क्या संघ भाजपा अध्यक्ष के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

Click to start listening
क्या संघ भाजपा अध्यक्ष के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

सारांश

डॉ. मोहन भागवत ने भाजपा और संघ के बीच के संबंधों को स्पष्ट करते हुए कहा कि संघ केवल सलाह दे सकता है, निर्णय नहीं। क्या संघ भाजपा अध्यक्ष के चयन में भूमिका निभाता है? जानें इस रोचक चर्चा में।

Key Takeaways

  • आरएसएस भाजपा के निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करता है।
  • भाजपा अपनी आंतरिक मामलों में स्वतंत्र है।
  • संघ केवल सुझाव देने का कार्य करता है।
  • भाजपा और संघ के बीच विश्वास का रिश्ता है।
  • संघ और भाजपा में मुद्दों पर मतभेद स्वाभाविक हैं।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने गुरुवार को इस धारणा को खारिज कर दिया कि आरएसएस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निर्णयों में हस्तक्षेप करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी सरकार और आंतरिक मामलों को स्वतंत्रता से चलाती है।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'आरएसएस शताब्दी व्याख्यान श्रृंखला- संघ की यात्रा के 100 वर्ष: नए क्षितिज' के तीसरे दिन बोलते हुए, भागवत ने कहा कि संघ केवल सुझाव दे सकता है, लेकिन भाजपा के निर्णय लेने की प्रक्रिया में कभी भी हस्तक्षेप नहीं करता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धारणा कि सब कुछ संघ तय करता है, पूरी तरह से गलत है। मैं 50 सालों से शाखा चला रहा हूं। यदि कोई शाखा के बारे में सलाह देता है तो मैं सुनूंगा, क्योंकि मैं इस क्षेत्र में विशेषज्ञ हूं। भाजपा देश चला रही है, और वे इसमें विशेषज्ञ हैं। आरएसएस केवल सलाह दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा भाजपा के नेतृत्व का होता है।

भाजपा के आंतरिक चुनावों में हो रही देरी पर भागवत ने चुटकी लेते हुए कहा, "यदि हम सब कुछ तय कर रहे होते, तो क्या इसमें इतना समय लगता? हम निर्णय नहीं लेते हैं।"

सरकार और संघ के संबंधों पर भागवत ने कहा कि संघ दोनों केंद्र और राज्य प्रशासन के साथ अच्छे समन्वय स्थापित करता है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का हो। हालांकि, उन्होंने भारत की शासन प्रणाली में मौजूद आंतरिक विरोधाभासों की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा, "कुर्सी पर बैठा व्यक्ति हमारे लिए पूरी तरह से तैयार हो सकता है, लेकिन उसे विभिन्न बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वह सफल हो सकता है या नहीं। हम उसे स्वतंत्रता देते हैं।"

भागवत ने संघर्ष के उदाहरण देते हुए ट्रेड यूनियनों और सरकार के बीच मतभेदों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे विरोधाभास स्वाभाविक हैं। हमारे स्वयंसेवक ईमानदारी से काम करते हैं और यदि परिणाम अच्छे होते हैं, तो सभी उसे स्वीकार करते हैं।

मोहन भागवत ने दोहराया कि संघ और भाजपा एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं, लेकिन मुद्दों पर मतभेद होना स्वाभाविक है। "हम सच्चाई को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें संघर्ष भी शामिल है, लेकिन इसका मतलब झगड़ा नहीं है।"

Point of View

मैं यह मानता हूं कि संघ और भाजपा के बीच संबंधों की स्पष्टता आवश्यक है। भागवत का बयान यह संकेत देता है कि भाजपा अपनी राजनीति में स्वतंत्र है, जो लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्या आरएसएस भाजपा के निर्णयों में हस्तक्षेप करता है?
नहीं, डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस केवल सुझाव दे सकता है, लेकिन भाजपा अपने निर्णय खुद लेती है।
भाजपा के आंतरिक चुनावों में देरी का कारण क्या है?
भागवत ने कहा कि यदि संघ सब कुछ तय कर रहा होता, तो इसमें इतना समय नहीं लगता।