क्या इंडी गठबंधन लोकतंत्र के लिए खतरा है? मोदी बनाम बिखरा विपक्ष : डॉ. सुधांशु त्रिवेदी
सारांश
Key Takeaways
- इंडी गठबंधन विपक्ष की कमजोरी को दर्शाता है।
- भाजपा ने विभिन्न राज्यों में सफलता हासिल की है।
- डॉ. त्रिवेदी के अनुसार, विपक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर हमला कर रहा है।
लखनऊ, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज देश की राजनीति दो स्पष्ट विकल्पों के बीच खड़ी है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास, सामाजिक समरसता और मजबूत लोकतंत्र है, वहीं दूसरी ओर विफल, बिखरा और लोकतंत्र विरोधी ‘इंडी गठबंधन’ है।
उन्होंने शनिवार को लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान विपक्षी दलों पर संविधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में हुए नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम यह दर्शाते हैं कि भाजपा देशभर में अपनी जड़ें मजबूत कर रही है, जबकि विपक्ष लगातार कमजोर होता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली के बाद केरल के नगर निगम चुनावों में भाजपा ने महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज की और तिरुवनंतपुरम में पहली बार भाजपा का मेयर बना। इसके साथ ही 40 वर्षों से चल रहे कम्युनिस्ट शासन का अंत हुआ। महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में भी भाजपा ने अद्भुत सफलता प्राप्त की, जिससे विपक्षी दलों की हताशा और बौखलाहट खुलकर सामने आ रही है।
भाजपा सांसद ने कहा कि चुनावी हार से कुंठित विपक्षी दल अब लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बीएलओ अशोक चंद्र दास की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पत्नी की शिकायत है कि उन पर दबाव बनाया जा रहा था कि संदिग्ध मतदाताओं के नाम न हटाए जाएं। यह घटना दर्शाती है कि इंडी गठबंधन की सरकारों को पारदर्शी लोकतंत्र में विश्वास नहीं है।
डॉ. त्रिवेदी ने पंजाब में मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई और एफआईआर को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल खबरों के कारण मीडिया पर छापेमारी और दमन की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हैं।
उन्होंने तमिलनाडु में न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और न्यायाधीशों को भयभीत करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रवैया संविधान की आत्मा पर सीधा हमला है। पश्चिम बंगाल में उच्च न्यायालय को अशांत माहौल के कारण सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। यह स्थिति भी बेहद चिंताजनक है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि इंडी गठबंधन केवल नाममात्र का एक गठबंधन है, जिसका संसद के पटल पर कोई अस्तित्व नहीं है। एनडीए ने अपने नेता का विधिवत चयन कर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति को सूचना दी है, जबकि इंडी गठबंधन ऐसा करने में असफल रहा है। उन्होंने बताया कि 2025 के बाद दिल्ली, केरल और महाराष्ट्र में यह गठबंधन अलग-अलग चुनाव लड़ेगा।
डॉ. त्रिवेदी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से सवाल किया कि क्या उत्तर प्रदेश में अब भी इंडी गठबंधन का कोई अस्तित्व बचा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई और पटना के अनुभवों के बाद जनता जानना चाहती है कि यह गठबंधन अब जीवित है या पूरी तरह समाप्त हो चुका है। एसआईआर को लेकर अखिलेश यादव के बयानों पर कटाक्ष करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि उनके बयान विरोधाभासी और भ्रमित करने वाले हैं। कभी वे वोट जुड़ने की बात करते हैं, तो कभी कटने की। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब देख और समझ रही है।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज जनता को यह तय करना है कि वह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में निखरता हुआ भारत चाहती है या फिर आपसी टकराव, तुष्टीकरण और अराजकता की राजनीति करने वाला बिखरा हुआ विपक्ष। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून व्यवस्था और विकास के नए मानक स्थापित हुए हैं, जबकि विपक्ष का अतीत प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है। नाम बदल लेने से चरित्र नहीं बदलता और इंडी गठबंधन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।