क्या सामाजिक मुद्दे पर जातिगत बैठक करना सही है: संजय निषाद?
सारांश
Key Takeaways
- सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए जातिगत बैठकें आवश्यक हैं।
- राजनीतिक बयानबाजी के बीच संजय निषाद का समर्थन।
- जातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकत्र होना जरूरी है।
आगरा, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष पंकज चौधरी ने राज्य में जातिगत सम्मेलन पर रोक लगा दी है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच, निषाद पार्टी के संयोजक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने गुरुवार को कहा कि सामाजिक मुद्दों पर जातीय बैठक करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
संजय निषाद ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "देश में जाति प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था है। जातियों के आधार पर कानून बनाकर कई जातियों की ज़मीनें छीनी गई हैं। 80 प्रतिशत निषाद भूमिहीन हैं। ऐसी 578 जातियों को 74 प्रकार की व्यवस्था देकर विकास की मुख्यधारा में लाया जा रहा है। अगर ऐसी जाति एकत्रित नहीं होगी तो उन्हें अधिकार कैसे मिलेगा?"
उन्होंने कहा, "जो संविधान में अनुसूचित जाति का आरक्षण मिला है, अगर उसमें मिल्कमैन ने 27 और लेदर मैन ने 23 पर कब्जा कर लिया, तो बाकी कहां जाएंगे? पार्टी का नियम होता है। पार्टी के नियम के अनुसार जो सदस्य बन गया, उसे पार्टी के अनुसार कार्य करना होता है। उसे यह लिखकर देना होता है कि वह पार्टी के हर एक नियम को मानेगा।"
संजय निषाद ने कहा, "हमारे जाति के लोग पीड़ित हैं, ऐसे में पहले उनकी बैठक होती है। बाकी अन्य जाति के लोग, जो उनकी पीड़ा को दूर करने आते हैं, उनकी भी बैठक होती है। अगर भाजपा अपने नियम के अनुसार कार्य करती है, तो प्रदेश अध्यक्ष के बयान का मैं समर्थन करता हूं।"
उन्होंने कहा, "आज के दिन भाजपा के जो भी अंग या समर्थक हैं, वे अपने नियम के अनुसार अपने अध्यक्ष के माध्यम से कार्य करते हैं। हर जाति को अपने सुख-दुख बांटने का अधिकार है। अगर ब्राह्मण इकट्ठे हो गए तो उस पर दुख नहीं व्यक्त करना चाहिए, हालांकि उस पर राजनीतिकरण भी नहीं होना चाहिए। सुख-दुख बांटना है, अपनी चेतना इकट्ठा करनी है, तो बैठक आवश्यक है। शिक्षा, रोजगार, शादी-विवाह समाज में ही होते हैं। ऐसे में अगर बैठक नहीं होगी तो कैसे काम चलेगा? ऐसे में सामाजिक बैठक करने की छूट होनी चाहिए।