केरल हाई कोर्ट का विजयन को झटका: कुझालनदान ने पूछा — 'बेदाग हाथ हैं तो एफआईआर से डर क्यों?'
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को मसाप्पाडी मामले में सतर्कता एफआईआर दर्ज करने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य की अपील खारिज कर दी, जिससे कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनदान को इस राजनीतिक लड़ाई में एक नया और ताकतवर हथियार मिल गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ताओं को उस प्रारंभिक आदेश को अपील के माध्यम से चुनौती देने का अधिकार नहीं है।
अदालत का फैसला और उसकी अहमियत
केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने विजयन, उनकी बेटी टी. वीना, पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास और अन्य की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जो उन्होंने सतर्कता एफआईआर दर्ज करने के एकल न्यायाधीश के निर्देश के विरुद्ध दायर की थीं। अदालत ने फैसला सुनाया कि इस तरह की अपील के ज़रिये प्रारंभिक आदेश को चुनौती देने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। यह फैसला कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस — जो कथित तौर पर विजयन की बेटी वीना से जुड़ी कंपनी है — के बीच कथित वित्तीय लेन-देन से संबंधित मसाप्पाडी मामले में आया है।
कुझालनदान का पलटवार
फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनदान ने सीधे पिनाराई विजयन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह तर्क खारिज कर दिया है कि मामला दर्ज ही नहीं किया जा सकता। कुझालनदान ने कहा कि विजयन को अब जांच को रोकने की कोशिश करने के बजाय कानूनी रूप से आरोपों का सामना करना चाहिए।
कुझालनदान ने विजयन के उस बार-बार दोहराए गए दावे का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके हाथ बेदाग हैं। कुझालनदान ने तंज कसते हुए पूछा — 'अगर हाथ बेदाग हैं और कुछ छिपाने की जरूरत नहीं, तो एफआईआर से इतना डर क्यों?' यह उसी तर्क को उन्हीं पर पलटने की चतुर राजनीतिक चाल है, जिसे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI-M] और वामपंथी खेमा पूर्व मुख्यमंत्री का बचाव करने के लिए लंबे समय से इस्तेमाल करता आया है।
कुझालनदान की राजनीतिक यात्रा: उतार-चढ़ाव
यह ऐसे समय में आया है जब कुझालनदान खुद कुछ समय से राजनीतिक दबाव में थे। पिछले साल केरल हाई कोर्ट ने ही CMRL-एक्सालॉजिक विवाद में जांच की मांग वाली उनकी याचिका को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया था, जिससे CPI-M को उन पर हमला करने का मौका मिल गया था। इसके बाद केरल के एक लोकप्रिय हिल स्टेशन पर उनकी जमीनों की सतर्कता जांच की घोषणा ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं, जिसे वामपंथी खेमे ने उन्हें कमजोर करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
गौरतलब है कि कुझालनदान विधानसभा के अंदर और बाहर, दोनों जगह CMRL और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर विजयन को घेरते रहे हैं। डिवीजन बेंच के ताज़े फैसले ने उनके पक्ष में राजनीतिक पासा पलट दिया है।
सीबीआई पर कुझालनदान का रुख
कुझालनदान ने यह भी कहा कि उन्होंने अब तक इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का दरवाजा खटखटाने से परहेज किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विजयन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों का हथियार नहीं बनाना चाहते थे — एक बयान जो केरल की जटिल विपक्षी राजनीति को उजागर करता है, जहाँ कांग्रेस और वामपंथी दोनों भाजपा को साझा प्रतिद्वंद्वी मानते हैं।
आगे क्या होगा
डिवीजन बेंच के फैसले के बाद अब सतर्कता जांच का रास्ता और स्पष्ट होता दिख रहा है। यह मामला केरल की राजनीति में एक बड़े मोड़ का संकेत दे सकता है, क्योंकि पिनाराई विजयन के खिलाफ कानूनी दांव ऊंचे हो गए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, कुझालनदान की आक्रामक रणनीति अब कांग्रेस और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) को वामपंथी सरकार को घेरने का नया मंच दे सकती है।