुसार, उन्हें 21 अप्रैल को दूसरी बार इसलिए गायब किया गया ताकि उनकी बहन के मानवाधिकार कार्य को दबाया जा सके।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामलों में कौन-कौन से संगठन शामिल हैं?
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) , मिलिट्री इंटेलिजेंस और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) इन अपहरणों में शामिल हैं। ये तीनों पाकिस्तान की सरकारी सुरक्षा एजेंसियां हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान से क्या मांग की है?
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तत्काल सभी प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयां बंद करने और मानवाधिकार रक्षकों को सुरक्षित माहौल में काम करने देने की मांग की है। बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने महिलाओं के खिलाफ इस दमन को सामूहिक सजा बताया है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की समस्या कितने समय से चल रही है?
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं का सिलसिला दशकों पुराना है। ह्यूमन राइट्स वॉच , एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र इस पैटर्न को अपनी रिपोर्टों में लंबे समय से दर्ज करते आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले