क्या डाक विभाग ने 'लालबागचा राजा' के नाम विशेष पोस्टकार्ड जारी किया है?

सारांश
Key Takeaways
- लालबागचा राजा गणेश मंडल का 92वां गणेशोत्सव मनाया जा रहा है।
- भगवान तिरुपति बालाजी की थीम पर मंडप सजाया गया है।
- इस बार ५,००० स्वयंसेवक भक्तों की सेवा में हैं।
- डाक विभाग ने विशेष पोस्टकार्ड जारी किया है।
- भक्तों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
मुंबई, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई का प्रसिद्ध लालबागचा राजा गणेश मंडल ने इस वर्ष अपने ९२वें गणेशोत्सव का धूमधाम से आरंभ किया है। हर साल की तरह, इस बार भी मंडल ने भक्तों को बाप्पा की पहली झलक देकर उत्सव की शुरुआत की। इस वर्ष की थीम और व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं का मन मोह लेती हैं।
मंडल के अध्यक्ष बालासाहेब कांबले ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि इस वर्ष मंडप को भगवान तिरुपति बालाजी की थीम पर सजाया गया है। मंडप का दृश्य एक स्वर्ण महल जैसा प्रतीत होता है, जिसे विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
कांबले ने कहा, "यह लालबागचा राजा का ९२वां वर्ष है। आज हमने पूरी दुनिया को सबसे पहले बाप्पा के दर्शन कराए हैं। इस बार की मूर्ति में भक्ति और आस्था का अनोखा भाव देखने को मिल रहा है, जो श्रद्धालुओं में विशेष ऊर्जा और श्रद्धा का संचार कर रहा है।"
हर साल लाखों श्रद्धालु लालबागचा राजा के दर्शन के लिए मुंबई आते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन मंडल ने भीड़ प्रबंधन और सेवा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
कांबले ने जानकारी दी कि इस वर्ष भक्तों की सुविधा के लिए हमने करीब ५,००० स्वयंसेवकों को सेवा में लगाया है, ताकि हर श्रद्धालु को शांतिपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से बाप्पा के दर्शन हो सकें। हमारा उद्देश्य है कि हर भक्त प्रसन्न होकर अपने घर लौटे।
श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी, प्राथमिक चिकित्सा और आराम करने की व्यवस्था भी मंडप के आसपास की गई है, ताकि दर्शन के दौरान किसी को कोई असुविधा न हो।
इस पावन अवसर को और भी खास बनाते हुए भारत सरकार के डाक विभाग ने 'लालबागचा राजा' के लिए एक विशेष पोस्टकार्ड जारी किया है। यह पहल भक्तों के लिए गर्व और श्रद्धा की प्रतीक बन गई है।
कांबले ने इसे लेकर कहा, "यह हमारे मंडल और सभी श्रद्धालुओं के लिए गर्व की बात है कि भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक अवसर पर भगवान के चरणों में यह सम्मान अर्पित किया है।"
मुंबई में गणेशोत्सव की शुरुआत लालबागचा राजा के दर्शन से होती है।