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क्या लौरिया विधानसभा सीट अब भाजपा का मजबूत किला बन गई है?

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क्या लौरिया विधानसभा सीट अब भाजपा का मजबूत किला बन गई है?

सारांश

लौरिया विधानसभा क्षेत्र ने अपने राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे इस क्षेत्र में अब भाजपा का वर्चस्व है। जानिए इसके पीछे की कहानी और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के बारे में।

मुख्य बातें

लौरिया विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध है।
यह क्षेत्र पहले कांग्रेस का गढ़ था, जो अब भाजपा के कब्जे में है।
इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी उल्लेखनीय है, विशेषकर मौर्य सम्राट अशोक के स्तंभ के कारण।
लौरिया की जनसंख्या 4,40,557 है, जिसमें 2,62,111 मतदाता शामिल हैं।

लौरिया, 2 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया विधानसभा क्षेत्र ने कभी कांग्रेस पार्टी का एक मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन समय के साथ यहां के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। 1957 से 2000 तक कांग्रेस ने इस सीट पर कुल सात बार जीत हासिल की थी। हालाँकि, 2000 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की पकड़ इस सीट पर कमजोर हो गई और उसके बाद से जेडीयू और भाजपा ने यहाँ लगातार दबदबा बनाए रखा। 2010 में एक बार निर्दलीय उम्मीदवार विनय बिहारी ने जीत दर्ज की, लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और वर्तमान में भी लौरिया से भाजपा के विधायक हैं।

लौरिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि जितनी समृद्ध है, उसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था, लेकिन 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद इसे सामान्य श्रेणी में शामिल किया गया।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, लौरिया विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या 4,40,557 है, जिसमें 2,34,543 पुरुष और 2,06,014 महिलाएं शामिल हैं। 1 जनवरी 2024 की अर्हता तिथि के अनुसार तैयार की गई प्रस्तावित अंतिम मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 2,62,111 है, जिनमें 1,38,157 पुरुष और 1,23,953 महिला मतदाता हैं।

लौरिया विधानसभा क्षेत्र में योगापट्टी सामुदायिक विकास खंड के साथ-साथ लौरिया प्रखंड की 17 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें सिसवनिया, कटैया, मरहिया पकरी, मठिया, लौरिया, बेलवा लखनपुर, गोबरौरा, बहुअरवा, धोबनी धर्मपुर, धमौरा, दनियाल प्रसौना, साथी, सिंहपुर सतवरिया, बसंतपुर और बसवरिया परौतोला प्रमुख हैं।

इतिहास के दृष्टिकोण से लौरिया एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। लौरिया प्रखंड के नंदनगढ़ में नंद वंश और चाणक्य द्वारा बनवाए गए महलों के अवशेष आज भी टीलेनुमा संरचना के रूप में मौजूद हैं। यह माना जाता है कि यह स्थल भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेषों पर बने स्तूप का स्थान भी है।

नंदनगढ़ से केवल एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित लौरिया में मौर्य सम्राट अशोक द्वारा स्थापित एक विशाल स्तंभ है, जो लगभग 2300 वर्ष पुराना है। यह स्तंभ 35 फीट ऊँचा और लगभग 34 टन वजनी है, जिसका आधार 35 इंच तथा शीर्ष 22 इंच चौड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लौरिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति दर्शाती है कि समय के साथ सभी क्षेत्रीय दलों को अपनी रणनीतियाँ बदलनी पड़ती हैं। भाजपा का बढ़ता वर्चस्व इस बात का परिचायक है कि राजनीतिक परिदृश्य में निरंतर परिवर्तन आवश्यक है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लौरिया विधानसभा क्षेत्र में कितनी ग्राम पंचायतें हैं?
लौरिया विधानसभा क्षेत्र में कुल 17 ग्राम पंचायतें हैं।
लौरिया का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
लौरिया का ऐतिहासिक महत्व मौर्य सम्राट अशोक के स्तंभ और नंद वंश के महलों के अवशेषों से है।
कौन सी पार्टी लौरिया विधानसभा में सबसे अधिक सफल रही है?
कांग्रेस पार्टी लौरिया विधानसभा में सबसे अधिक सफल रही है, लेकिन अब भाजपा का दबदबा है।
लौरिया विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या क्या है?
लौरिया विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या 4,40,557 है।
लौरिया विधानसभा क्षेत्र कब सामान्य श्रेणी में शामिल हुआ?
लौरिया विधानसभा क्षेत्र को 2008 में सामान्य श्रेणी में शामिल किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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