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एशियन गेम्स 2026 गोल्ड: कीर्ति शर्मा बोलीं — 'मेरे पिता ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया'

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एशियन गेम्स 2026 गोल्ड: कीर्ति शर्मा बोलीं — 'मेरे पिता ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया'

सारांश

हरियाणा के छोटे-से गाँव रिटौली से निकलीं 19 वर्षीय कीर्ति शर्मा ने एशियन गेम्स 2026 में भारत को महिला रिकर्व तीरंदाजी का स्वर्ण दिलाया — और दक्षिण कोरिया का 44 साल पुराना दबदबा तोड़ा। यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, एक किसान पिता के अटूट विश्वास और एक बीमार बच्ची की ज़िद की कहानी है।

मुख्य बातें

कीर्ति शर्मा , अंकिता भगत और कुमकुम मोहोद की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता।
भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को हराकर उनका 44 साल पुराना एकाधिकार समाप्त किया।
19 वर्षीय कीर्ति शर्मा हरियाणा के रिटौली गाँव से हैं और बचपन से शारीरिक कमज़ोरी से जूझती रहीं।
कीर्ति ने अपनी सफलता का श्रेय किसान पिता विजय शर्मा और कोच उद्धम सिंह को दिया।
SAI हजारीबाग केंद्र में चार साल की ट्रेनिंग ने कीर्ति के करियर को निर्णायक दिशा दी।

भारत की 19 वर्षीय तीरंदाज कीर्ति शर्मा ने एशियन गेम्स 2026 में महिला रिकर्व टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने के बाद अपनी उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने पिता विजय शर्मा और कोच उद्धम सिंह को दिया। हरियाणा के साधारण गाँव रिटौली से निकलकर एशिया के शीर्ष मंच तक का उनका सफर संघर्ष, आलोचना और अदम्य जिद की मिसाल है।

रिटौली से नागोया तक का संघर्षपूर्ण सफर

कीर्ति शर्मा का बचपन शारीरिक कमज़ोरी और सामाजिक संशय के साये में गुज़रा। उन्होंने बताया, 'बचपन से ही मेरी सेहत खराब थी। मुझे अलग-अलग जगहों से बहुत सारी नकारात्मक टिप्पणियाँ सुनने को मिलती थीं, जिनमें आर्चरी में मेरी काबिलियत पर शक जताया जाता था। इसकी वजह मेरी शारीरिक स्थिति अच्छी न होना था। शुरू में मुझे भारी वजन वाले धनुष उठाने में भी मुश्किल होती थी। लेकिन मैंने ठान लिया था कि मैं अपने आलोचकों को गलत साबित करने के लिए कुछ भी करूँगी।' यह ऐसे समय की बात है जब भारतीय ग्रामीण परिवेश में लड़कियों के खेल करियर को लेकर गहरी सामाजिक बाधाएँ रही हैं।

पिता विजय शर्मा की अटूट भूमिका

विजय शर्मा एक किसान हैं, जिन्होंने पैसे की तंगी के बावजूद बेटी के खेल करियर से जुड़े सभी खर्च उठाए। कीर्ति ने कहा, 'कई लोगों ने मेरे पिता से कहा कि उन्हें मुझे लड़की होने की वजह से खेल में जाने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए। उन्होंने मेरी खराब सेहत के कारण मेरे सफल होने की काबिलियत पर भी शक जताया। लेकिन मेरे पिता ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया।' गौरतलब है कि ग्रामीण परिवारों से आने वाली खिलाड़ियों के लिए सरकारी सहयोग के अभाव में परिवार ही पहली और अक्सर एकमात्र ढाल बनता है।

