सोहा अली खान ने बेटी इनाया को सौंपा बचपन का 'इलियट', बोलीं- 'वही खुशी देना चाहती हूं जो मुझे मिली'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री सोहा अली खान ने 16 जून को सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने बचपन के सबसे प्रिय खिलौने — एक टॉय डॉग जिसे उन्होंने 'इलियट' नाम दिया था — को अपनी बेटी इनाया नौमी खेमू को सौंपने की दिल छू लेने वाली कहानी सुनाई। यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है और फैंस के बीच बेहद पसंद किया जा रहा है।
इलियट की कहानी — तीन भाई-बहनों की कल्पना की उड़ान
सोहा ने वीडियो में बताया कि गर्मियों की छुट्टियों में वे अपने भाई सैफ अली खान और बहन सबा अली खान पटौदी के साथ मिलकर इलियट को लेकर अलग-अलग कहानियाँ बनाया करती थीं। उन्होंने कहा, 'एक व्यक्ति कहानी शुरू करता था, दूसरा उसे आगे बढ़ाता था और तीसरा उसमें कोई नया मोड़ जोड़ देता था।' इस तरह उनकी कल्पनाओं में इलियट कभी दुनिया की सैर करता, कभी किसी रहस्य को सुलझाता और कभी नए दोस्तों से मिलता था।
सैफ के सुराग और सबा के नक्शे
सोहा ने याद किया कि सैफ खेल को रोमांचक बनाने के लिए घर के अलग-अलग हिस्सों में सुराग छिपा देते थे, जबकि सबा खजाने तक पहुँचने के लिए नक्शा तैयार करती थीं। सोहा खुद इलियट को अपना साथी बनाकर उन सुरागों की तलाश में निकल पड़ती थीं। उन्होंने कहा, 'कई बार पूरा दिन ऐसे ही बीत जाता था और हमें समय का पता भी नहीं चलता था।'
खिलौने से बड़ी है कल्पना की ताकत
सोहा ने इस अनुभव से एक गहरी बात साझा की — 'असली महत्व खिलौने का नहीं था, बल्कि उस कल्पना का था जो उस खिलौने के ज़रिए की जाती थी। एक साधारण खिलौना बच्चों को नई दुनिया बनाने, नए किरदार गढ़ने और अपनी सोच को खुलकर उड़ान देने का मौका देता है।' यही कारण है कि उन्होंने इलियट को आज भी अपने जीवन का बेहद खास हिस्सा माना।
इनाया को मिला माँ का सबसे प्यारा खजाना
अभिनेत्री ने बताया कि जब इनाया पैदा हुई, तो उन्होंने चाहा कि उनकी बेटी भी वही खुशी महसूस करे जो उन्हें बचपन में मिली थी। इसीलिए उन्होंने इलियट इनाया को दे दिया। अब इनाया खिलौनों के साथ घंटों खेलती है — कभी उन्हें कहानियाँ सुनाती है, कभी उनके लिए खाना बनाती है और कभी उन्हें पढ़ाने का नाटक करती है। सोहा ने कहा, 'उसकी कल्पना को इस तरह विकसित होते देखना बेहद खुशी देता है।'
वीडियो का संदेश
वीडियो के कैप्शन में सोहा ने लिखा, 'कोई भी खिलौना सिर्फ खेलने की चीज़ नहीं होता, बल्कि वह एडवेंचर, क्रिएटिविटी और खूबसूरत यादों की शुरुआत होता है।' यह पोस्ट बच्चों के मानसिक विकास में रचनात्मक खेल की भूमिका को लेकर एक सार्थक संवाद की शुरुआत कर रही है।