खड़गे के बयान पर सपा-कांग्रेस का बचाव: 'भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने 26 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विवादित बयान का खुलकर बचाव किया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया कि वह इस विवाद को हवा देकर देश की वास्तविक समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी खड़गे के बयान का समर्थन करते हुए भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
सपा प्रवक्ता का बचाव
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने स्पष्ट किया कि खड़गे के बयान को जानबूझकर संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खड़गे का असली आशय उन तत्वों के खिलाफ कार्रवाई से था, जो संविधान को कमज़ोर करने या समाप्त करने की कोशिश करते हैं। वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक नारों को तोड़-मरोड़ कर हथियार बना लेती है, जो लोकतांत्रिक परंपरा के विरुद्ध है।
वर्मा ने भाजपा से तीखे सवाल किए — क्या उसने कभी संविधान को कमज़ोर करने की कोशिश नहीं की? क्या संसद में कई विधेयक 'वॉयस वोट' यानी मौखिक मतदान के जरिए पारित नहीं कराए गए? उन्होंने कहा कि इन सवालों का तथ्य-आधारित जवाब भाजपा के पास नहीं है, इसीलिए वह अनावश्यक बयानबाजी में उलझ रही है।
पप्पू यादव का बयान
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा कि भाजपा के नेता सोनिया गांधी और राजीव गांधी समेत कांग्रेस के अन्य नेताओं पर टिप्पणी करते हैं, तब कोई आपत्ति नहीं होती। यादव ने सवाल उठाया कि क्या देश में केवल भाजपा और आरएसएस को ही आलोचना से परे रखने का अधिकार मिला हुआ है? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खड़गे ने एक मुहावरे का प्रयोग किया था, जिसे भाजपा के नेता गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।
यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी देश के नागरिक हैं और जब अमेरिका कोई आपत्ति जताता है तो सरकार के पास उत्तर नहीं होता — ऐसे में आंतरिक आलोचना पर इतनी संवेदनशीलता उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में सभी नागरिकों के माता-पिता और परिवार का सम्मान होना चाहिए।
कश्मीर और फारूक अब्दुल्ला के बयान पर प्रतिक्रिया
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के जम्मू-कश्मीर संबंधी बयान पर पप्पू यादव ने कहा कि कश्मीर को मुद्दा बनाना भाजपा और आरएसएस की रणनीति रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कश्मीर भारत की संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न अंग है। यादव के अनुसार, कश्मीर के भारत के साथ होने में वहाँ के उन लोगों की सबसे बड़ी भूमिका है जो संविधान का सम्मान करते हैं और भारतीय परंपराओं में विश्वास रखते हैं।
ओवैसी को सपा का करारा जवाब
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रवक्ता वर्मा ने कहा कि ओवैसी को उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों का पहले गहराई से अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ओवैसी वर्ष 2017 के परिदृश्य की बात कर रहे हैं, जबकि सपा वर्तमान राजनीतिक हकीकत की बात करती है। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी में इस समय 32 मुस्लिम विधायक और 4 मुस्लिम सांसद हैं, और पार्टी संगठन एवं विधायी निकायों में मुस्लिम नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।
वर्मा ने ओवैसी को चुनौती देते हुए सवाल किया कि वह उत्तर प्रदेश में अपना पहला उम्मीदवार किस सीट पर उतारेंगे। उन्होंने मटेरा और शीशमहल जैसी सीटों का उल्लेख करते हुए ओवैसी की चुनावी रणनीति की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में भी नए समीकरण बन रहे हैं और विपक्षी एकता की परीक्षा हो रही है। गौरतलब है कि खड़गे के बयान पर उपजे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि विपक्षी दल आपस में कितने समन्वित हैं और AIMIM जैसे दलों की भूमिका इस गठजोड़ में क्या है। आने वाले दिनों में इन बयानों का असर उत्तर प्रदेश और बिहार की चुनावी सियासत पर पड़ सकता है।