7 अक्टूबर 2026
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केरल के 'कचरा मुक्त मिशन' में दरार: दो IAS अधिकारियों की खींचतान से दो समानांतर अभियान

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केरल के 'कचरा मुक्त मिशन' में दरार: दो IAS अधिकारियों की खींचतान से दो समानांतर अभियान

सारांश

केरल का 'जीरो वेस्ट' सपना अपने ही विभाग में उलझ गया है। स्थानीय स्वशासन विभाग में दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के कथित मतभेद ने एक ही उद्देश्य के लिए दो समानांतर अभियान खड़े कर दिए हैं — यह प्रशासनिक विखंडन उस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है जिसे केरल सरकार ने अपनी प्राथमिकता बताया है।

मुख्य बातें

केरल के स्थानीय स्वशासन विभाग में टी.वी.
अनुपमा (सचिव) और डॉ.
अय्यर (प्रधान निदेशक) के बीच कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई है।
एक ही उद्देश्य — राज्य को कचरा मुक्त बनाना — के लिए 'निर्मलम' और 'आईसी 100 चैलेंज' नाम के दो अलग अभियान एक साथ चल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अय्यर ने मंत्री से शिकायत की थी कि 'निर्मलम' में उन्हें प्रभावी भूमिका नहीं दी जा रही।
रिपोर्टों के मुताबिक, 'आईसी 100 चैलेंज' की शुरुआत से सचिव अनुपमा को अलग रखा गया है।
अय्यर ने 2017 में कांग्रेस पूर्व विधायक के.एस.
सबरीनाथन से विवाह किया था, जो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जी.
कार्तिकेयन के पुत्र हैं।
दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद दूर कर जिम्मेदारियाँ स्पष्ट करने के प्रयास जारी बताए जा रहे हैं।

केरल सरकार के महत्वाकांक्षी 'कचरा मुक्त केरल' अभियान पर स्थानीय स्वशासन विभाग की दो वरिष्ठ महिला IAS अधिकारियों के बीच कथित वर्चस्व की लड़ाई का असर पड़ता दिख रहा है। 7 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, एक ही उद्देश्य के लिए विभाग में दो अलग-अलग कार्यक्रम एक साथ चलाए जा रहे हैं, जिससे तिरुवनंतपुरम स्थित शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर समन्वय को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

दो कार्यक्रम, एक ही मकसद

विभाग में एक साथ चल रहे दो अभियान — 'निर्मलम' और 'आईसी 100 चैलेंज' — दोनों का लक्ष्य राज्य को कचरा मुक्त बनाना है। 'निर्मलम' अभियान विभाग की सचिव टी.वी. अनुपमा के नेतृत्व में सरकार की 100 दिवसीय कार्ययोजना के अंतर्गत शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य राज्यव्यापी स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाना है।

वहीं, 'आईसी 100 चैलेंज' के तहत कचरा जमा होने वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान कर उन्हें साफ कराया जाता है और लगातार 100 दिनों तक उन स्थानों को कचरा मुक्त बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह दूसरा कार्यक्रम विभाग की प्रधान निदेशक डॉ. दिव्या एस. अय्यर की पहल माना जा रहा है।

मतभेद की पृष्ठभूमि

सूत्रों के मुताबिक, डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने स्थानीय स्वशासन मंत्री से शिकायत की थी कि 'निर्मलम' कार्यक्रम में उन्हें पर्याप्त महत्व या प्रभावी भूमिका नहीं दी जा रही है। उन्होंने कथित तौर पर यह भी जताया कि विभाग के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनसे पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया जा रहा।

रिपोर्टों के अनुसार, 'आईसी 100 चैलेंज' की शुरुआत को इन्हीं चिंताओं को दूर करने और अय्यर को कचरा प्रबंधन अभियान में एक अलग, स्वतंत्र भूमिका देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इसके बाद एक नया विवाद सामने आया — बताया जा रहा है कि इस नई पहल से विभाग की सचिव अनुपमा को अलग रखा गया है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और जटिलताएँ

डॉ. दिव्या एस. अय्यर का सार्वजनिक प्रोफाइल एक राजनीतिक सन्दर्भ से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने वर्ष 2017 में कांग्रेस के पूर्व विधायक और वर्तमान तिरुवनंतपुरम नगर निगम पार्षद के.एस. सबरीनाथन से विवाह किया था। सबरीनाथन अरुविक्कारा विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और दिवंगत कांग्रेस नेता तथा केरल विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष जी. कार्तिकेयन के पुत्र हैं।

