केरल के 'कचरा मुक्त मिशन' में दरार: दो IAS अधिकारियों की खींचतान से दो समानांतर अभियान
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार के महत्वाकांक्षी 'कचरा मुक्त केरल' अभियान पर स्थानीय स्वशासन विभाग की दो वरिष्ठ महिला IAS अधिकारियों के बीच कथित वर्चस्व की लड़ाई का असर पड़ता दिख रहा है। 7 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, एक ही उद्देश्य के लिए विभाग में दो अलग-अलग कार्यक्रम एक साथ चलाए जा रहे हैं, जिससे तिरुवनंतपुरम स्थित शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर समन्वय को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
दो कार्यक्रम, एक ही मकसद
विभाग में एक साथ चल रहे दो अभियान — 'निर्मलम' और 'आईसी 100 चैलेंज' — दोनों का लक्ष्य राज्य को कचरा मुक्त बनाना है। 'निर्मलम' अभियान विभाग की सचिव टी.वी. अनुपमा के नेतृत्व में सरकार की 100 दिवसीय कार्ययोजना के अंतर्गत शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य राज्यव्यापी स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाना है।
वहीं, 'आईसी 100 चैलेंज' के तहत कचरा जमा होने वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान कर उन्हें साफ कराया जाता है और लगातार 100 दिनों तक उन स्थानों को कचरा मुक्त बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह दूसरा कार्यक्रम विभाग की प्रधान निदेशक डॉ. दिव्या एस. अय्यर की पहल माना जा रहा है।
मतभेद की पृष्ठभूमि
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने स्थानीय स्वशासन मंत्री से शिकायत की थी कि 'निर्मलम' कार्यक्रम में उन्हें पर्याप्त महत्व या प्रभावी भूमिका नहीं दी जा रही है। उन्होंने कथित तौर पर यह भी जताया कि विभाग के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनसे पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया जा रहा।
रिपोर्टों के अनुसार, 'आईसी 100 चैलेंज' की शुरुआत को इन्हीं चिंताओं को दूर करने और अय्यर को कचरा प्रबंधन अभियान में एक अलग, स्वतंत्र भूमिका देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इसके बाद एक नया विवाद सामने आया — बताया जा रहा है कि इस नई पहल से विभाग की सचिव अनुपमा को अलग रखा गया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और जटिलताएँ
डॉ. दिव्या एस. अय्यर का सार्वजनिक प्रोफाइल एक राजनीतिक सन्दर्भ से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने वर्ष 2017 में कांग्रेस के पूर्व विधायक और वर्तमान तिरुवनंतपुरम नगर निगम पार्षद के.एस. सबरीनाथन से विवाह किया था। सबरीनाथन अरुविक्कारा विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और दिवंगत कांग्रेस नेता तथा केरल विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष जी. कार्तिकेयन के पुत्र हैं।
गौरतलब है कि विवाह के समय सबरीनाथन विधायक थे, जबकि अय्यर सब-कलेक्टर के पद पर तैनात थीं। यह पृष्ठभूमि वर्तमान प्रशासनिक विवाद में एक अतिरिक्त राजनीतिक आयाम जोड़ती है।
प्रशासनिक असर और चिंताएँ
यह असामान्य स्थिति — जहाँ एक ही विभाग में समान उद्देश्य के लिए दो वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग अभियान चला रहे हों — स्थानीय निकायों के साथ समन्वय, प्रशासनिक संसाधनों के कुशल उपयोग और जमीनी स्तर पर कचरा प्रबंधन की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है। प्रशासनिक हलकों में इस द्विधा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय स्वशासन विभाग स्वयं केरल में कचरा प्रबंधन की चुनौती की गंभीरता और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को स्वीकार करता रहा है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित मतभेदों की खबरें इस महत्वाकांक्षी अभियान के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं।
आगे क्या होगा
बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद दूर करने और उनकी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केरल सरकार ने राज्य को 'जीरो वेस्ट' बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और इसकी सफलता के लिए प्रशासनिक स्तर पर बेहतर तालमेल को अपरिहार्य माना जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस प्रशासनिक असामंजस्य को दूर करने में कितनी तत्परता दिखाती है।