साई हजारीबाग और कोच उद्धम सिंह की भूमिका

कीर्ति की प्रतिभा को तराशने में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के हजारीबाग केंद्र और कोच उद्धम सिंह की निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने बताया, 'मैं साई, हजारीबाग में ट्रायल्स के लिए सिर्फ इसलिए गई क्योंकि मेरे कोच उद्धम सिंह का वहाँ ट्रांसफर हो गया था। चार साल पहले मैं साई, हजारीबाग गई थी — उस समय से मेरे करियर में बहुत सुधार हुआ है। मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, उसके लिए साई और उद्धम सिंह को श्रेय जाता है।' यह इस बात की भी मिसाल है कि किस तरह SAI के क्षेत्रीय केंद्र भारत के छोटे शहरों से विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं।

ऐतिहासिक स्वर्ण — दक्षिण कोरिया का 44 साल का दबदबा टूटा

कीर्ति शर्मा, अंकिता भगत और कुमकुम मोहोद की भारतीय महिला रिकर्व तिकड़ी ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में प्रबल दावेदार दक्षिण कोरिया को पराजित कर स्वर्ण पदक हासिल किया। इस जीत के साथ भारत ने इस स्पर्धा में दक्षिण कोरिया का 44 साल पुराना वर्चस्व समाप्त कर दिया — जो एशियाई तीरंदाजी के इतिहास का एक बड़ा मोड़ है।

आगे क्या

इस ऐतिहासिक जीत के बाद कीर्ति शर्मा और उनकी टीम की निगाहें आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों और ओलंपिक चक्र की तैयारियों पर टिकी होंगी। भारतीय तीरंदाजी में यह सफलता युवा खिलाड़ियों, खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों के लिए प्रेरणा का नया अध्याय लिखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो क्या SAI या कोई सरकारी तंत्र उन्हें खोज पाता? ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान और पोषण का बोझ अभी भी परिवारों पर ही है, संस्थानों पर नहीं। दक्षिण कोरिया का 44 साल का वर्चस्व तोड़ना ऐतिहासिक है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज जो अनदेखा कर देती है वह यह है कि ऐसी सफलताएँ प्रणाली की देन कम और व्यक्तिगत जुनून की देन ज़्यादा हैं। भारतीय तीरंदाजी की असली छलाँग तब होगी जब रिटौली जैसे गाँवों से प्रतिभाएँ ढूँढना परिवार की ज़िम्मेदारी न होकर राज्य की प्राथमिकता बन जाए।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन गेम्स 2026 में महिला रिकर्व तीरंदाजी का गोल्ड किसने जीता?
भारत की महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम — कीर्ति शर्मा, अंकिता भगत और कुमकुम मोहोद — ने एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने प्रबल दावेदार दक्षिण कोरिया को पराजित किया।
कीर्ति शर्मा कौन हैं और वे कहाँ से हैं?
कीर्ति शर्मा 19 वर्षीय भारतीय तीरंदाज हैं जो हरियाणा के रिटौली गाँव से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने SAI हजारीबाग केंद्र में कोच उद्धम सिंह की देखरेख में अपनी प्रतिभा निखारी।
भारत ने दक्षिण कोरिया का कितने साल पुराना दबदबा तोड़ा?
भारतीय महिला रिकर्व टीम ने एशियन गेम्स 2026 में दक्षिण कोरिया का 44 साल पुराना एकाधिकार समाप्त किया। यह एशियाई तीरंदाजी के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कीर्ति शर्मा की सफलता में उनके परिवार की क्या भूमिका रही?
कीर्ति के पिता विजय शर्मा, जो एक किसान हैं, ने सामाजिक दबाव और पैसे की तंगी के बावजूद उनके खेल करियर को पूरा समर्थन दिया। कई लोगों ने उन्हें बेटी को खेल से रोकने की सलाह दी थी, लेकिन विजय शर्मा अडिग रहे।
कीर्ति शर्मा की तीरंदाजी ट्रेनिंग कैसे हुई?
कीर्ति ने शुरुआती प्रशिक्षण कोच उद्धम सिंह की अकादमी में लिया। जब उद्धम सिंह का SAI हजारीबाग में तबादला हुआ, तो कीर्ति भी वहाँ गईं और चार साल की गहन ट्रेनिंग के बाद उनके करियर में उल्लेखनीय निखार आया।
राष्ट्र प्रेस
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