गौरतलब है कि विवाह के समय सबरीनाथन विधायक थे, जबकि अय्यर सब-कलेक्टर के पद पर तैनात थीं। यह पृष्ठभूमि वर्तमान प्रशासनिक विवाद में एक अतिरिक्त राजनीतिक आयाम जोड़ती है।

प्रशासनिक असर और चिंताएँ

यह असामान्य स्थिति — जहाँ एक ही विभाग में समान उद्देश्य के लिए दो वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग अभियान चला रहे हों — स्थानीय निकायों के साथ समन्वय, प्रशासनिक संसाधनों के कुशल उपयोग और जमीनी स्तर पर कचरा प्रबंधन की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है। प्रशासनिक हलकों में इस द्विधा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

स्थानीय स्वशासन विभाग स्वयं केरल में कचरा प्रबंधन की चुनौती की गंभीरता और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को स्वीकार करता रहा है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित मतभेदों की खबरें इस महत्वाकांक्षी अभियान के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं।

आगे क्या होगा

बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद दूर करने और उनकी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केरल सरकार ने राज्य को 'जीरो वेस्ट' बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और इसकी सफलता के लिए प्रशासनिक स्तर पर बेहतर तालमेल को अपरिहार्य माना जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस प्रशासनिक असामंजस्य को दूर करने में कितनी तत्परता दिखाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक ही विभाग में दो समानांतर कार्यक्रम चलाना यह संकेत देता है कि प्रशासनिक ढाँचे में नेतृत्व-स्पष्टता की बुनियादी कमी है। यह पहली बार नहीं है जब किसी सुशासन अभियान की ऊर्जा आंतरिक वर्चस्व की लड़ाई में खर्च हो गई हो — और हर बार खामियाजा जमीनी स्तर पर भुगतना पड़ता है। अय्यर का राजनीतिक पारिवारिक संबंध विवाद में एक संवेदनशील आयाम जोड़ता है, जिसे नज़रअंदाज करना मुश्किल है। सरकार के लिए असली परीक्षा यह है कि क्या वह संसाधनों और अधिकारों का पुनर्विभाजन पारदर्शी तरीके से कर सकती है — बिना राजनीतिक दबाव में आए।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल के 'कचरा मुक्त मिशन' में विवाद क्या है?
केरल के स्थानीय स्वशासन विभाग में दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों — सचिव टी.वी. अनुपमा और प्रधान निदेशक डॉ. दिव्या एस. अय्यर — के बीच कथित मतभेदों के चलते राज्य के 'कचरा मुक्त केरल' अभियान के लिए दो अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इससे प्रशासनिक समन्वय और संसाधनों के कुशल उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।
'निर्मलम' और 'आईसी 100 चैलेंज' में क्या अंतर है?
'निर्मलम' अभियान सचिव टी.वी. अनुपमा के नेतृत्व में सरकार की 100 दिवसीय कार्ययोजना के तहत राज्यव्यापी स्वच्छता के लिए शुरू किया गया था। वहीं, 'आईसी 100 चैलेंज' कचरा जमा होने वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान कर उन्हें लगातार 100 दिनों तक कचरा मुक्त रखने पर केंद्रित है — दोनों का अंतिम लक्ष्य एक ही है।
डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने क्या शिकायत की थी?
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने स्थानीय स्वशासन मंत्री से शिकायत की थी कि 'निर्मलम' कार्यक्रम में उन्हें पर्याप्त महत्व या प्रभावी भूमिका नहीं दी जा रही। उन्होंने कथित तौर पर यह भी जताया कि विभाग के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनसे पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं हो रहा।
डॉ. दिव्या एस. अय्यर का राजनीतिक संबंध क्या है?
डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने 2017 में कांग्रेस के पूर्व विधायक और तिरुवनंतपुरम नगर निगम पार्षद के.एस. सबरीनाथन से विवाह किया था। सबरीनाथन अरुविक्कारा विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और दिवंगत कांग्रेस नेता तथा केरल विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष जी. कार्तिकेयन के पुत्र हैं।
इस प्रशासनिक विवाद का 'कचरा मुक्त केरल' अभियान पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों और प्रशासनिक हलकों की चिंता है कि वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित मतभेदों से स्थानीय निकायों के साथ समन्वय बाधित हो सकता है और जमीनी स्तर पर अभियान की प्रभावशीलता कमजोर पड़ सकती है। केरल सरकार के 'जीरो वेस्ट' लक्ष्य के लिए एकजुट प्रशासनिक नेतृत्व को अनिवार्य माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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