कुणाल खेमू का खुलासा: बेटी इनाया की परवरिश में समाज नहीं, दिल की सुनी
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता कुणाल खेमू और उनकी पत्नी, अभिनेत्री सोहा अली खान, अपनी बेटी इनाया नौमी खेमू की परवरिश को लेकर हमेशा अपने मन की राह पर चले हैं — समाज की अपेक्षाओं को नहीं। 29 जून को एक खास बातचीत में कुणाल ने साफ कहा कि माता-पिता को बच्चे के लिए फैसले समाज के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी समझ और प्रेम के आधार पर लेने चाहिए। इस साल इनाया नौ वर्ष की हो जाएंगी और यह दंपती पिछले नौ सालों के सफर को एक मज़बूत साझेदारी के रूप में देखता है।
समाज के दबाव से परे परवरिश
कुणाल खेमू ने बातचीत में कहा, 'मैंने और सोहा ने बेटी की परवरिश को लेकर कभी भी समाज के दबाव को महत्व नहीं दिया। दोनों ने हमेशा अपने दिल की बात सुनी और वही फैसले लिए, जो बेटी के लिए सही लगे।' उन्होंने जोड़ा कि इन वर्षों में कुछ लोगों ने उनकी सोच की सराहना की, तो कुछ ने आलोचना भी की — लेकिन किसी भी प्रतिक्रिया ने उनके निर्णयों को प्रभावित नहीं किया।
जीवनसाथी के साथ विश्वास की नींव
कुणाल ने अपनी पत्नी सोहा के बारे में कहा, 'मेरी किस्मत अच्छी है कि मुझे ऐसी दोस्त, जीवनसाथी और पत्नी मिली है, जो मुझे अच्छे से समझती है और भरोसा करती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों ने कभी 'आदर्श माता-पिता' की छवि बनाने की कोशिश नहीं की — सोहा एक माँ के रूप में जो उचित समझती हैं वह करती हैं, और कुणाल एक पिता के रूप में अपनी समझ से फैसले लेते हैं।
मतभेद भी, सम्मान भी
कुणाल ने माना कि हर परिवार की तरह उनके बीच भी छोटे-छोटे मतभेद होते हैं। उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण दिया — 'कई बार सोहा कहती हैं कि अभी उसे आइसक्रीम मत खिलाओ, लेकिन अगर मुझे लगता है कि सही समय है तो मैं उसे आइसक्रीम खिला देता हूं।' उनका कहना है कि माता-पिता होने का अर्थ यह नहीं कि दोनों हर बात पर एक जैसी सोच रखें — बल्कि एक-दूसरे की राय का सम्मान करते हुए मिलकर सही रास्ता निकालना ज़रूरी है।
परवरिश का असली मतलब
कुणाल का मानना है कि परवरिश एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, न कि समाज की नज़रों में खुद को साबित करने का मंच। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता को अपने बच्चे को उसकी ज़रूरतों के अनुसार समझना चाहिए, न कि बाहरी अपेक्षाओं के अनुसार ढालना। यह दृष्टिकोण उनके और सोहा के बीच एक मज़बूत व संतुलित पारिवारिक रिश्ते की नींव रहा है।
आगे की राह
जैसे-जैसे इनाया बड़ी हो रही हैं, यह दंपती उनकी परवरिश में नई चुनौतियों और खुशियों का स्वागत करने के लिए तैयार है। कुणाल और सोहा की यह खुलकर बात करने की आदत — चाहे सोशल मीडिया पर हो या साक्षात्कारों में — अनेक युवा माता-पिता को प्रेरणा देती है कि परवरिश में आत्मविश्वास और पारस्परिक सम्मान सबसे बड़ी ताकत है।