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कुणाल खेमू का खुलासा: बेटी इनाया की परवरिश में समाज नहीं, दिल की सुनी

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कुणाल खेमू का खुलासा: बेटी इनाया की परवरिश में समाज नहीं, दिल की सुनी

सारांश

कुणाल खेमू ने साफ कहा — बेटी इनाया की परवरिश में समाज की राय नहीं, दिल की आवाज़ सुनी। नौ साल के सफर में सोहा अली खान के साथ मिलकर हर फैसला अपनी समझ से लिया, आलोचना को भी कभी हावी नहीं होने दिया।

मुख्य बातें

अभिनेता कुणाल खेमू ने कहा कि उन्होंने और सोहा अली खान ने बेटी इनाया नौमी खेमू की परवरिश में कभी समाज के दबाव को तवज्जो नहीं दी।
इस साल इनाया नौ वर्ष की हो जाएंगी; दंपती ने पिछले नौ सालों में हर फैसला अपनी समझ के आधार पर लिया।
कुणाल ने माना कि परवरिश को लेकर कुछ लोगों ने तारीफ की, तो कुछ ने आलोचना भी की — लेकिन इसका असर उनके निर्णयों पर नहीं पड़ा।
दोनों के बीच छोटे-छोटे मतभेद होते हैं, लेकिन एक-दूसरे की राय का सम्मान करते हुए मिलकर रास्ता निकाला जाता है।
कुणाल के अनुसार माता-पिता होने का मतलब हर बात पर एकमत होना नहीं, बल्कि बच्चे के हित में सही संतुलन बनाना है।

अभिनेता कुणाल खेमू और उनकी पत्नी, अभिनेत्री सोहा अली खान, अपनी बेटी इनाया नौमी खेमू की परवरिश को लेकर हमेशा अपने मन की राह पर चले हैं — समाज की अपेक्षाओं को नहीं। 29 जून को एक खास बातचीत में कुणाल ने साफ कहा कि माता-पिता को बच्चे के लिए फैसले समाज के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी समझ और प्रेम के आधार पर लेने चाहिए। इस साल इनाया नौ वर्ष की हो जाएंगी और यह दंपती पिछले नौ सालों के सफर को एक मज़बूत साझेदारी के रूप में देखता है।

समाज के दबाव से परे परवरिश

कुणाल खेमू ने बातचीत में कहा, 'मैंने और सोहा ने बेटी की परवरिश को लेकर कभी भी समाज के दबाव को महत्व नहीं दिया। दोनों ने हमेशा अपने दिल की बात सुनी और वही फैसले लिए, जो बेटी के लिए सही लगे।' उन्होंने जोड़ा कि इन वर्षों में कुछ लोगों ने उनकी सोच की सराहना की, तो कुछ ने आलोचना भी की — लेकिन किसी भी प्रतिक्रिया ने उनके निर्णयों को प्रभावित नहीं किया।

जीवनसाथी के साथ विश्वास की नींव

कुणाल ने अपनी पत्नी सोहा के बारे में कहा, 'मेरी किस्मत अच्छी है कि मुझे ऐसी दोस्त, जीवनसाथी और पत्नी मिली है, जो मुझे अच्छे से समझती है और भरोसा करती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों ने कभी 'आदर्श माता-पिता' की छवि बनाने की कोशिश नहीं की — सोहा एक माँ के रूप में जो उचित समझती हैं वह करती हैं, और कुणाल एक पिता के रूप में अपनी समझ से फैसले लेते हैं।

मतभेद भी, सम्मान भी

कुणाल ने माना कि हर परिवार की तरह उनके बीच भी छोटे-छोटे मतभेद होते हैं। उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण दिया — 'कई बार सोहा कहती हैं कि अभी उसे आइसक्रीम मत खिलाओ, लेकिन अगर मुझे लगता है कि सही समय है तो मैं उसे आइसक्रीम खिला देता हूं।' उनका कहना है कि माता-पिता होने का अर्थ यह नहीं कि दोनों हर बात पर एक जैसी सोच रखें — बल्कि एक-दूसरे की राय का सम्मान करते हुए मिलकर सही रास्ता निकालना ज़रूरी है।

परवरिश का असली मतलब

कुणाल का मानना है कि परवरिश एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, न कि समाज की नज़रों में खुद को साबित करने का मंच। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता को अपने बच्चे को उसकी ज़रूरतों के अनुसार समझना चाहिए, न कि बाहरी अपेक्षाओं के अनुसार ढालना। यह दृष्टिकोण उनके और सोहा के बीच एक मज़बूत व संतुलित पारिवारिक रिश्ते की नींव रहा है।

आगे की राह

जैसे-जैसे इनाया बड़ी हो रही हैं, यह दंपती उनकी परवरिश में नई चुनौतियों और खुशियों का स्वागत करने के लिए तैयार है। कुणाल और सोहा की यह खुलकर बात करने की आदत — चाहे सोशल मीडिया पर हो या साक्षात्कारों में — अनेक युवा माता-पिता को प्रेरणा देती है कि परवरिश में आत्मविश्वास और पारस्परिक सम्मान सबसे बड़ी ताकत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी ध्यान देने योग्य है कि सोशल मीडिया पर 'आदर्श पारिवारिक जीवन' की छवि पेश करने वाले सेलिब्रिटी जब परवरिश पर बोलते हैं, तो उनकी पहुँच और प्रभाव को देखते हुए उनकी बातें युवा माता-पिता पर गहरा असर डालती हैं — इसलिए ऐसी ईमानदार बातचीत का सार्वजनिक महत्व है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुणाल खेमू और सोहा अली खान की बेटी इनाया की उम्र कितनी है?
इनाया नौमी खेमू इस साल नौ वर्ष की हो जाएंगी। कुणाल खेमू ने बताया कि पिछले नौ सालों में उन्होंने और सोहा ने परवरिश के हर फैसले अपनी समझ के आधार पर लिए।
कुणाल खेमू ने बेटी की परवरिश को लेकर क्या कहा?
कुणाल खेमू ने कहा कि उन्होंने और सोहा अली खान ने कभी समाज के दबाव में आकर परवरिश के फैसले नहीं लिए। उनका मानना है कि माता-पिता को अपने बच्चे के लिए जो सही लगे, वही करना चाहिए — न कि 'आदर्श माता-पिता' की छवि बनाने के लिए।
क्या कुणाल खेमू और सोहा अली खान की परवरिश के तरीके पर आलोचना हुई है?
हाँ, कुणाल खेमू ने खुद बताया कि उनकी परवरिश की सोच पर कुछ लोगों ने तारीफ की तो कुछ ने आलोचना भी की। लेकिन दोनों ने कभी इस आलोचना को अपने फैसलों पर हावी नहीं होने दिया।
क्या कुणाल खेमू और सोहा अली खान के बीच परवरिश को लेकर मतभेद होते हैं?
कुणाल खेमू ने माना कि हर परिवार की तरह उनके बीच भी छोटे-छोटे मतभेद होते हैं, जैसे कि इनाया को आइसक्रीम खिलाने का सही समय। हालाँकि, वे एक-दूसरे की राय का सम्मान करते हुए मिलकर सही रास्ता निकालते हैं।
कुणाल खेमू के अनुसार अच्छे माता-पिता बनने का सही तरीका क्या है?
कुणाल खेमू के अनुसार माता-पिता होने का मतलब हर बात पर एकमत होना नहीं है। बच्चे के हित में एक-दूसरे की राय का सम्मान करना और समाज की अपेक्षाओं के बजाय अपनी समझ और प्रेम के आधार पर फैसले लेना ही असली परवरिश है।
राष्ट्र प्रेस
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