4 अक्टूबर 2026
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तमिलनाडु उपचुनाव: मदुरंतकम-धारापुरम में CPI-CPI(M) का डिजिटल दांव, 200 से ज़्यादा WhatsApp ग्रुप सक्रिय

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तमिलनाडु उपचुनाव: मदुरंतकम-धारापुरम में CPI-CPI(M) का डिजिटल दांव, 200 से ज़्यादा WhatsApp ग्रुप सक्रिय

सारांश

तमिलनाडु के मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव में CPI और CPI(M) ने पारंपरिक ज़मीनी संपर्क से आगे बढ़कर 200 से ज़्यादा WhatsApp ग्रुप, QR कोड पैम्फलेट और उम्मीदवार-केंद्रित सोशल मीडिया पेज के ज़रिए डिजिटल प्रचार का नया मॉडल अपनाया है — बिना एक भी रुपये के पेड प्रमोशन के।

मुख्य बातें

CPI और CPI(M) ने मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में 200 से अधिक WhatsApp ग्रुप सक्रिय किए हैं।
CPI(M) के मदुरंतकम कैंपेन में प्रति ग्रुप लगभग 30 कार्यकर्ता और 300-500 मतदाता शामिल हैं।
'वोट फॉर सुगंधी' शीर्षक से Facebook, Instagram और WhatsApp चैनल चलाए जा रहे हैं; पैम्फलेट पर QR कोड भी शामिल।
धारापुरम में CPI ने चुनाव क्षेत्र को तीन भागों में बाँटकर प्रत्येक के लिए अलग 'धारापुरम इदाथु पक्कम' चैनल बनाया।
दोनों पार्टियों ने स्पष्ट किया कि कैंपेन में पेड प्रमोशन या बल्क SMS का उपयोग नहीं किया जा रहा।

तमिलनाडु के मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) ने मतदाताओं तक पहुँचने के लिए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को अपना मुख्य हथियार बनाया है। 4 अक्टूबर 2026 तक मिली जानकारी के अनुसार, दोनों चुनाव क्षेत्रों में मिलाकर 200 से अधिक WhatsApp ग्रुप सक्रिय किए जा चुके हैं, जिनके ज़रिए उम्मीदवार-केंद्रित प्रचार सामग्री, स्थानीय मुद्दों पर पार्टी का नज़रिया और कैंपेन की जानकारी प्रसारित की जा रही है। यह पहल वामपंथी दलों की उस पारंपरिक छवि से अलग है, जो ज़मीनी संपर्क पर निर्भर रहती थी।

मदुरंतकम में CPI(M) की डिजिटल रणनीति

CPI(M) के मदुरंतकम कैंपेन इंचार्ज एस. कन्नन ने बताया कि पार्टी ने इस निर्वाचन क्षेत्र में 100 से अधिक WhatsApp ग्रुप बनाए हैं। प्रत्येक ग्रुप में लगभग 30 पार्टी सदस्य और उस इलाके के 300 से 500 मतदाता शामिल हैं। ये ग्रुप न केवल प्रचार सामग्री फैलाने का माध्यम हैं, बल्कि चुनाव क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में कार्यकर्ताओं की गतिविधियों में तालमेल बिठाने का काम भी करते हैं।

पार्टी के राज्य सोशल मीडिया इंचार्ज सुथिर के अनुसार, उपचुनाव के लिए एक विशेष WhatsApp चैनल के साथ-साथ अलग Facebook और Instagram पेज भी बनाए गए हैं। इन पेजों का शीर्षक 'वोट फॉर सुगंधी' रखा गया है, जिससे मदुरंतकम उम्मीदवार सुगंधी पार्टी के ऑनलाइन प्रचार अभियान के केंद्र में आ गई हैं। प्रिंट सामग्री को डिजिटल से जोड़ने के लिए पार्टी ने मतदाताओं को वितरित किए जाने वाले पैम्फलेट पर QR कोड भी शामिल किए हैं, जिन्हें स्कैन करके कोई भी पार्टी के विचार और कैंपेन जानकारी तक पहुँच सकता है।

धारापुरम में CPI का तीन-खंड मॉडल

धारापुरम में CPI ने चुनाव क्षेत्र को तीन भागों में विभाजित करके अपना डिजिटल आउटरीच ढाँचा तैयार किया है। प्रत्येक भाग के लिए 'धारापुरम इदाथु पक्कम' नाम से एक अलग WhatsApp चैनल बनाया गया है — पार्टी सदस्यों के अनुसार इस वाक्यांश का अर्थ है 'धारापुरम वामपंथ के लिए है'। इसके अतिरिक्त पूरे चुनाव क्षेत्र में लगभग 100 WhatsApp ग्रुप भी सक्रिय हैं।

गौरतलब है कि दोनों पार्टियाँ पेड प्रमोशन या बल्क एसएमएस मैसेजिंग का सहारा नहीं ले रही हैं। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, कार्यकर्ता और समर्थक स्वेच्छा से WhatsApp, Facebook और Instagram के ज़रिए प्रचार सामग्री साझा कर रहे हैं।

परंपरागत संगठन और डिजिटल का मेल

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य तेज़ी से डिजिटल प्रचार की ओर बढ़ रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) जैसी बड़ी पार्टियाँ पहले से ही सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर निवेश करती रही हैं। वामपंथी दलों का यह कदम उन्हें मतदाताओं — विशेषकर युवा और तकनीक-प्रेमी वर्ग — तक उन प्लेटफॉर्म पर पहुँचाता है जिनका वे पहले से उपयोग करते हैं।

दोनों चुनाव क्षेत्रों में कैडर ग्रुप के ज़रिए सूचना प्रसार और विशेष चैनलों के माध्यम से व्यापक मतदाता संपर्क का दोहरा ढाँचा अपनाया गया है। पार्टी संगठन और डिजिटल संचार का यह समन्वय इन उपचुनावों में वामपंथी दलों की नई चुनावी रणनीति की झलक देता है।

आगे की राह

मदुरंतकम और धारापुरम में जैसे-जैसे उपचुनाव की तारीख नज़दीक आएगी, इन डिजिटल नेटवर्कों की प्रभावशीलता की असली परीक्षा मतदान के दिन होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ज़मीनी पैठ और डिजिटल आउटरीच के इस मिश्रण से वामपंथी दलों को छोटे निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े दलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम संसाधनों में प्रतिस्पर्धी अभियान चलाने में मदद मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे वास्तविक सफलता मानने से पहले एक अहम सवाल पूछना ज़रूरी है — क्या WhatsApp ग्रुप अपने पहले से सहमत समर्थकों तक ही सीमित रहते हैं, या वास्तव में नए मतदाताओं तक पहुँच पाते हैं? गठबंधन की राजनीति में छोटे दलों के लिए डिजिटल प्रचार एक किफ़ायती विकल्प ज़रूर है, पर तमिलनाडु जैसे राज्य में जहाँ DMK का संगठनात्मक ढाँचा बेहद मज़बूत है, यह रणनीति अकेले नतीजे नहीं पलट सकती। QR कोड पैम्फलेट जैसी पहल बताती है कि वामपंथी दल तकनीक को गंभीरता से ले रहे हैं — असली परीक्षा यह है कि यह ऊर्जा मतपेटी तक कितनी पहुँचती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु उपचुनाव में वामपंथी दल कौन-से डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं?
CPI और CPI(M) मदुरंतकम और धारापुरम में WhatsApp ग्रुप, WhatsApp चैनल, Facebook और Instagram पेज तथा QR कोड युक्त पैम्फलेट का उपयोग कर रहे हैं। दोनों चुनाव क्षेत्रों में मिलाकर 200 से अधिक WhatsApp ग्रुप सक्रिय बताए जा रहे हैं।
मदुरंतकम में CPI(M) की उम्मीदवार कौन हैं और उनका कैंपेन कैसे चल रहा है?
मदुरंतकम में CPI(M) की उम्मीदवार सुगंधी हैं, जिनके नाम पर 'वोट फॉर सुगंधी' शीर्षक से सोशल मीडिया पेज और WhatsApp चैनल चलाए जा रहे हैं। पार्टी ने 100 से अधिक WhatsApp ग्रुप बनाए हैं और पैम्फलेट पर QR कोड के ज़रिए प्रिंट व डिजिटल प्रचार को जोड़ा है।
धारापुरम में CPI का 'धारापुरम इदाथु पक्कम' चैनल क्या है?
यह CPI द्वारा धारापुरम चुनाव क्षेत्र को तीन भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग के लिए बनाया गया WhatsApp चैनल है। पार्टी सदस्यों के अनुसार इस तमिल वाक्यांश का अर्थ है 'धारापुरम वामपंथ के लिए है।'
क्या वामपंथी दलों ने इस कैंपेन में पेड प्रमोशन का उपयोग किया है?
नहीं। पार्टी पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कैंपेन में पेड प्रमोशन या बल्क SMS मैसेजिंग शामिल नहीं है। सारी सामग्री कार्यकर्ता और समर्थक स्वेच्छा से साझा कर रहे हैं।
तमिलनाडु उपचुनाव में मदुरंतकम और धारापुरम की क्या अहमियत है?
ये दोनों विधानसभा सीटें तमिलनाडु में होने वाले उपचुनावों का हिस्सा हैं, जहाँ वामपंथी दल गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं। इन सीटों पर वामपंथी दलों की डिजिटल रणनीति को भविष्य के चुनावों के लिए एक नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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