2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

काशीपुर में NDPS और POCSO कोर्ट स्थापित, उत्तराखंड सरकार की मंजूरी से अधिवक्ताओं की वर्षों पुरानी मांग पूरी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
काशीपुर में NDPS और POCSO कोर्ट स्थापित, उत्तराखंड सरकार की मंजूरी से अधिवक्ताओं की वर्षों पुरानी मांग पूरी

सारांश

उत्तराखंड सरकार ने काशीपुर में NDPS और POCSO कोर्ट को मंजूरी दे दी है — वर्षों की कानूनी लड़ाई का नतीजा। अब पीड़ितों और अधिवक्ताओं को न्याय के लिए रुद्रपुर नहीं जाना पड़ेगा। पॉक्सो कोर्ट का नोटिफिकेशन जारी, अधिवक्ताओं ने मिठाई और आतिशबाजी से जश्न मनाया।

मुख्य बातें

उत्तराखंड सरकार ने काशीपुर में NDPS और POCSO कोर्ट स्थापित करने की मंजूरी 17 जून 2025 को दी।
पॉक्सो कोर्ट के लिए आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी हो चुकी है।
इससे पहले NDPS और POCSO मामलों की सुनवाई रुद्रपुर में होती थी, जिससे वादकारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।
काशीपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरजेश खुलबे ने इसे काशीपुर की न्यायिक व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
उपलब्धि का श्रेय पूर्व बार कार्यकारिणी के निरंतर प्रयासों को भी दिया गया।

उत्तराखंड सरकार ने ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में एनडीपीएस (NDPS) और पॉक्सो (POCSO) कोर्ट स्थापित करने की मंजूरी दे दी है, जिससे स्थानीय अधिवक्ताओं की वर्षों से चली आ रही मांग 17 जून 2025 को पूरी हुई। पॉक्सो कोर्ट के लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी हो चुकी है। इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा होते ही न्यायालय परिसर के बाहर अधिवक्ताओं ने मिठाई बाँटी और आतिशबाजी कर जश्न मनाया।

मुख्य घटनाक्रम

काशीपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरजेश खुलबे ने बताया कि एनडीपीएस और पॉक्सो कोर्ट खोले जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। उन्होंने कहा, 'सरकार और उच्च न्यायालय ने हमारी इस मांग को सुन लिया है; यहाँ पॉक्सो कोर्ट के लिए नोटिफिकेशन जारी हो गया है।' इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे और एक-दूसरे को बधाई दी।

खुलबे ने इस उपलब्धि का श्रेय पूर्व बार कार्यकारिणी के निरंतर संघर्ष को भी दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी कार्यकारिणी ने इस मांग को लेकर लगातार प्रयास किए, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।

पहले क्या थी स्थिति

इससे पहले एनडीपीएस और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई रुद्रपुर में होती थी। इसके कारण काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों के अधिवक्ताओं और वादकारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। यह स्थिति विशेष रूप से उन पीड़ितों के लिए कठिन थी जो पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में न्याय के लिए दूसरे शहर जाने को मजबूर थे।

आम जनता पर असर

नए न्यायालयों की स्थापना से न केवल अधिवक्ताओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि शिकायतकर्ताओं — विशेषकर नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़ितों और नशे से जुड़े मामलों के वादकारियों — को न्यायिक प्रक्रिया के लिए अन्य स्थानों पर नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय, संसाधन और मानसिक तनाव तीनों में राहत मिलेगी।

काशीपुर की पृष्ठभूमि

काशीपुर उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले का एक महत्वपूर्ण पौराणिक एवं औद्योगिक शहर है। प्राचीन काल में इस नगर का नाम उज्जैनी था और यहाँ से बहने वाली ढेला नदी को सुवर्णभद्रा कहा जाता था। हर्ष काल में इसे गोविषाण के नाम से जाना जाता था। बाद में काशीनाथ अधिकारी ने तराई क्षेत्र के अधिकारी का महल रुद्रपुर से यहाँ स्थानांतरित किया, जिसके बाद उन्हीं के नाम पर इस शहर को काशीपुर कहा जाने लगा।

क्या होगा आगे

अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी न्यायिक सुविधाओं का विस्तार कर काशीपुर को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। यह निर्णय उत्तराखंड में विकेंद्रीकृत न्यायिक ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्टाफ और बुनियादी ढाँचा कितनी जल्दी सुनिश्चित होता है — घोषणा से जमीनी बदलाव तक की दूरी अक्सर सबसे लंबी होती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशीपुर में NDPS और POCSO कोर्ट क्या हैं और ये क्यों जरूरी थे?
NDPS कोर्ट नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है, जबकि POCSO कोर्ट नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के मामले देखती है। काशीपुर में ये अदालतें न होने से स्थानीय वादकारियों को रुद्रपुर जाना पड़ता था, जिससे न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और खर्च होता था।
उत्तराखंड सरकार ने काशीपुर POCSO कोर्ट के लिए नोटिफिकेशन कब जारी किया?
17 जून 2025 को उत्तराखंड सरकार ने काशीपुर में POCSO कोर्ट के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की। NDPS कोर्ट की स्थापना को भी इसी के साथ मंजूरी दी गई।
इस फैसले से काशीपुर के आम लोगों को क्या फायदा होगा?
अब NDPS और POCSO मामलों के वादकारियों को सुनवाई के लिए रुद्रपुर नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय, यात्रा खर्च और मानसिक तनाव में कमी आएगी, विशेषकर पॉक्सो पीड़ितों के लिए जो पहले से ही कठिन परिस्थितियों में होते हैं।
काशीपुर बार एसोसिएशन ने इस मांग को लेकर कब से संघर्ष किया था?
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरजेश खुलबे के अनुसार, यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी और पूर्व बार कार्यकारिणी ने इसके लिए लगातार प्रयास किए। हालाँकि संघर्ष की सटीक शुरुआत की तारीख सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है।
काशीपुर शहर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
काशीपुर उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले का एक प्रमुख पौराणिक और औद्योगिक शहर है। प्राचीन काल में इसे उज्जैनी और हर्ष काल में गोविषाण कहा जाता था। काशीनाथ अधिकारी के नाम पर इसे काशीपुर नाम मिला।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले