क्या गुणवत्ता एक जिम्मेदारी और प्रतिस्पर्धात्मक ताकत है? : प्रल्हाद जोशी
सारांश
Key Takeaways
- गुणवत्ता एक जिम्मेदारी और प्रतिस्पर्धात्मक ताकत है।
- उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए गुणवत्ता आवश्यक है।
- 'मेक इन इंडिया' का मतलब उच्च गुणवत्ता और वैश्विक भरोसा होना चाहिए।
- शून्य दोष, शून्य प्रभाव नीति पर्यावरण की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- बीआईएस की भूमिका विश्व स्तर पर भारतीय उत्पादों का भरोसा बढ़ाना है।
नई दिल्ली, ६ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि गुणवत्ता न केवल एक जिम्मेदारी है, बल्कि यह एक मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक ताकत भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानक गुणवत्ता को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं की सुरक्षा, व्यापार को आसान बनाना, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत आवश्यक हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के ७९वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि मानक गुणवत्ता और भरोसे की पहचान होते हैं, जो भारतीय उत्पादों को घरेलू और वैश्विक दोनों स्तर पर प्रतिस्पर्धा में मदद देते हैं।
मंत्री ने कहा कि गुणवत्ता से जुड़े मजबूत नियम उपभोक्ताओं की सुरक्षा करते हैं, प्रशासन को बेहतर बनाते हैं, और व्यापारियों के लिए कार्य को सरल और विश्वसनीय बनाते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शासन, सेवाओं, और उत्पादन में गुणवत्ता पर बल दिया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि मेक इन इंडिया का अर्थ उच्च गुणवत्ता और वैश्विक भरोसा होना चाहिए।
प्रल्हाद जोशी ने सरकार की 'शून्य दोष, शून्य प्रभाव' नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसका अर्थ है कि अच्छे और दोषरहित उत्पाद बनाए जाएं ताकि पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।
उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार, उद्योग, मानक बनाने वाली संस्थाएं और उत्पादक सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का बड़ा लक्ष्य है कि 'मेक इन इंडिया' को 'ट्रस्टेड बाय इंडिया' और 'ट्रस्टेड बाय द वर्ल्ड' बनाया जाए। इस दिशा में बीआईएस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो मानकों को मजबूत करके, नए विचारों को बढ़ावा देकर और भारतीय उत्पादों पर विश्व का भरोसा बढ़ाकर इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।