क्या हिमाचल में छात्र की मृत्यु के मामले में यूजीसी ने जांच शुरू की?

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क्या हिमाचल में छात्र की मृत्यु के मामले में यूजीसी ने जांच शुरू की?

सारांश

हिमाचल प्रदेश में एक छात्र की मृत्यु के मामले में यूजीसी द्वारा गठित फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में संभावित कर्तव्य-लोप और छात्र सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जाएगी। यूजीसी ने दोषियों को सख्त सजा देने का आश्वासन दिया है। क्या यह कदम छात्र सुरक्षा को और मजबूत करेगा?

Key Takeaways

  • यूजीसी ने छात्र की मृत्यु के मामले में जांच शुरू की है।
  • फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी में पांच सदस्यों को शामिल किया गया है।
  • कॉलेज प्रशासन की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुझाव दिए जाएंगे।
  • छात्र सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने धर्मशाला के सरकारी डिग्री कॉलेज में एक छात्र की दुखद मृत्यु को अत्यंत गंभीरता से लिया है। इस प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान के लिए यूजीसी ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। यह समिति घटना के दौरान हुए संभावित कर्तव्य-लोप, छात्र सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन और कॉलेज प्रशासन की भूमिका की विस्तृत समीक्षा करेगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुझाव भी देगी।

यूजीसी के अनुसार, फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी में पांच सदस्यों को शामिल किया गया है। गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. राजकुमार मित्तल कमेटी के अध्यक्ष बनाए गए हैं। प्रो. सुषमा यादव और गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद की कुलपति, डॉ. नीरजा गुप्ता भी इस कमेटी की सदस्य हैं। प्रो. पी. प्रकाश बाबू, कुलपति, पांडिचेरी विश्वविद्यालय भी कमेटी के सदस्य हैं।

यूजीसी की संयुक्त सचिव, डॉ. सुनीता सिवाच इस कमेटी की समन्वय अधिकारी बनाई गई हैं। यूजीसी इस घटना पर गंभीरता से नजर रख रहा है। दरअसल, यूजीसी की एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन ने मीडिया में आए रिपोर्टों का संज्ञान लिया है, जिसके आधार पर सुओ-मोटो शिकायत दर्ज की गई है।

रिपोर्टों में रैगिंग के चलते छात्र द्वारा आत्महत्या की आशंका जताई गई थी, जबकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि मृत्यु का मामला है। पुलिस जांच भी जारी है। इस बीच, यूजीसी ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है और स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

यूजीसी का कहना है कि छात्र सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही, यूजीसी ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र कल्याण और सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह धर्मशाला के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में 26 दिसंबर 2025 को एक छात्र की मौत से जुड़ा मामला है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को गंभीरता से लेते हुए यूजीसी ने इसकी जांच के लिए यह फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है।

गौरतलब है कि यूजीसी उच्च शिक्षा संस्थानों का नियामक निकाय है। इस घटना पर यूजीसी का कहना है कि यह समिति घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। घटना के हालात, कॉलेज के अधिकारियों द्वारा हुई संभावित लापरवाही या कर्तव्य-लोप की जांच की जाएगी। साथ ही उन लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी जो किसी भी तरह इस मामले में जिम्मेदार हो सकते हैं।

यूजीसी की यह समिति छात्र कल्याण और सुरक्षा से संबंधित नियमों के अनुपालन की भी जांच करेगी। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव भी देगी। यूजीसी के मुताबिक उनके लिए छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च है और जांच के बाद उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Point of View

यह घटना हमारे समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, और यह आवश्यक है कि सभी उच्च शिक्षा संस्थान इस दिशा में ठोस कदम उठाएं। यूजीसी का यह कदम महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे केवल एक कदम के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे दीर्घकालिक सुधारों की शुरुआत के रूप में मानना चाहिए।
NationPress
04/01/2026

Frequently Asked Questions

यूजीसी ने किस कारण से फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया?
यूजीसी ने धर्मशाला के सरकारी डिग्री कॉलेज में एक छात्र की दुखद मृत्यु के मामले में सभी पहलुओं की जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है।
कमेटी में कौन-कौन से सदस्य शामिल हैं?
कमेटी में पांच सदस्य हैं, जिनमें प्रो. राजकुमार मित्तल, प्रो. सुषमा यादव, डॉ. नीरजा गुप्ता, प्रो. पी. प्रकाश बाबू और डॉ. सुनीता सिवाच शामिल हैं।
क्या कॉलेज प्रशासन ने आत्महत्या की आशंका को खारिज किया है?
हाँ, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि मृत्यु का मामला है।
यूजीसी ने इस मामले में क्या सुनिश्चित किया है?
यूजीसी ने कहा है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और छात्र सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
इस घटना के बाद क्या कदम उठाए जाएंगे?
जांच पूरी होने के बाद, यूजीसी कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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