17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या सामाजिक मुद्दे पर जातिगत बैठक करना सही है: संजय निषाद?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या सामाजिक मुद्दे पर जातिगत बैठक करना सही है: संजय निषाद?

सारांश

क्या जातिगत बैठकों पर रोक सही है? संजय निषाद का कहना है कि सामाजिक मुद्दों पर चर्चा आवश्यक है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।

मुख्य बातें

सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए जातिगत बैठकें आवश्यक हैं।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच संजय निषाद का समर्थन।
जातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकत्र होना जरूरी है।

आगरा, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष पंकज चौधरी ने राज्य में जातिगत सम्मेलन पर रोक लगा दी है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच, निषाद पार्टी के संयोजक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने गुरुवार को कहा कि सामाजिक मुद्दों पर जातीय बैठक करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

संजय निषाद ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "देश में जाति प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था है। जातियों के आधार पर कानून बनाकर कई जातियों की ज़मीनें छीनी गई हैं। 80 प्रतिशत निषाद भूमिहीन हैं। ऐसी 578 जातियों को 74 प्रकार की व्यवस्था देकर विकास की मुख्यधारा में लाया जा रहा है। अगर ऐसी जाति एकत्रित नहीं होगी तो उन्हें अधिकार कैसे मिलेगा?"

उन्होंने कहा, "जो संविधान में अनुसूचित जाति का आरक्षण मिला है, अगर उसमें मिल्कमैन ने 27 और लेदर मैन ने 23 पर कब्जा कर लिया, तो बाकी कहां जाएंगे? पार्टी का नियम होता है। पार्टी के नियम के अनुसार जो सदस्य बन गया, उसे पार्टी के अनुसार कार्य करना होता है। उसे यह लिखकर देना होता है कि वह पार्टी के हर एक नियम को मानेगा।"

संजय निषाद ने कहा, "हमारे जाति के लोग पीड़ित हैं, ऐसे में पहले उनकी बैठक होती है। बाकी अन्य जाति के लोग, जो उनकी पीड़ा को दूर करने आते हैं, उनकी भी बैठक होती है। अगर भाजपा अपने नियम के अनुसार कार्य करती है, तो प्रदेश अध्यक्ष के बयान का मैं समर्थन करता हूं।"

उन्होंने कहा, "आज के दिन भाजपा के जो भी अंग या समर्थक हैं, वे अपने नियम के अनुसार अपने अध्यक्ष के माध्यम से कार्य करते हैं। हर जाति को अपने सुख-दुख बांटने का अधिकार है। अगर ब्राह्मण इकट्ठे हो गए तो उस पर दुख नहीं व्यक्त करना चाहिए, हालांकि उस पर राजनीतिकरण भी नहीं होना चाहिए। सुख-दुख बांटना है, अपनी चेतना इकट्ठा करनी है, तो बैठक आवश्यक है। शिक्षा, रोजगार, शादी-विवाह समाज में ही होते हैं। ऐसे में अगर बैठक नहीं होगी तो कैसे काम चलेगा? ऐसे में सामाजिक बैठक करने की छूट होनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हम समाज के सभी वर्गों के मुद्दों को समझें और उनकी आवाज़ को महत्वपूर्ण मानें। जातिगत बैठकों का आयोजन सामाजिक न्याय की दिशा में एक कदम हो सकता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जातिगत बैठकों की आवश्यकता क्यों है?
जातिगत बैठकें सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने और समुदाय के सदस्यों के अधिकारों के लिए आवश्यक हैं।
क्या जातिगत सम्मेलन को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है?
कुछ लोग मानते हैं कि जातिगत सम्मेलन राजनीतिक मुद्दों से जुड़ सकते हैं, लेकिन यह सामाजिक न्याय के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले