बरसाना में लठामार होली: नंदगांव के हुरियारों पर प्रेम की बौछार

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बरसाना में लठामार होली: नंदगांव के हुरियारों पर प्रेम की बौछार

सारांश

बरसाना में लठामार होली का महापर्व मनाया गया, जहां प्रेम की लाठियों के साथ रंगों की बौछार हुई। लाखों श्रद्धालुओं ने इस अद्वितीय परंपरा का आनंद लिया।

Key Takeaways

  • बरसाना में लठामार होली की परंपरा 5000 साल पुरानी है।
  • यह उत्सव राधा-कृष्ण के प्रेम की अभिव्यक्ति है।
  • सुरक्षा के लिए 4500 पुलिसकर्मी लगाए गए थे।
  • श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने इस महापर्व को भव्य बना दिया।
  • हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा ने आयोजन को और भी दिव्य बनाया।

मथुरा, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। राधा रानी की धाम बरसाना ने बुधवार को पूरी तरह से 'रंगोत्सव' की खुशियों में डूबा हुआ देखा गया। शाम करीब पांच बजे विश्व प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन किया गया, जिसमें नंदगांव के हुरियारों पर बरसाने की हुरियारिनों ने प्रेम की लाठियां बरसाईं। छतों से लेकर सड़कों तक हर जगह अबीर-गुलाल से रंगी हुई थी और हर ओर राधा-कृष्ण के जयकारे गूंज रहे थे।

योगी सरकार ने 'रंगोत्सव 2026' को विशेष रूप से भव्य बनाने के लिए कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस अद्वितीय होली का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब बरसाना में उमड़ पड़ा।

नंदगांव के हुरियारों का प्रिया कुंड पर भव्य स्वागत किया गया। बरसाना के लोग कृष्ण के सखाओं को दामाद मानते हैं, इसलिए उन्हें मिठाई, पकोड़े, ठंडाई और भांग का आनंद दिया गया। इसके बाद हुरियारों ने अपनी पाग (पगड़ी) बांधी और ब्रह्मांचल पर्वत स्थित श्री लाडली किशोरी जी के मंदिर जाकर राधा रानी से होली खेलने की अनुमति ली।

इस अद्भुत क्षण को और भी दिव्य बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से हुरियारों और श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई। दर्शन के बाद, शाम करीब चार बजे हुरियारे रंगीली गली पहुंचे। यहां ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक ब्रज रसिया और होली गीत गाकर उन्होंने हुरियारिनों का मन मोह लिया। इसके जवाब में महिलाओं ने मजाकिया अंदाज में उन पर लाठियों से वार किया, जिससे पुरुषों ने चमड़े की मजबूत ढाल से खुद को सुरक्षित किया।

ऐसा माना जाता है कि यह परंपरा 5000 साल पुरानी है, जब भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी और उनकी सखियों को चिढ़ाने आए थे, तब सखियों ने उन्हें लाठियों से खदेड़ा था। ब्रज में होली बसंत पंचमी से शुरू होकर 45 दिनों तक चलती है, और इसका सबसे बड़ा आकर्षण लठामार होली ही है। इस अद्भुत दृश्य और आनंद को देखकर श्रद्धालु और मंदिर के सेवायत भाव-विभोर हो गए।

श्रद्धालु भारती ने कहा कि मैंने जीवन में पहली बार ऐसी होली देखी है। लाठियों की मार में भी जो प्रेम और भक्ति का भाव है, वह केवल ब्रज में ही अनुभव किया जा सकता है। ऐसा लग रहा है मानो साक्षात कान्हा यहाँ होली खेल रहे हों। श्रद्धालु स्वाति ने कहा कि योगी सरकार द्वारा की गई व्यवस्था बेहतरीन है। इतनी भीड़ के बावजूद प्रशासन का प्रबंधन शानदार था। आसमान से जब हेलीकॉप्टर से फूल बरसे, तो हमारा मन आनंद से भर गया।

नंदबाबा मंदिर के मुख्य पुजारी मनीष गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव और बरसाना का यह संबंध द्वापर युग से चला आ रहा है। ये लाठियां चोट नहीं पहुंचातीं, बल्कि यह राधा-कृष्ण के निश्छल प्रेम और मनुहार का प्रतीक हैं। आज पूरा ब्रज इसी प्रेम रस में डूबा हुआ है।

लाखों की भीड़ को देखते हुए योगी सरकार के निर्देश पर मथुरा पुलिस ने सुरक्षा का बेहद कड़ा इंतजाम किया था। 4500 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी और एंटी रोमियो स्क्वायड की टीमें चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहीं।

इसके अलावा जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार स्वयं बरसाना की गलियों में पैदल भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे, जिससे यह महा आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हुआ।

Point of View

बल्कि यह प्रेम और भक्ति का एक अनूठा उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस महापर्व को और भी भव्य बना दिया।
NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

लठामार होली का इतिहास क्या है?
यह परंपरा 5000 साल पुरानी है, जब भगवान कृष्ण ने राधा रानी और उनकी सखियों को चिढ़ाने का प्रयास किया था।
बरसाना में इस होली का महत्व क्या है?
बरसाना में लठामार होली राधा-कृष्ण के प्रेम की अभिव्यक्ति है और यह ब्रज क्षेत्र की खासियत है।
इस वर्ष कितने श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल हुए?
इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं ने इस अद्वितीय उत्सव में भाग लिया।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए गए थे?
योगी सरकार के निर्देश पर 4500 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों ने सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया।
क्या इस आयोजन में कुछ विशेष गतिविधियाँ हुईं?
हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और पारंपरिक ब्रज रसिया ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया।
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