क्या एआई से गांव की स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव आएगा: डॉ. पिंकी जोवल
सारांश
Key Takeaways
- एआई स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कर सकता है।
- फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सक्षम बनाना ज़रूरी है।
- टेलीमेडिसिन दूरदराज के मरीजों की मदद कर सकता है।
- डेटा सुरक्षा स्वास्थ्य सेवाओं की नींव है।
- मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में एआई का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
लखनऊ, १३ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर चर्चा करते हुए होटल द सेंट्रम में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन, एआई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि तकनीक का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती दे सकती है। विशेषकर, शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच के फासले को एआई के माध्यम से काफी हद तक कम किया जा सकता है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि एआई का वास्तविक लाभ तब प्राप्त होगा जब यह फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सक्षम बनाए। आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर ही गांव-गांव में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं। यदि तकनीक इनकी सहायता करे, तो इलाज समय पर और बेहतर हो सकता है।
उन्होंने टेलीमेडिसिन और रिमोट केयर को बढ़ाने पर जोर दिया ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को डॉक्टरों की सलाह आसानी से मिल सके। उन्होंने बताया कि लगभग १.८० लाख आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और चीफ हेल्थ ऑफिसर प्रदेश और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये कर्मचारी गांवों और कस्बों में लोगों से सीधे जुड़े होते हैं। एआई आधारित उपकरण ऐसे होने चाहिए जो इनके दैनिक कार्यों को सरल बनाएं, न कि बोझ बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्रों में एआई का सही उपयोग करके दूरदराज के इलाकों में भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं।
विभिन्न सत्रों में एआई समाधानों पर चर्चा हुई, जो पहले से ही काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य बीमारी की पहचान शुरुआत में करना और मरीज को सही समय पर सही अस्पताल तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को सफल बनाने के लिए विभागों के बीच सहयोग अनिवार्य है। केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों को भी मिलकर कार्य करना होगा। नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक, हर स्तर पर सहयोग होगा, तभी एआई का सही लाभ मिलेगा। इससे गांव स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक, हर जगह एक समान और बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी।
पैनल में शामिल एआई विशेषज्ञ ने कहा कि जब देश की लगभग आधी आबादी महिलाएं और बच्चे हैं, तब उनके स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। मरीज की सहमति के बिना डेटा का उपयोग नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता और विश्वास ही किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव होती है। यदि लोग सिस्टम पर भरोसा करेंगे, तभी वे नई तकनीक को अपनाएंगे।
एआई की सहायता से मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। एआई आधारित सिस्टम गर्भवती महिलाओं में खतरों के संकेत पहले ही पहचान सकते हैं। इससे आशा कार्यकर्ता समय पर महिला को अस्पताल पहुंचा सकती हैं। गांव स्तर पर त्वरित पहचान और सही रेफरल से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।