कटनी सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर आपराधिक मामला दर्ज, हत्या जांच में लापरवाही और रिश्वत के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के कटनी में तैनात सर्कल स्तरीय पुलिस अधिकारी (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया के खिलाफ 21 अगस्त 2026 को कुठला थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है, जिसमें पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज और मारूफ अहमद को भी आरोपी बनाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत तीनों आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, सीएसपी पच्चीसिया के खिलाफ विभिन्न शिकायतें प्राप्त होने के बाद जबलपुर रेंज स्तर पर जांच कराई गई थी।
जबलपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) प्रमोद कुमार वर्मा ने यह जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) अनु बेनीवाल को सौंपी थी। जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ताओं सहित संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए और अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित की। इसी रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर अब आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है।
आरोपों की प्रकृति
आरोपों के अनुसार, कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज एक हत्या के मामले में निर्धारित समय-सीमा के भीतर न्यायालय में चालान प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके चलते आरोपी को जमानत मिल गई। शिकायत में यह भी कथित तौर पर आरोप लगाया गया है कि इसके बाद आरोपी पक्ष पर दबाव बनाकर उनकी ज़मीन कम कीमत पर हासिल की गई।
इसके अतिरिक्त एक ट्रांसपोर्टर ने भी सीएसपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में आरोप है कि एक हाइवा वाहन को छोड़ने के एवज में ₹30,000 की रिश्वत मांगी अथवा ली गई।
विभागीय कार्रवाई का इतिहास
शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने चरणबद्ध तरीके से विभागीय कार्रवाई की थी। पहले दो और फिर तीन थानों का प्रभार सीएसपी पच्चीसिया से वापस ले लिया गया। इसके साथ ही उनके सरकारी वाहन चालक केशव सिंह को भी निलंबित कर दिया गया था।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पुलिस विभाग में जवाबदेही को लेकर मध्य प्रदेश में बहस तेज है। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि आरोप एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ हैं।
उच्च न्यायालय में याचिका और खारिजी
थानों का प्रभार वापस लिए जाने और सरकारी चालक के निलंबन को चुनौती देते हुए नेहा पच्चीसिया ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने इसे पुलिस विभाग के आंतरिक प्रशासन एवं कार्य-विभाजन से जुड़ा विषय मानते हुए विभागीय निर्णय में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।
आगे की राह
फिलहाल कुठला थाना पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। तीनों आरोपियों के विरुद्ध BNS की संबंधित धाराओं के तहत जांच जारी है। इस प्रकरण का अगला घटनाक्रम न्यायालय में चालान प्रस्तुति पर निर्भर करेगा।