क्या मंदिरों की सुरक्षा राजा का धर्म है? पीएम मोदी के नेतृत्व में लौट रहा सनातन वैभव: महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश
सारांश
Key Takeaways
- मंदिरों की सुरक्षा शासक का धर्म है।
- सोमनाथ का विध्वंस हिंदू समाज की पहचान का हिस्सा है।
- पीएम मोदी के नेतृत्व में संस्कृतिक धरोहर की रक्षा हो रही है।
हरिद्वार, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हरिद्वार के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने सोमनाथ विध्वंस के 1,000 वर्षों के पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्ट पर अपनी खुशी का इज़हार किया। उन्होंने कहा कि यह हिंदू समाज के लिए एक गर्व का पल है कि देश में हिंदूवादी सरकार का शासन है।
महामंडलेश्वर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भारत की सनातन परंपरा में मंदिरों की सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण शासक का एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है। उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा मंदिरों के संरक्षण और पुनर्निर्माण कार्यों की सराहना की।
उन्होंने आगे कहा कि आज देश उसी परंपरा की ओर लौट रहा है, जहाँ प्रजा और उसके धर्म की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
महामंडलेश्वर ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख किया और कहा कि लगभग एक हजार वर्ष पूर्व महमूद गजनवी ने इसका विध्वंस किया था, लेकिन अब हिंदू समाज के लिए यह गर्व का विषय है कि देश में एक हिंदूवादी सरकार है। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सुरक्षा, हिंदू समाज की रक्षा, और धार्मिक स्थलों पर हमलों को रोकना राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री वर्तमान समय के 'राजा' हैं, जिनका धर्म प्रजा और उसके विश्वास की रक्षा करना है, और इसी कारण उन्होंने पीएम मोदी को इस कार्य के लिए बधाई दी।
महामंडलेश्वर ने कहा कि पीएम मोदी ने इन मंदिरों के पुनर्निर्माण में काफी काम किया है। काशी विश्वनाथ, अयोध्या का राम मंदिर, महाकाल का कॉरिडोर, सोमनाथ का कॉरिडोर, और द्वारका का कॉरिडोर बनाना प्रशंसा के योग्य एवं महत्वपूर्ण है। ये घटनाएँ इतिहास में दर्ज होंगी और हमेशा याद की जाएँगी। महमूद गजनवी ने हिंदुओं का कत्लेआम किया, यह खून से लिखा इतिहास है, जिसे हिंदू समाज कभी नहीं भूल सकता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनरुत्थान की अद्भुत कहानी को स्मरण किया है, जो भारत की सभ्यतागत चेतना को परिभाषित करती है।