6 अक्टूबर 2026
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केटीआर ने पासपोर्ट जब्ती की झूठी खबर पर तेलुगु दैनिक को कानूनी नोटिस भेजा, 48 घंटे में माफी की मांग

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केटीआर ने पासपोर्ट जब्ती की झूठी खबर पर तेलुगु दैनिक को कानूनी नोटिस भेजा, 48 घंटे में माफी की मांग

सारांश

केटीआर ने फॉर्मूला ई मामले में पासपोर्ट जब्ती का झूठा दावा करने वाले तेलुगु दैनिक को कानूनी नोटिस भेजा है। अदालत ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था — केवल पासपोर्ट कार्यालय का कारण बताओ नोटिस था। 48 घंटे में माफी न मिली तो मानहानि का मुकदमा तय है।

मुख्य बातें

केटीआर ने 6 अक्टूबर 2026 को एक प्रमुख तेलुगु दैनिक को कानूनी नोटिस भेजा, जिसने फॉर्मूला ई मामले में उनके पासपोर्ट की अदालती जब्ती की कथित रूप से झूठी खबर 29 सितंबर को प्रकाशित की थी।
कानूनी नोटिस में स्पष्ट किया गया कि विशेष अदालत ने पासपोर्ट जब्त करने का कोई आदेश नहीं दिया था; केवल एसीबी ने एक मेमो दाखिल किया था।
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने 28 सितंबर को पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10(3)(ई) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जवाब के लिए 15 दिन का समय दिया गया था।
नोटिस में 48 घंटे के भीतर खबर वापस लेने, समान प्रमुखता से सुधार प्रकाशित करने और बिना शर्त माफी की मांग की गई है।
अनुपालन न होने पर दीवानी व आपराधिक मानहानि मुकदमा और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में शिकायत की चेतावनी दी गई है।
ललिता रेड्डी ने समाचार पत्र के संपादक, प्रकाशक, मुद्रक, रेजिडेंट एडिटर और संबंधित रिपोर्टर को भेजा है।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव (केटीआर) ने 6 अक्टूबर 2026 को एक प्रमुख तेलुगु दैनिक को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस फॉर्मूला ई रेस मामले में अदालत द्वारा उनके पासपोर्ट की अस्थायी जब्ती का आदेश दिए जाने संबंधी कथित रूप से गलत खबर प्रकाशित करने को लेकर भेजा गया है। हैदराबाद से जारी इस कानूनी नोटिस में समाचार पत्र को 48 घंटे के भीतर खबर वापस लेने, सुधार प्रकाशित करने और बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया गया है।

विवाद की जड़: क्या था गलत प्रकाशन

केटीआर के कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, संबंधित तेलुगु दैनिक ने 29 सितंबर 2026 को एक खबर प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया था कि विशेष अदालत ने केटीआर के पासपोर्ट की अस्थायी जब्ती का आदेश दिया है। कानूनी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यह दावा तथ्यों के सर्वथा विपरीत है।

नोटिस के मुताबिक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के जांच अधिकारी ने विशेष अदालत में केटीआर के पासपोर्ट के संबंध में उचित आदेश देने का अनुरोध करते हुए एक मेमो अवश्य दाखिल किया था। परंतु इस मेमो को अदालत का आदेश बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है — क्योंकि विशेष अदालत ने पासपोर्ट जब्त करने का कोई आदेश जारी नहीं किया था।

पासपोर्ट कार्यालय का नोटिस और अदालती आदेश में अंतर

कानूनी नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने 28 सितंबर 2026 को पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10(3)(ई) के तहत केटीआर को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था और जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया था। यह नोटिस और विशेष अदालत का आदेश — दोनों भिन्न कानूनी प्रक्रियाएँ हैं, और इनके बीच के इस बुनियादी अंतर को समाचार पत्र ने नजरअंदाज किया।

गौरतलब है कि फॉर्मूला ई रेस से जुड़ा यह मामला पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और केटीआर की छवि को लेकर तेलंगाना की राजनीति में सक्रिय बहस का विषय बना हुआ है। ऐसे में कथित तौर पर गलत खबर का प्रकाशन उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

