क्या केंद्र सरकार के इशारे पर छापे मार रही है ईडी? : नाना पटोले

सारांश
Key Takeaways
- ईडी की छापेमारी से राजनीतिक तनाव बढ़ा है।
- नाना पटोले का आरोप है कि ईडी केंद्र के इशारे पर काम कर रही है।
- अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
- संस्थाओं का दुरुपयोग लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखना सभी का कर्तव्य है।
नागपुर, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सौरभ भारद्वाज के निवास पर ईडी ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई एक अस्पताल निर्माण परियोजना में कथित अनियमितताओं को लेकर की गई है। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने इस पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि ईडी केंद्र के इशारे पर कार्य कर रही है।
नाना पटोले ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को राजनीतिक प्रेरणा पर कार्रवाई करने को लेकर कई बार फटकार लगाई है। इसके बावजूद, ईडी केंद्र के इशारे पर कार्यरत है, जिससे इसकी विश्वसनीयता कम हो रही है। संस्थाओं का दुरुपयोग उचित नहीं है।
उन्होंने भारत पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को लेकर कहा कि इससे देश में महंगाई बढ़ेगी, लोगों की नौकरियाँ जाएँगी और बेरोजगारी बढ़ेगी। मीडिया के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री से बात करना चाहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री उनसे बात नहीं करना चाह रहे हैं, जिससे जनता को कठिनाई होगी। केंद्र सरकार को टैरिफ समस्या का समाधान निकालने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर नाना पटोले ने कहा कि समस्या यह है कि आरएसएस और भाजपा इतिहास को कैसे विकृत करते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों जैसे मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, और सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता की लड़ाई में अपार योगदान दिया है। मोहन भागवत को देश की सीमाओं के बारे में भी बात करनी चाहिए और चीन और पाकिस्तान पर चर्चा करनी चाहिए।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के 'वोटर अधिकार यात्रा' में शामिल होने पर कहा कि सभी नेता राहुल गांधी द्वारा उठाई गई आवाज का समर्थन कर रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था को जीवित रखना सभी का कर्तव्य है, लेकिन जिस तरह से भाजपा चुनाव आयोग के साथ वकालत कर रही है, वह देश और लोकतंत्र के साथ बड़ा विश्वासघात है।