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करूर भगदड़ की पहली बरसी: विजय की रैली में 41 मौतें, एक साल बाद भी घाव ताज़े

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करूर भगदड़ की पहली बरसी: विजय की रैली में 41 मौतें, एक साल बाद भी घाव ताज़े

सारांश

एक साल पहले वेलुसामीपुरम में जो राजनीतिक उत्साह था, वह पलभर में त्रासदी बन गया। 41 मौतें, सैकड़ों घायल और अनगिनत परिवारों का टूटा विश्वास — करूर की पहली बरसी सिर्फ शोक की याद नहीं, बल्कि भीड़ प्रबंधन और राजनीतिक जिम्मेदारी पर एक अनुत्तरित सवाल भी है।

मुख्य बातें

27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर के वेलुसामीपुरम में टीवीके की रैली में भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई, 100 से अधिक घायल हुए।
मृतकों में बच्चे भी शामिल थे; घटना तब हुई जब भीड़ विजय की प्रचार गाड़ी की ओर उमड़ी।
सर्वोच्च न्यायालय ने जाँच CBI को सौंपी और निगरानी समिति गठित की।
मुख्यमंत्री विजय ने 10 जुलाई 2026 को करूर दौरे पर पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे और स्मारक बनाने की घोषणा की।
पहली बरसी पर वादा किया गया स्मारक निर्माणाधीन है; पीड़ित परिवार न्याय और जवाबदेही की प्रतीक्षा में हैं।

तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर 2025 को हुई भगदड़ की पहली बरसी पर पीड़ित परिवार और बचे हुए लोग उस रात के दर्द को एक बार फिर महसूस कर रहे हैं, जब तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की रैली में 41 लोगों की जान चली गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। यह त्रासदी करूर के इतिहास में एक ऐसे दिन के रूप में दर्ज हो गई है जिसे शहर कभी नहीं भूल सकता।

वह काली रात — घटनाक्रम

27 सितंबर 2025 की सुबह से ही वेलुसामीपुरम में टीवीके समर्थक जमा होने लगे थे। हज़ारों की भीड़ — जिसमें परिवार, महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे — अभिनेता से नेता बने विजय की एक झलक पाने के लिए उत्साहित थी। पार्टी के गाने बज रहे थे और माहौल उत्सव जैसा था। जब विजय उस शाम अपनी प्रचार गाड़ी में उस इलाके में पहुँचे, तो उत्साहित समर्थक उनकी ओर उमड़ पड़े।

देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। कुछ लोग संतुलन खो बैठे और गिरकर दूसरों के नीचे दब गए। आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर लोगों को भीड़ से बाहर निकाला और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक राजनीतिक सभा के रूप में शुरू हुआ यह कार्यक्रम 41 मौतों के साथ समाप्त हुआ, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।

जाँच और जवाबदेही

इस त्रासदी ने कई गंभीर सवाल खड़े किए — कार्यक्रम स्थल का चयन, भीड़ नियंत्रण के इंतज़ाम, सुरक्षा व्यवस्था की खामियाँ और ज़िम्मेदारी का निर्धारण। सर्वोच्च न्यायालय ने घटना की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपी और निगरानी के लिए एक समिति गठित की। जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखे मतभेद रहे और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लंबे समय तक चला।

गौरतलब है कि इस तरह की राजनीतिक रैलियों में भीड़ प्रबंधन की विफलताएँ यह पहली बार नहीं थीं, लेकिन इस घटना की भीषणता ने पूरे देश को झकझोर दिया।

पीड़ित परिवारों की स्थिति

तत्कालीन राज्य सरकार और टीवीके ने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया। हालाँकि, आर्थिक मदद उस दर्द की भरपाई नहीं कर सकती जो उन परिवारों को हुआ है जिन्होंने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया। पीड़ित परिवारों के अनुसार, इस बरसी पर वेलुसामीपुरम में उस रात के इंतज़ार, भगदड़ के बाद की अफरातफरी और अस्पतालों से मिली दुखद खबरों की यादें एक बार फिर ताज़ी हो जाती हैं।

मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा

विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 10 जुलाई 2026 को करूर का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कुछ परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे और यह घोषणा की कि करूर शहर में मृतकों की स्मृति में एक स्मारक बनाया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब CBI की जाँच अभी भी जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा में हैं।

बरसी पर करूर का दर्द

पहली बरसी के अवसर पर करूर में वादा किया गया स्मारक उन 41 लोगों की याद दिलाता है, जो सुबह घर से निकले थे और शाम को वापस नहीं लौटे। उनके परिवार आज भी उस रात की यादों के साथ जी रहे हैं। इस त्रासदी ने भविष्य में बड़ी राजनीतिक रैलियों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की माँग को और भी तीव्र कर दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर हादसे के बाद सुधार की माँग उठती है, फिर धीरे-धीरे दब जाती है। CBI जाँच और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी समिति के बावजूद, एक साल में ठोस जवाबदेही का अभाव चिंताजनक है। विजय का मुख्यमंत्री बनना और पीड़ितों को सरकारी नौकरियाँ देना एक सहानुभूति का संकेत है, लेकिन यह उस मूल सवाल का जवाब नहीं है कि इतनी बड़ी रैली में सुरक्षा इंतज़ाम क्यों नाकाफ़ी थे। स्मारक बनाम न्याय — यह फ़र्क करूर के पीड़ित परिवार बखूबी समझते हैं।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करूर भगदड़ कब और कहाँ हुई थी?
करूर भगदड़ 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर जिले के वेलुसामीपुरम में हुई थी। यह टीवीके प्रमुख विजय की रैली के दौरान तब हुई जब भीड़ उनकी प्रचार गाड़ी की ओर उमड़ पड़ी और लोग एक-दूसरे के नीचे दब गए।
करूर भगदड़ में कितने लोगों की मौत हुई थी?
इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।
करूर भगदड़ की जाँच किसे सौंपी गई है?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस घटना की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपी है और निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की है। जाँच अभी जारी है।
मुख्यमंत्री विजय ने पीड़ित परिवारों के लिए क्या किया?
मुख्यमंत्री विजय ने 10 जुलाई 2026 को करूर का दौरा किया और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कुछ परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे और मृतकों की स्मृति में एक स्मारक बनाने की घोषणा की।
करूर भगदड़ से क्या सबक लिया जाना चाहिए?
इस त्रासदी ने बड़ी राजनीतिक रैलियों में भीड़ नियंत्रण, कार्यक्रम स्थल के चयन और सुरक्षा इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक आयोजनों के लिए अनिवार्य भीड़ प्रबंधन मानक और कड़ी जवाबदेही तंत्र की ज़रूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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