एशियन गेम्स 2026 गोल्ड मेडलिस्ट कीर्ति शर्मा का जींद में जोरदार स्वागत, बोलीं — 'कोरिया का दबदबा तोड़कर गर्व हुआ'
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स 2026 की महिला रिकर्व टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय तीरंदाज कीर्ति शर्मा का शनिवार को उनके गृह जिले जींद, हरियाणा में जोरदार स्वागत किया गया। कीर्ति ने अंकिता भगत और कुमकुम मोहोद के साथ मिलकर फाइनल में मज़बूत दक्षिण कोरिया को हराया और महिला तीरंदाजी में भारत का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
ऐतिहासिक जीत और कोरिया का टूटा दबदबा
अपने पैतृक गाँव रितोली लौटने पर कीर्ति ने कहा, 'मैं सात साल की उम्र से तीरंदाजी कर रही हूँ। मेरा सपना था एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल लेकर आना। हमने कोरिया के सामने बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हुए उनके 48 वर्षों के दबदबे को खत्म किया, जिसकी हमें बहुत खुशी है।' यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि महिला रिकर्व तीरंदाजी में दक्षिण कोरिया की पकड़ लंबे समय से अटूट मानी जाती थी।
पहला काम — दादा खेड़ा मंदिर में पूजा
गाँव रितोली पहुँचते ही कीर्ति ने सबसे पहले गाँव के दादा खेड़ा मंदिर में पूजा-अर्चना की। परिवार, पड़ोसियों और समर्थकों ने उनका फूलमालाओं से स्वागत किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक रामकुमार गौतम भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने कीर्ति को सम्मानित किया।
परिवार के बलिदान को दिया श्रेय
कीर्ति ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और कोच को दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे घरवालों ने कभी बताया नहीं कि उन्होंने पैसे कहाँ से लगाए हैं। हमारा परिवार आर्थिक तौर पर बहुत मज़बूत नहीं है, लेकिन मेरे परिवार ने मेरे लिए बहुत कुछ किया, जिसके चलते आज मैं यहाँ पर हूँ।' कीर्ति ने यह भी बताया कि बचपन में तीरंदाजी का शौक नहीं था — स्कूल में इस खेल को देखकर रुचि जागी।
दादा का गर्व और आगे का सफर
कीर्ति के दादा ने पोती की उपलब्धि पर कहा, 'हमारी बेटी ने देश, हरियाणा और हमारे गाँव का मान बढ़ाया है।' उन्होंने स्वीकार किया कि इस सफर में कीर्ति को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह हर बार डटी रहीं। विधायक गौतम ने कहा कि वह भारतीय खिलाड़ी और उनके परिवार का हौसला बढ़ाने आए हैं।
अगला लक्ष्य — ओलंपिक में पदक
एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीतने के बाद कीर्ति की नज़र अब ओलंपिक पर है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका अगला सपना ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाना है। भारतीय महिला रिकर्व तिकड़ी की यह जीत देश की युवा तीरंदाजों के लिए एक नई प्रेरणा बन चुकी है, और आने वाले वर्षों में इस खेल में भारत की ताकत और बढ़ने की उम्मीद है।