18 अगस्त 2026
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लखीसराय भगदड़: प्रशांत किशोर बोले — 7 मौतों के बाद भी एक भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं

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लखीसराय भगदड़: प्रशांत किशोर बोले — 7 मौतों के बाद भी एक भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं

सारांश

लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में भगदड़ से 7 मौतों के बाद जन सुराज नेता प्रशांत किशोर पीड़ितों से मिले और सीधा सवाल दागा — डीएम से लेकर कॉन्स्टेबल तक एक भी अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं? सावन में भीड़ की जानकारी होने के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर उन्होंने बिहार की 'मुआवजे से मामला बंद' संस्कृति को भी आड़े हाथ लिया।

मुख्य बातें

जन सुराज नेता प्रशांत किशोर ने 18 अगस्त 2026 को लखीसराय के भगदड़ पीड़ितों से मुलाकात की।
अशोकधाम मंदिर भगदड़ में 7 लोगों की मौत हुई; हलसी में एक ही परिवार के 3 सदस्यों की मृत्यु की सूचना।
किशोर के अनुसार, डीएम, एसपी, एसडीएम, डीएसपी या थानेदार — किसी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सहनी परिवार के 4 घायलों सहित कई पीड़ितों ने सरकारी अस्पताल की व्यवस्था अपर्याप्त बताई।
किशोर ने मांग की कि मुआवजे के साथ-साथ दोषी अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई हो।

जन सुराज के सूत्रधार और विधायक प्रशांत किशोर ने 18 अगस्त 2026 को लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में हुई भगदड़ के पीड़ित परिवारों और घायलों से मुलाकात की और प्रशासनिक विफलता पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 7 लोगों की जान जाने के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी या पुलिसकर्मी पर कोई जवाबदेही तय नहीं की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद मीडिया को बताया कि प्रथम दृष्टया प्रशासन ने भीड़ की गंभीरता को देखते हुए जो संवेदनशीलता और सतर्कता दिखानी चाहिए थी, वह नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में अशोकधाम मंदिर में हर सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है — यह तथ्य प्रशासन को पहले से ज्ञात था। इसके बावजूद न पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया, न भीड़ प्रबंधन की कोई ठोस योजना बनाई गई।

जवाबदेही पर सवाल

किशोर ने कहा, 'सात लोगों की जान गई है। अभी तक किसी प्रशासनिक अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। डीएम, एसपी, एसडीएम, डीएसपी या थानेदार — किसी पर जवाबदेही तय नहीं हुई। एक हवलदार या कॉन्स्टेबल तक निलंबित नहीं हुआ है।' उन्होंने यह भी कहा कि जांच के आदेश दे देना खानापूर्ति है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि जांच कौन कर रहा है, किन अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी और किसकी जवाबदेही तय की जाएगी।

मुआवजे पर आपत्ति

किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार में दुर्घटनाओं के बाद कुछ मुआवजा देकर मामले को बंद मान लेने की प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलना उनका अधिकार है, परंतु केवल आर्थिक सहायता देने से सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। उन्होंने कहा, 'सरकार गलती करे, जनता कष्ट उठाए और फिर जनता के पैसे से मुआवजा बांटकर अपनी जवाबदेही पूरी मान ली जाए — यह उचित नहीं है।'

घायलों के इलाज की स्थिति

किशोर ने घायलों के उपचार की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कई घायल सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से असंतुष्ट होकर अपने घरों या निजी अस्पतालों में चले गए। उन्होंने बताया कि एक गांव में सहनी परिवार के 4 घायलों से मुलाकात हुई, जिन्होंने अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं न होने की बात कही। एक निजी अस्पताल में भर्ती घायलों से भी उन्होंने मुलाकात की और पाया कि उन्हें अब तक कोई ठोस सरकारी सहायता नहीं मिली है।

आगे की योजना

किशोर ने कहा कि वे हलसी भी जाएंगे, जहां से एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत की सूचना मिली है। वहां प्रभावित परिवार से मुलाकात के बाद वे अतिरिक्त जानकारी सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने मांग की कि मुआवजे के साथ-साथ दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और घायलों के उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए — ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

और प्रशासन को इसकी जानकारी थी। प्रशांत किशोर का यह सवाल कि एक भी अधिकारी निलंबित क्यों नहीं हुआ, बिहार में आपदा-प्रबंधन की उस पुरानी विफलता को उजागर करता है जहाँ जवाबदेही की जगह मुआवजे से काम चलाया जाता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राज्य में धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन की कमी जानलेवा साबित हुई हो। जब तक दोषी अधिकारियों पर दृष्टांत-स्थापित करने वाली कार्रवाई नहीं होती, 'जांच के आदेश' महज एक औपचारिकता बने रहेंगे।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखीसराय अशोकधाम मंदिर भगदड़ में कितने लोगों की मौत हुई?
भगदड़ में 7 लोगों की मौत हुई है। हलसी क्षेत्र से एक ही परिवार के 3 सदस्यों की मृत्यु की भी सूचना है, जिनसे मिलने प्रशांत किशोर जाने वाले हैं।
प्रशांत किशोर ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाए?
प्रशांत किशोर ने कहा कि सावन में भारी भीड़ की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त पुलिस तैनाती और भीड़ प्रबंधन की योजना नहीं बनाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि 7 मौतों के बाद डीएम, एसपी, एसडीएम, डीएसपी या किसी भी थानेदार पर कोई जवाबदेही तय नहीं की गई है।
घायलों को सरकारी सहायता मिली या नहीं?
प्रशांत किशोर के अनुसार, घायलों को अब तक कोई ठोस सरकारी सहायता नहीं मिली है। कई घायल सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से असंतुष्ट होकर निजी अस्पतालों या घरों में चले गए।
प्रशांत किशोर की मांगें क्या हैं?
किशोर ने मांग की है कि मृतकों के परिजनों को मुआवजे के साथ-साथ दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई हो। साथ ही, घायलों के उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जांच के आदेश पर प्रशांत किशोर का क्या कहना है?
किशोर ने कहा कि केवल जांच का आदेश देना खानापूर्ति है। यह स्पष्ट नहीं है कि जांच कौन कर रहा है, किन अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी और अंततः किसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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