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कर्नाटक में 'बोरवेल सुरक्षा अभियान' की शुरुआत, मंत्री अजय धर्म सिंह ने दिए खुले बोरवेल बंद करने के निर्देश

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कर्नाटक में 'बोरवेल सुरक्षा अभियान' की शुरुआत, मंत्री अजय धर्म सिंह ने दिए खुले बोरवेल बंद करने के निर्देश

सारांश

कर्नाटक सरकार ने 'बोरवेल सुरक्षा अभियान' के जरिए खुले और बेकार पड़े बोरवेल बंद करने की मुहिम छेड़ी है। मंत्री अजय धर्म सिंह ने जियो-टैगिंग और नागरिक रिपोर्टिंग पोर्टल का प्रस्ताव रखते हुए 'खुले बोरवेल-मुक्त कर्नाटक' का लक्ष्य तय किया है।

मुख्य बातें

कर्नाटक में 'बोरवेल सुरक्षा अभियान' की घोषणा, जिसका उद्देश्य राज्य को असुरक्षित खुले बोरवेल से मुक्त करना है।
मंत्री अजय धर्म सिंह ने भूजल विकास निदेशालय को विस्तृत कार्य-योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
पहले चरण में लघु सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज सभी बेकार बोरवेल की पहचान और सुरक्षित बंदी होगी।
व्हाट्सएप हेल्पलाइन और वेब-आधारित रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए नागरिक खुले बोरवेल की सूचना दे सकेंगे।
प्रस्तावित प्रणाली में जियो-टैगिंग और रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा होगी।
सचिव राजेश अमीनभावी और निदेशालय के अधिकारियों को शीघ्र कार्य-योजना प्रस्तुत करने का आदेश।

कर्नाटक सरकार के लघु सिंचाई एवं भूजल विकास विभाग ने राज्य को असुरक्षित खुले बोरवेल से मुक्त कराने के लिए 'बोरवेल सुरक्षा अभियान' शुरू करने की घोषणा की है। लघु सिंचाई एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्री अजय धर्म सिंह ने 7 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी देते हुए भूजल विकास निदेशालय को एक विस्तृत कार्य-योजना तैयार करने का आदेश दिया। यह कदम उन घटनाओं की पृष्ठभूमि में उठाया गया है जिनमें बच्चे खुले बोरवेल में गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए या जान गँवा चुके हैं।

अभियान की रूपरेखा और चरणबद्ध योजना

पहले चरण में विभाग उन सभी बेकार और बंद पड़े बोरवेल की पहचान करेगा जो लघु सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इन्हें सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया जाएगा। मंत्री अजय धर्म सिंह ने स्पष्ट कहा, 'किसी भी खुले बोरवेल को बच्चे की जान के लिए खतरा नहीं बनने दिया जाना चाहिए।'

दूसरे चरण में यह अभियान अन्य सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए सार्वजनिक स्थलों पर मौजूद असुरक्षित बोरवेल की पहचान और उन्हें सुरक्षित बनाने का कार्य करेगा।

नागरिक-भागीदारी के लिए तकनीकी व्यवस्था

विभाग एक व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर और वेब-आधारित रिपोर्टिंग पोर्टल स्थापित करने पर विचार कर रहा है। इसके माध्यम से आम नागरिक संदिग्ध खुले बोरवेल की तस्वीरें और उनकी भौगोलिक स्थिति भेजकर सूचित कर सकेंगे।

प्रस्तावित प्रणाली में जियो-टैगिंग और रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी होगी, जिससे शिकायत दर्ज होने से लेकर बोरवेल को बंद किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। यह तकनीकी ढाँचा उन बोरवेल को भी सामने लाने में सहायक होगा जो अभी तक सरकारी रिकॉर्ड से बाहर हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि खुले बोरवेल से होने वाली दुर्घटनाओं के मद्देनज़र सर्वोच्च न्यायालय पहले ही इस विषय पर सख्त दिशानिर्देश जारी कर चुका है। इन निर्देशों के बावजूद यह संभावना बनी रहती है कि कुछ बोरवेल — विशेषकर जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं या जिनकी ड्रिलिंग की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है — ठीक से सुरक्षित न किए गए हों।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में बच्चों के खुले बोरवेल में गिरने की घटनाएँ सामने आती रही हैं, जो प्रशासनिक चूक को उजागर करती हैं।

