17 जुलाई 2026
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क्या आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की किरण जिंदा है? कुलदीप सेंगर के खिलाफ फैसले पर अलका लांबा का बयान

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क्या आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की किरण जिंदा है? कुलदीप सेंगर के खिलाफ फैसले पर अलका लांबा का बयान

सारांश

क्या आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की किरण जिंदा है? जानिए कुलदीप सेंगर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या कहा अलका लांबा ने। यह मामला न केवल महिला सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि न्याय की उम्मीद भी जगाता है।

मुख्य बातें

महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
न्यायपालिका ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की है।
समाज में महिला उत्पीड़न पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 29 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत को रद्द करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई। इस पर अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की एक किरण जिंदा है।

अलका लांबा ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैं देश से अपील करती हूं कि इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाएं। बेटियों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। अंकिता भंडारी के माता-पिता भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। मैंने हाथरस पीड़िता के भाई से बात की है और वह भी इंतजार कर रहा है। आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की एक किरण जिंदा है।"

योगिता भयाना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले मौखिक रूप से संकेत दिया था। बाद में अदालत ने आधिकारिक तौर पर कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगाने का आदेश दिया है। महिला एक्टिविस्ट ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता से भी दखल देने और अपनी याचिका दायर करने के लिए कहा है।

इस मामले पर कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने कहा, "पूरा देश इस मामले को देख रहा है। हमें उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट कोई स्टैंड लेगा और यह आदेश हमें उम्मीद देता है। जो लड़की दर्द में भटक रही है, उसके जीवन में सुरक्षा और न्याय की जगह होनी चाहिए। हम प्रार्थना करते हैं कि उसे न्याय मिले और भविष्य में देश की हर लड़की को न्याय मिले।"

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया गया था।

पीड़िता के वकील ने मीडिया में बयान दिया कि इसे जीत नहीं कहा जा सकता, लेकिन हमें थोड़ी सांस लेने का समय मिला है। उन्होंने कहा, "सीबीआई ने बहुत सीमित मुद्दे पर स्टैंड लिया और हमारे सबसे मजबूत तर्कों को सामने नहीं रखा। सीबीआई ने हमसे बिल्कुल भी सलाह नहीं ली। पीड़िता के पक्ष में इतने सबूत हैं कि कोई भी कोर्ट उसके समर्थन में फैसला देगा। कोर्ट ने मुख्य बातों पर हमारी बात नहीं सुनी। सीबीआई ने केस के सिर्फ ऊपरी हिस्से पर बात की है। सीबीआई ने हमें इस केस में पार्टी भी नहीं बनाया।"

उन्होंने दोहराया कि हम इस फैसले को पीड़ित की जीत नहीं मान सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत क्यों रद्द की?
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने का निर्णय लिया क्योंकि यह मामला महिला सुरक्षा और न्याय से संबंधित है।
अलका लांबा का इस फैसले पर क्या कहना है?
अलका लांबा ने कहा कि यह कई बेटियों के लिए उम्मीद की एक किरण है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
आगे की कार्रवाई के लिए पीड़िता और उनके वकील सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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