डिलिमिटेशन बिल के लिए दल-बदल की साजिश, लोकतंत्र का चीरहरण हो रहा है: चरण सिंह सपरा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा ने 23 जून को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने का गंभीर आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल में बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों द्वारा ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय को TMC अध्यक्ष चुने जाने की घटना को उन्होंने BJP की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया। सपरा ने आरोप लगाया कि डिलिमिटेशन विधेयक पारित कराने के लिए BJP दूसरे दलों के सांसदों को तोड़ने का प्रयास कर रही है।
लोकतंत्र पर हमले का आरोप
सपरा ने कहा कि 'लोकतंत्र की हत्या हो रही है, लोकतंत्र पर आक्रमण हो रहा है और लोकतंत्र का चीरहरण हो रहा है।' उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की घटनाएँ उसी सिलसिले की कड़ियाँ हैं जो देश के उन राज्यों में भी देखी जा रही हैं जहाँ BJP सत्ता में है। उन्होंने कहा कि बागी गुट खुद को 'असली पार्टी' बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष के पास जाएगा और स्पीकर के फैसले के बाद मामला न्यायालयों तक पहुँचेगा।
डिलिमिटेशन विधेयक और दल-बदल की रणनीति
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि BJP को डिलिमिटेशन विधेयक पारित कराने के लिए जितने सांसदों की आवश्यकता है, उसे पूरा करने के लिए वह विपक्षी दलों के सांसदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि 'लोकतंत्र को तोड़ा जा रहा है और बाबा साहेब के विचारों का दहन हो रहा है।' यह आरोप ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र निकट है और परिसीमन का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
अयोध्या राम मंदिर दान विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया
अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के कथित दुरुपयोग के मामले पर भी सपरा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि 'यह केवल दान की चोरी का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और धार्मिक भावनाओं पर हमला है।' उन्होंने इस मामले में गठित एसआईटी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि आमतौर पर एसआईटी का गठन एफआईआर दर्ज होने के बाद होता है, लेकिन इस मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। सपरा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर खुलकर बोलना चाहिए और इसकी निंदा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज न होना इस बात का संकेत है कि सरकार किसी को संरक्षण देना चाहती है।
महाराष्ट्र: 'ऑपरेशन टाइगर' पर सवाल
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के 'ऑपरेशन टाइगर' को सफल बताए जाने पर सपरा ने कहा कि इस ऑपरेशन में 'साम, दाम, दंड, भेद, सत्ता बल, धनबल और बाहुबल' का पुरजोर उपयोग किया गया, इसीलिए इसे सफल बताया जा रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में दल-बदल की राजनीति पहले भी शिवसेना विभाजन के दौरान सुर्खियों में रही है।
विपक्षी सांसदों के साथ भेदभाव का आरोप
सपरा ने महायुति सरकार पर विपक्षी जनप्रतिनिधियों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो सांसद अब सत्ता पक्ष में शामिल हो रहे हैं, वे पहले विपक्ष में रहते हुए यह शिकायत करते थे कि उन्हें क्षेत्रीय विकास निधि का पैसा नहीं मिल रहा। उनके अनुसार, 'महायुति सरकार में सत्ताधारी सांसद और विधायक के लिए एक नियम होता है और विपक्ष के लिए अलग नियम।' आलोचकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति भारतीय लोकतंत्र में दल-बदल की संस्कृति को और गहरा कर रही है।