काठमांडू में 2 मई को भारत-नेपाल कोसी-गंडक संयुक्त समिति की 11वीं बैठक, बाढ़ व सिंचाई पर होगा मंथन
सारांश
Key Takeaways
- 2 मई 2025 को काठमांडू में जेसीकेजीपी की 11वीं बैठक आयोजित होगी।
- कोसी बैराज के तटबंध कटाव, गेट संचालन और कोसी टप्पू वन्यजीव क्षेत्र से जुड़े मुद्दे एजेंडे में हैं।
- गंडक परियोजना में जलजमाव, सिल्ट नियंत्रण और कटाव निरोधक कार्यों पर विचार होगा।
- मानसून के लिए फ्लड फोरकास्टिंग मॉडल हेतु नेपाल से API के ज़रिए वर्षा-जलस्तर डेटा साझा करने पर चर्चा।
- प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, जल शक्ति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि बैठक में शामिल होंगे।
बिहार सरकार की पहल पर 2 मई 2025 को काठमांडू में भारत-नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति (जेसीकेजीपी) की 11वीं बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कोसी और गंडक परियोजनाओं से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों, बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था तथा परियोजनाओं के प्रभावी संचालन पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। जल संसाधन विभाग, बिहार के अनुसार, मानसून से पहले यह बैठक दोनों देशों के बीच नदी प्रबंधन समन्वय को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बैठक का उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
जल संसाधन विभाग के अनुसार, भारत-नेपाल से होकर बहने वाली नदियों में मानसून के दौरान संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए यह बैठक बुलाई गई है। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि कोसी और गंडक नदियाँ प्रतिवर्ष बिहार में व्यापक बाढ़ तबाही का कारण बनती हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं।
कोसी परियोजना से जुड़े प्रमुख मुद्दे
कोसी परियोजना के अंतर्गत परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा, अवसंरचना के रख-रखाव, निर्माण सामग्री पर स्थानीय कर, कोसी बैराज के दोनों ओर तटबंधों के कटाव, पश्चिमी मुख्य नहर के गेट संचालन, नेपाल क्षेत्र में सेवा पथ रख-रखाव, अतिक्रमण हटाने, परियोजना कर्मियों की सुरक्षा तथा कोसी टप्पू वन्यजीव क्षेत्र से संबंधित समस्याओं पर विचार होगा। ये मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और इनके समाधान से दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
गंडक परियोजना के अहम विषय
गंडक परियोजना से जुड़े एजेंडे में अधिग्रहित भूमि पर कब्जे, जल निकासी अवरोध से कृषि भूमि में जलजमाव, नहरों में निर्धारित जलस्तर एवं डिस्चार्ज बनाए रखने, बाढ़ सुरक्षा एवं कटाव निरोधक कार्य, सेवा पथों के अनुरक्षण तथा सिल्टयुक्त जल प्रवाह नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मामले शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन मुद्दों का समाधान न होने से हर साल हज़ारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलजमाव की चपेट में आती है।
फ्लड फोरकास्टिंग और डेटा साझेदारी
बैठक में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी विषय पर भी चर्चा होगी — मानसून के दौरान बिहार द्वारा संचालित फ्लड फोरकास्टिंग मॉडल के लिए नेपाल क्षेत्र के वर्षा और जलस्तर संबंधी आँकड़ों को API के माध्यम से साझा करना। यह ऐसे समय में आया है जब बाढ़ पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने की माँग लगातार उठती रही है। रियल-टाइम डेटा साझेदारी से आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
बैठक में शामिल होंगे ये प्रतिनिधि
बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के निर्देश पर जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल सहित अभियंता प्रमुख और कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में भाग लेंगे। भारत सरकार की ओर से जल शक्ति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। विभाग ने कहा कि इस बैठक से लंबित मुद्दों के समाधान और भविष्य की कार्ययोजना तय होने की संभावना है। बिहार सरकार सीमावर्ती नदियों के समुचित प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और भारत-नेपाल समन्वय को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।