करूर भगदड़ की पहली बरसी: विजय की रैली में 41 मौतें, एक साल बाद भी घाव ताज़े
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर 2025 को हुई भगदड़ की पहली बरसी पर पीड़ित परिवार और बचे हुए लोग उस रात के दर्द को एक बार फिर महसूस कर रहे हैं, जब तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की रैली में 41 लोगों की जान चली गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। यह त्रासदी करूर के इतिहास में एक ऐसे दिन के रूप में दर्ज हो गई है जिसे शहर कभी नहीं भूल सकता।
वह काली रात — घटनाक्रम
27 सितंबर 2025 की सुबह से ही वेलुसामीपुरम में टीवीके समर्थक जमा होने लगे थे। हज़ारों की भीड़ — जिसमें परिवार, महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे — अभिनेता से नेता बने विजय की एक झलक पाने के लिए उत्साहित थी। पार्टी के गाने बज रहे थे और माहौल उत्सव जैसा था। जब विजय उस शाम अपनी प्रचार गाड़ी में उस इलाके में पहुँचे, तो उत्साहित समर्थक उनकी ओर उमड़ पड़े।
देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। कुछ लोग संतुलन खो बैठे और गिरकर दूसरों के नीचे दब गए। आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर लोगों को भीड़ से बाहर निकाला और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक राजनीतिक सभा के रूप में शुरू हुआ यह कार्यक्रम 41 मौतों के साथ समाप्त हुआ, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
जाँच और जवाबदेही
इस त्रासदी ने कई गंभीर सवाल खड़े किए — कार्यक्रम स्थल का चयन, भीड़ नियंत्रण के इंतज़ाम, सुरक्षा व्यवस्था की खामियाँ और ज़िम्मेदारी का निर्धारण। सर्वोच्च न्यायालय ने घटना की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपी और निगरानी के लिए एक समिति गठित की। जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखे मतभेद रहे और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लंबे समय तक चला।
गौरतलब है कि इस तरह की राजनीतिक रैलियों में भीड़ प्रबंधन की विफलताएँ यह पहली बार नहीं थीं, लेकिन इस घटना की भीषणता ने पूरे देश को झकझोर दिया।
पीड़ित परिवारों की स्थिति
तत्कालीन राज्य सरकार और टीवीके ने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया। हालाँकि, आर्थिक मदद उस दर्द की भरपाई नहीं कर सकती जो उन परिवारों को हुआ है जिन्होंने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया। पीड़ित परिवारों के अनुसार, इस बरसी पर वेलुसामीपुरम में उस रात के इंतज़ार, भगदड़ के बाद की अफरातफरी और अस्पतालों से मिली दुखद खबरों की यादें एक बार फिर ताज़ी हो जाती हैं।
मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा
विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 10 जुलाई 2026 को करूर का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कुछ परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे और यह घोषणा की कि करूर शहर में मृतकों की स्मृति में एक स्मारक बनाया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब CBI की जाँच अभी भी जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा में हैं।
बरसी पर करूर का दर्द
पहली बरसी के अवसर पर करूर में वादा किया गया स्मारक उन 41 लोगों की याद दिलाता है, जो सुबह घर से निकले थे और शाम को वापस नहीं लौटे। उनके परिवार आज भी उस रात की यादों के साथ जी रहे हैं। इस त्रासदी ने भविष्य में बड़ी राजनीतिक रैलियों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की माँग को और भी तीव्र कर दिया है।