काशीपुर में NDPS और POCSO कोर्ट स्थापित, उत्तराखंड सरकार की मंजूरी से अधिवक्ताओं की वर्षों पुरानी मांग पूरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड सरकार ने ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में एनडीपीएस (NDPS) और पॉक्सो (POCSO) कोर्ट स्थापित करने की मंजूरी दे दी है, जिससे स्थानीय अधिवक्ताओं की वर्षों से चली आ रही मांग 17 जून 2025 को पूरी हुई। पॉक्सो कोर्ट के लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी हो चुकी है। इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा होते ही न्यायालय परिसर के बाहर अधिवक्ताओं ने मिठाई बाँटी और आतिशबाजी कर जश्न मनाया।
मुख्य घटनाक्रम
काशीपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरजेश खुलबे ने बताया कि एनडीपीएस और पॉक्सो कोर्ट खोले जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। उन्होंने कहा, 'सरकार और उच्च न्यायालय ने हमारी इस मांग को सुन लिया है; यहाँ पॉक्सो कोर्ट के लिए नोटिफिकेशन जारी हो गया है।' इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे और एक-दूसरे को बधाई दी।
खुलबे ने इस उपलब्धि का श्रेय पूर्व बार कार्यकारिणी के निरंतर संघर्ष को भी दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी कार्यकारिणी ने इस मांग को लेकर लगातार प्रयास किए, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।
पहले क्या थी स्थिति
इससे पहले एनडीपीएस और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई रुद्रपुर में होती थी। इसके कारण काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों के अधिवक्ताओं और वादकारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। यह स्थिति विशेष रूप से उन पीड़ितों के लिए कठिन थी जो पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में न्याय के लिए दूसरे शहर जाने को मजबूर थे।
आम जनता पर असर
नए न्यायालयों की स्थापना से न केवल अधिवक्ताओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि शिकायतकर्ताओं — विशेषकर नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़ितों और नशे से जुड़े मामलों के वादकारियों — को न्यायिक प्रक्रिया के लिए अन्य स्थानों पर नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय, संसाधन और मानसिक तनाव तीनों में राहत मिलेगी।
काशीपुर की पृष्ठभूमि
काशीपुर उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले का एक महत्वपूर्ण पौराणिक एवं औद्योगिक शहर है। प्राचीन काल में इस नगर का नाम उज्जैनी था और यहाँ से बहने वाली ढेला नदी को सुवर्णभद्रा कहा जाता था। हर्ष काल में इसे गोविषाण के नाम से जाना जाता था। बाद में काशीनाथ अधिकारी ने तराई क्षेत्र के अधिकारी का महल रुद्रपुर से यहाँ स्थानांतरित किया, जिसके बाद उन्हीं के नाम पर इस शहर को काशीपुर कहा जाने लगा।
क्या होगा आगे
अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी न्यायिक सुविधाओं का विस्तार कर काशीपुर को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। यह निर्णय उत्तराखंड में विकेंद्रीकृत न्यायिक ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।