उज्जैन के हरनियाखेड़ा गांव में महिला को जूतों की माला पहनाकर घुमाया, 6 गिरफ्तार; 5 फरार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के हरनियाखेड़ा गांव में मंगलवार, 1 जुलाई को एक महिला और उसके पति के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया — भीड़ ने महिला के कपड़े फाड़े, बाल काटे और उसे जबरन जूतों की माला पहनाकर गांव में घुमाया। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के अनुसार, 11 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिनमें से 6 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और 5 अभी भी फरार हैं।
घटना का क्रम
यह महिला तीन साल पहले अपने पहले पति को छोड़कर उसी गांव के एक अन्य व्यक्ति के साथ रहने लगी थी। बाद में दोनों ने विधिवत विवाह कर लिया और इंदौर में बस गए। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे यह दंपती एक जमीन विवाद सुलझाने के लिए हरनियाखेड़ा लौटे। झारदा पुलिस स्टेशन मुख्यालय से यह गांव लगभग 20 किलोमीटर दूर है।
महिला के पूर्व ससुर ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर दंपती पर हमला करने की साजिश रची। भीड़ ने महिला के साथ अमानवीय व्यवहार किया और उसके पति पर भी बेरहमी से हमला किया गया। घटना के दौरान कई ग्रामीण हस्तक्षेप करने के बजाय वीडियो बनाते रहे।
वीडियो वायरल और पुलिस कार्रवाई
घटना का वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद व्यापक निंदा हुई। सूचना मिलते ही झारदा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के आने की खबर फैलते ही गांव में दहशत फैल गई। पुलिस ने सुमेर सिंह, बद्रीलाल, कचरू और तीन अन्य को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने पुष्टि की कि सभी आरोपी महिला के पूर्व ससुराल पक्ष से हैं। तीन महिलाओं सहित 11 लोगों पर मामला दर्ज है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है।
सुरक्षा और जांच की स्थिति
गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। पुलिस ने पीड़ित दंपती के बयान दर्ज कर लिए हैं। जांच अधिकारी के अनुसार, घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक संदर्भ और चिंता
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में महिलाओं के खिलाफ सार्वजनिक अपमान और 'सामाजिक न्याय' के नाम पर दी जाने वाली सजाओं पर बहस जारी है। गौरतलब है कि ग्रामीणों का वीडियो बनाना और भीड़ का निष्क्रिय रहना — यह दर्शाता है कि सामूहिक जवाबदेही का अभाव भी इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा देता है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि वीडियो बनाने वाले ग्रामीणों की कानूनी जिम्मेदारी क्या बनती है।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया पर आगे की नज़र बनी रहेगी।