कानूनी नोटिस में उठाई गई मांगें

केटीआर की ओर से अधिवक्ता एन. ललिता रेड्डी ने यह नोटिस समाचार पत्र के संपादक, प्रकाशक, मुद्रक, रेजिडेंट एडिटर और संबंधित रिपोर्टर को भेजा है। नोटिस में खबर को समाचार पत्र के ऑनलाइन पोर्टल, ई-पेपर, वेबसाइट, सोशल मीडिया और डिजिटल आर्काइव — सभी माध्यमों से तत्काल हटाने की माँग की गई है।

इसके अलावा नोटिस में समाचार पत्र से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि खबर के लिए किन स्रोतों का उपयोग किया गया और संबंधित रिपोर्टर ने वास्तव में अदालत के रिकॉर्ड या आदेशों की जाँच की थी या नहीं। साथ ही खबर से जुड़े सभी व्हाट्सऐप संदेश, ईमेल, नोट्स, रिकॉर्डिंग, दस्तावेज, ड्राफ्ट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।

अनुपालन न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि 48 घंटे के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो केटीआर की ओर से दीवानी और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू की जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में भी शिकायत दर्ज कराने का उल्लेख नोटिस में किया गया है।

रामा राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्वयं इस कानूनी नोटिस की जानकारी साझा करते हुए कहा कि 50 वर्षों के इतिहास वाले एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र द्वारा तथ्यों की पुष्टि किए बिना इस तरह की खबर प्रकाशित करना 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है। यह मामला अब तेलंगाना की मीडिया जवाबदेही पर बड़ी बहस का रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसे नजरअंदाज किया गया — जो बताता है कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में तथ्य-जाँच की प्रक्रिया कितनी कमजोर हो जाती है। दूसरी ओर, कानूनी नोटिस की पारदर्शिता — जिसे केटीआर ने स्वयं सोशल मीडिया पर साझा किया — यह भी दर्शाती है कि विपक्षी नेता अब न्यायालय से पहले जनमत की अदालत में मुकदमा लड़ना पसंद करते हैं। प्रेस काउंसिल की शिकायत का उल्लेख प्रतीकात्मक हो सकता है, क्योंकि उस संस्था की प्रवर्तन शक्ति सीमित है; असली दबाव मानहानि के मुकदमे की आशंका से ही आएगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केटीआर ने किस बात को लेकर तेलुगु दैनिक को कानूनी नोटिस भेजा?
केटीआर ने उस खबर को लेकर नोटिस भेजा है जिसमें दावा किया गया था कि फॉर्मूला ई रेस मामले में विशेष अदालत ने उनके पासपोर्ट की अस्थायी जब्ती का आदेश दिया है। कानूनी नोटिस के अनुसार, अदालत ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया था और यह खबर तथ्यों के विपरीत थी।
क्या केटीआर का पासपोर्ट वास्तव में जब्त हुआ?
नहीं। कानूनी नोटिस के अनुसार विशेष अदालत ने पासपोर्ट जब्त करने का कोई आदेश नहीं दिया। हालाँकि, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने 28 सितंबर 2026 को पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10(3)(ई) के तहत कारण बताओ नोटिस ज़रूर जारी किया था, जिसका जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था।
कानूनी नोटिस में समाचार पत्र से क्या माँगा गया है?
नोटिस में 48 घंटे के भीतर खबर को सभी माध्यमों — प्रिंट, ऑनलाइन पोर्टल, ई-पेपर, सोशल मीडिया और डिजिटल आर्काइव — से हटाने, उसी प्रमुखता के साथ सुधार प्रकाशित करने और केटीआर से बिना शर्त माफी मांगने को कहा गया है। इसके अलावा खबर से जुड़े सभी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश है।
अनुपालन न होने पर क्या होगा?
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि 48 घंटे के भीतर उचित कार्रवाई न होने पर केटीआर की ओर से दीवानी और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू की जाएगी। साथ ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही गई है।
फॉर्मूला ई रेस मामला क्या है जिसमें केटीआर का नाम आया है?
फॉर्मूला ई रेस मामला हैदराबाद में आयोजित इलेक्ट्रिक कार रेस से जुड़ा एक कथित वित्तीय अनियमितता का मामला है, जिसकी जाँच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कर रहा है। इसी मामले में एसीबी ने विशेष अदालत में केटीआर के पासपोर्ट को लेकर एक मेमो दाखिल किया था, जिसे गलत तरीके से अदालत का आदेश बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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