केटीआर का रेवंत सरकार पर हमला: विदेशी कोयला आयात में ₹3,000 करोड़ के घोटाले का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (केटीआर) ने 15 अक्टूबर 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाए — उनका कहना है कि राज्य सरकार ने कथित तौर पर जानबूझकर कोयला एवं बिजली संकट की परिस्थितियाँ निर्मित की हैं, ताकि विदेशी कोयला आयात की आड़ में ₹3,000 करोड़ का घोटाला अंजाम दिया जा सके। यह आरोप उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का और केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को संबोधित एक विस्तृत खुले पत्र के माध्यम से लगाए हैं।
मुख्य आरोप क्या हैं
केटीआर ने आरोप लगाया कि तेलंगाना सरकार कथित तौर पर सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) को जानबूझकर कमज़ोर कर रही है और साथ ही 'भोट्रा लॉजिस्टिक्स' नामक कंपनी के साथ संदिग्ध समझौतों के ज़रिए महँगे विदेशी कोयले के आयात का रास्ता तैयार कर रही है। उनका दावा है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था में प्रति टन ₹1,500 का कमीशन शामिल हो सकता है, जिससे कुल नुकसान ₹3,000 करोड़ तक पहुँच सकता है।
उन्होंने सरकार से माँग की कि इस प्रस्तावित आयात से जुड़ी समस्त जानकारियाँ — बातचीत के ब्यौरे, टेंडर दस्तावेज़, समझौतों के मसौदे, कीमतें और 'भोट्रा लॉजिस्टिक्स' के चयन का आधार — सार्वजनिक किए जाएँ।
सिंगरेनी उत्पादन में गिरावट का सवाल
पूर्व मंत्री केटीआर ने SCCL के कोयला उत्पादन में आई तेज़ गिरावट पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, जहाँ 2023-24 में उत्पादन लगभग 70.02 मिलियन टन था, वहीं 2025-26 में यह घटकर लगभग 58 मिलियन टन रह गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिजली की बढ़ती माँग के बावजूद घरेलू उत्पादन को मज़बूत करने और खदानों के विकास में क्यों विफलता हुई।
केटीआर ने SCCL के लगभग ₹60,000 करोड़ के कथित बकाया भुगतान का ऑडिटेड विवरण भी माँगा — यह स्पष्ट करते हुए कि कितनी राशि बकाया है, कितना मिल चुका है और कितनी देनदारियाँ अभी शेष हैं।
यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन का मामला
केटीआर ने यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन के संदर्भ में भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2022 में SCCL की खदानों से प्रतिवर्ष 14 मिलियन टन G9-ग्रेड कोयले की आपूर्ति के लिए एक समझौता हुआ था। उनका तर्क है कि विदेशी आयात का प्रस्ताव लाने से पहले इस घरेलू आपूर्ति की समस्याओं को सुलझाया जाना चाहिए था।
गौरतलब है कि उन्होंने यह भी पूछा कि जब राज्य की बिजली कंपनियों के पास कोयला एवं राख प्रबंधन की विशेषज्ञता उपलब्ध है, तो इस कार्य को आउटसोर्स क्यों किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री पर भी निशाना
केटीआर ने केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी की भी आलोचना की और उन पर SCCL के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्र और राज्य — दोनों सरकारों से जवाबदेही की माँग की।
बीआरएस की माँगें और चेतावनी
बीआरएस नेता ने पाँच प्रमुख माँगें रखी हैं: प्रस्तावित आयात व्यवस्था की स्वतंत्र जाँच, विदेशी कोयला खरीद पर एक श्वेत पत्र, 'भोट्रा लॉजिस्टिक्स' से जुड़े समस्त लेन-देन का सार्वजनिक खुलासा, SCCL में उत्पादन गिरावट पर विस्तृत रिपोर्ट और बकाया राशि का ऑडिटेड विवरण।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक विदेशी आयात शुरू नहीं हुआ है और माँग की कि कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी वित्तीय व्यवस्थाओं का खुलासा हो। केटीआर ने चेतावनी दी कि यदि SCCL को कमज़ोर करने या तेलंगाना पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालने की कोशिश की गई, तो BRS इसका कड़ा प्रतिरोध करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और विपक्षी BRS के बीच टकराव लगातार तेज़ होता जा रहा है।