अधिकारियों को निर्देश

मंत्री अजय धर्म सिंह ने विभाग के सचिव राजेश अमीनभावी और भूजल विकास निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों को इस अभियान के लिए एक विस्तृत कार्य-योजना जल्द से जल्द प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मंत्री ने कहा, 'हमारा मकसद सिर्फ विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद बोरवेल की जांच करना ही नहीं है — हमें उन बोरवेल की भी पहचान करनी है जो शायद अधिकारियों की नज़र से छूट गए हों। हमारा लक्ष्य 'खुले बोरवेल-मुक्त कर्नाटक' बनाना है।'

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान की सफलता काफ़ी हद तक अंतर-विभागीय समन्वय और नागरिक भागीदारी पर निर्भर करेगी। जब तक तकनीकी रिपोर्टिंग व्यवस्था ज़मीन पर उतरती है और विभागीय समन्वय सुनिश्चित होता है, तब तक यह देखना होगा कि 'खुले बोरवेल-मुक्त कर्नाटक' का लक्ष्य कितनी तेज़ी से हासिल किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा उन 'अनरिकॉर्डेड' बोरवेल की है जो न किसी विभाग के रजिस्टर में हैं, न किसी एजेंसी की जवाबदेही में। नागरिक-रिपोर्टिंग और जियो-टैगिंग का विचार उत्साहजनक है, परंतु बिना दंडात्मक प्रावधान और समयबद्ध लक्ष्य के, यह एक और 'अभियान' बनकर रह सकता है जो घोषणा से आगे नहीं बढ़ता। जब तक ड्रिलिंग एजेंसियों पर अनुपालन की सख्त ज़िम्मेदारी नहीं डाली जाती, नए बोरवेल खुलते रहेंगे और खतरा बना रहेगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक का 'बोरवेल सुरक्षा अभियान' क्या है?
यह कर्नाटक सरकार के लघु सिंचाई एवं भूजल विकास विभाग द्वारा शुरू किया जा रहा एक राज्यव्यापी अभियान है जिसका उद्देश्य सभी असुरक्षित और बेकार पड़े खुले बोरवेल की पहचान करके उन्हें सुरक्षित रूप से बंद करना है। मंत्री अजय धर्म सिंह ने 6 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की।
इस अभियान में नागरिक कैसे भाग ले सकते हैं?
विभाग एक व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर और वेब-आधारित रिपोर्टिंग पोर्टल स्थापित करने पर विचार कर रहा है, जिसके जरिए नागरिक संदिग्ध खुले बोरवेल की तस्वीरें और उनकी लोकेशन भेज सकेंगे। यह सुविधा अभी प्रस्तावित है और जल्द लागू किए जाने की उम्मीद है।
अभियान किन चरणों में लागू होगा?
पहले चरण में लघु सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज बेकार बोरवेल की जाँच और उन्हें बंद किया जाएगा। दूसरे चरण में अन्य सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर सार्वजनिक स्थलों के असुरक्षित बोरवेल को भी चिह्नित और सुरक्षित किया जाएगा।
खुले बोरवेल पर पहले से क्या कानूनी प्रावधान हैं?
सर्वोच्च न्यायालय पहले ही खुले बोरवेल को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी कर चुका है। हालाँकि इन निर्देशों के बावजूद, विशेषकर सरकारी रिकॉर्ड से बाहर के बोरवेल पर जमीनी अनुपालन की कमी बनी रहती है।
इस अभियान के लिए किन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है?
मंत्री अजय धर्म सिंह ने विभाग के सचिव राजेश अमीनभावी और भूजल विकास निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों को अभियान की विस्तृत कार्य-योजना शीघ्र तैयार करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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