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फॉर्मूला ई रेस मामला: केटीआर विशेष एसीबी कोर्ट में पेश, ₹54.88 करोड़ की अनियमितताओं का आरोप

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फॉर्मूला ई रेस मामला: केटीआर विशेष एसीबी कोर्ट में पेश, ₹54.88 करोड़ की अनियमितताओं का आरोप

सारांश

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर शुक्रवार को हैदराबाद की विशेष एसीबी अदालत में फॉर्मूला ई रेस मामले में पेश हुए। ₹54.88 करोड़ की कथित अनियमितताओं के इस मामले में वे आरोपी नंबर एक हैं। अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

मुख्य बातें

रामाराव (केटीआर) 31 जुलाई को हैदराबाद की विशेष एसीबी अदालत में फॉर्मूला ई रेस मामले में उपस्थित हुए।
केटीआर इस मामले में आरोपी नंबर एक हैं; उन पर ₹54.88 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है।
तीनों आरोपियों ने ₹1 लाख की जमानत राशि जमा की; अदालत ने सुनवाई 25 अगस्त तक स्थगित की।
एसीबी के अनुसार, 2023 में फॉर्मूला ई रेस के दौरान कथित तौर पर ₹55 करोड़ बिना अनुमति विदेशी फर्म को भेजे गए, जिससे HMDA पर ₹8.06 करोड़ का अतिरिक्त कर भार पड़ा।
नवंबर 2024 में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने अभियोजन की अनुमति दी; मार्च 2026 में एसीबी ने आरोप-पत्र दाखिल किया।
केटीआर ने मामले को 'फर्जी' बताकर खारिज किया है।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) शुक्रवार, 31 जुलाई को हैदराबाद की विशेष एसीबी अदालत में फॉर्मूला ई-कार रेस मामले में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। मई में जारी समन के अनुपालन में पेश हुए रामाराव इस मामले में आरोपी नंबर एक हैं, जिसमें कथित तौर पर ₹54.88 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है।

मुख्य घटनाक्रम

रामाराव के साथ इस मामले के अन्य आरोपी — भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अरविंद कुमार (पूर्व विशेष मुख्य सचिव, नगर प्रशासन एवं शहरी विकास) और हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण (HMDA) के पूर्व मुख्य अभियंता बी.एल.एन. रेड्डी — भी अदालत में उपस्थित हुए। तीनों ने ₹1 लाख की जमानत राशि जमा कर अन्य कानूनी औपचारिकताएँ पूरी कीं। अदालत ने अगली सुनवाई 25 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

नामपल्ली कोर्ट कॉम्प्लेक्स के बाहर पूर्व मंत्री सबिता इंदिरा रेड्डी, महमूद अली, विधायक कौशिक रेड्डी और बीआरएस नेता प्रवीण कुमार सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता केटीआर के समर्थन में एकत्र हुए।

मामले की पृष्ठभूमि

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अनुसार, 2023 में हैदराबाद में आयोजित फॉर्मूला ई कार रेस के दौरान नियामक प्राधिकरणों की पूर्व अनुमति के बिना कथित तौर पर लगभग ₹55 करोड़ एक विदेशी फर्म को हस्तांतरित किए गए। इस अनधिकृत विदेशी धन प्रेषण के कारण HMDA पर ₹8.06 करोड़ का अतिरिक्त कर भार पड़ा।

इसके अलावा, रामाराव पर यह भी आरोप है कि उन्होंने रेस आयोजित करने का अधिकार प्रायोजक कंपनी को देने के एवज में ₹44 करोड़ चुनावी बॉन्ड के रूप में प्राप्त किए।

जाँच की कालक्रम

एसीबी ने नौ महीने की जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी और राज्यपाल से अभियोजन की अनुमति माँगी। नवंबर 2024 में तेलंगाना के तत्कालीन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने केटीआर पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी। इसके बाद नगर प्रशासन और शहरी विकास के प्रधान सचिव एम. दाना किशोर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।

दिसंबर 2024 में एसीबी ने केटीआर, अरविंद कुमार और बी.एल.एन. रेड्डी के विरुद्ध औपचारिक मामला दर्ज किया। मार्च 2026 में एसीबी ने विशेष अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।

केटीआर का पक्ष

एसीबी द्वारा चार बार पूछताछ किए जा चुके रामाराव ने फॉर्मूला ई मामले को 'फर्जी मामला' बताकर सिरे से खारिज किया है। बीआरएस का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।

आगे क्या होगा

अदालत की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित है। यह मामला बीआरएस शासनकाल की वित्तीय जवाबदेही की व्यापक जाँच का हिस्सा है और तेलंगाना की राजनीति में एक बड़े विमर्श का केंद्र बना हुआ है। न्यायालय का अगला आदेश इस मामले की दिशा तय करने में निर्णायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹55 करोड़ के कथित विदेशी प्रेषण में नियामक चूक किस स्तर पर हुई — व्यक्तिगत निर्णय या संस्थागत विफलता। यह मामला तेलंगाना में सत्ता-परिवर्तन के बाद पूर्ववर्ती सरकार की जाँच के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है, जो विपक्ष को 'राजनीतिक प्रतिशोध' का तर्क देने का अवसर देता है। मुख्यधारा की कवरेज अदालती उपस्थिति पर केंद्रित है, जबकि ₹8.06 करोड़ के अतिरिक्त कर भार और चुनावी बॉन्ड के कथित संबंध जैसे ठोस वित्तीय सवाल अभी भी उत्तर की प्रतीक्षा में हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केटीआर पर फॉर्मूला ई मामले में क्या आरोप हैं?
केटीआर पर आरोप है कि बीआरएस शासनकाल में 2023 हैदराबाद फॉर्मूला ई रेस के आयोजन के दौरान नियामक अनुमति के बिना कथित तौर पर ₹54.88 करोड़ एक विदेशी फर्म को हस्तांतरित किए गए। इसके अलावा, उन पर रेस आयोजन का अधिकार देने के बदले ₹44 करोड़ चुनावी बॉन्ड प्राप्त करने का भी आरोप है।
फॉर्मूला ई मामले में अगली सुनवाई कब है?
हैदराबाद की विशेष एसीबी अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त के लिए निर्धारित की है। 31 जुलाई को आरोपियों के पेश होने और जमानत औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद यह तारीख तय की गई।
इस मामले में एसीबी की जाँच कब और कैसे शुरू हुई?
एसीबी ने नौ महीने की जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी और राज्यपाल से अभियोजन की अनुमति माँगी। नवंबर 2024 में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी, जिसके बाद दिसंबर 2024 में एफआईआर दर्ज हुई और मार्च 2026 में आरोप-पत्र दाखिल किया गया।
केटीआर ने इस मामले पर क्या कहा है?
केटीआर ने फॉर्मूला ई मामले को 'फर्जी मामला' बताकर सिरे से खारिज किया है। एसीबी द्वारा चार बार पूछताछ किए जाने के बावजूद उन्होंने और बीआरएस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।
इस मामले में HMDA को क्या नुकसान हुआ?
एफआईआर के अनुसार, संबंधित नियामक प्राधिकरणों की पूर्व अनुमति के बिना विदेशी धन प्रेषण किए जाने के कारण हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण (HMDA) पर ₹8.06 करोड़ का अतिरिक्त कर भार पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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