क्या 2026 संभावनाओं का साल होगा: गठबंधन संकट से वैश्विक तनाव तक, क्या सड़कों पर लौटेगा जन आंदोलन?

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क्या 2026 संभावनाओं का साल होगा: गठबंधन संकट से वैश्विक तनाव तक, क्या सड़कों पर लौटेगा जन आंदोलन?

सारांश

क्या 2026 संभावनाओं का साल होगा? राजनीतिक गठबंधनों में टूट और जन आंदोलनों के साथ-साथ वैश्विक तनाव की स्थिति में भारत की भूमिका पर चर्चा। क्या विपक्ष सड़क पर उतरेगा?

Key Takeaways

  • 2026 में संभावित राजनीतिक टूट
  • जन आंदोलनों का उभार
  • वैश्विक तनाव के बीच भारत की भूमिका
  • ब्रिक्स और जी-20 शिखर सम्मेलन
  • भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण मोड़

नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नए साल की शुरुआत के साथ ही राजनीति का पारा चढ़ता दिख रहा है। ऐसे में, यदि हम राजनीति में संभावनाओं की चर्चा करें, तो 'एकला चलो रे' की नीति और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। विपक्षी खेमे के भीतर नेतृत्व की खींचतान और विचारधारा के टकराव के कारण कई पुराने साथी अपना रास्ता अलग कर सकते हैं।

हाल ही में इंडिया ब्लॉक की सहयोगी टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी के बयान से नए साल की शुरुआत से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

अभिषेक बनर्जी के 'विपक्षी दलों को जमीन पर चुनाव लड़ना चाहिए' वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि साल बदलने के साथ 'इंडी गठबंधन' की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। गठबंधन के पास न तो कोई स्पष्ट मिशन है और न ही कोई विजन, केवल भ्रम और आपसी टकराव हैं।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से कहा था कि 'इंडी गठबंधन' के सभी सहयोगी दल चुनाव से पहले एक साथ आ जाते हैं और हार के परिणाम आने के बाद उनमें खींचतान और विचारधारा का टकराव देखने को मिलता है। इसका एक नमूना हमें दिल्ली और बिहार के चुनाव परिणाम के बाद देखने को मिला था।

साल 2026 में कई राज्यों में होने वाले स्थानीय और क्षेत्रीय चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे। इन चुनावों के नतीजे यह निर्धारित करेंगे कि केंद्र की सत्ता पर पकड़ कितनी मजबूत रहेगी।

2026 वह साल हो सकता है जब सड़क की राजनीति संसद पर भारी पड़े। इसके साथ ही विपक्ष सरकार की कुछ नीतियों को लेकर सड़क पर उतर सकता है।

इसका एक उदाहरण हमें नए साल की शुरुआत के दूसरे दिन देखने को मिला, जब शुक्रवार को महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने भर्ती विज्ञापन में हुई देरी को लेकर एक साल की आयु-सीमा में छूट की मांग तेज कर दी। पुणे में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे और सरकार से राहत की अपील की।

आंदोलनों की इस आग को विपक्षी दल अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2026 'रणनीतिक पुनर्गठन' का साल हो सकता है। दुनिया दो ध्रुवों के बीच झूलती नजर आ सकती है, और भारत इस संतुलन का केंद्र बन सकता है।

वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चिंताओं को लेकर तनाव और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा, जिससे भारत के लिए अपनी विनिर्माण क्षमता साबित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर उत्पन्न होगा।

2026 में भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। इसमें व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग जैसे दिग्गज नेताओं की भागीदारी न केवल रणनीतिक होगी, बल्कि यह भारत की तटस्थता और 'विश्व गुरु' की छवि की परीक्षा भी होगी। इसके साथ ही, क्वाड शिखर सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

भारतीय विदेश नीति के लिए 2026 उपलब्धियों से भरा हो सकता है। वर्षों से लंबित व्यापार समझौते निर्णायक मोड़ पर पहुंचेंगे। गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यात्रा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकती है। यह भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

फरवरी 2026 में भारत वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। यह शिखर सम्मेलन तकनीक की दुनिया में भारत की धाक जमाएगा। म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले चुनाव भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। इस पर भारत नजर बनाए रखेगा।

दिसंबर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मियामी में डोनाल्ड ट्रंप के गोल्फ क्लब में आयोजित होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह मुलाकात भारत-अमेरिका के संबंधों के भविष्य की दिशा तय करेगी।

Point of View

मेरा मानना है कि 2026 में राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे। स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों का नतीजा केंद्र सरकार की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। हमें सजग रहना होगा।
NationPress
02/01/2026

Frequently Asked Questions

2026 में भारत का क्या राजनीतिक परिदृश्य होगा?
2026 में कई स्थानीय और क्षेत्रीय चुनाव होंगे जो राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे।
क्या जन आंदोलन फिर से शुरू होंगे?
हां, विपक्ष सरकार की नीतियों के खिलाफ जन आंदोलन को तेज कर सकता है।
भारत की विदेश नीति पर 2026 का क्या प्रभाव होगा?
भारत 2026 में कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेज़बानी करेगा, जो उसकी विदेश नीति को आकार देंगे।
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