मां मसान मेलडी: जंगल में छिपी तंत्र देवी, जहां मिलते हैं नींबू और कीलें

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मां मसान मेलडी: जंगल में छिपी तंत्र देवी, जहां मिलते हैं नींबू और कीलें

सारांश

उज्जैन के जंगलों में स्थित मां मसान मेलडी का मंदिर तंत्र साधना का केंद्र है। यहां के अद्भुत दृश्य और अनूठी मान्यताएं भक्तों को आकर्षित करती हैं।

Key Takeaways

मां मसान मेलडी का मंदिर उज्जैन के जंगलों में स्थित है। यहां तंत्र विद्या की साधना की जाती है। मंदिर में नींबू और कीलें महत्वपूर्ण मान्यता रखते हैं। भक्त सूरज ढलने के बाद मंदिर में नहीं जाते। मां मेलडी का संबंध मां दुर्गा से है।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। मार्च में चैत्र नवरात्रि का आगाज़ होने वाला है। इस नौ दिवसीय महापर्व में देशभर में मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है, और हर भक्त मां की भक्ति में लीन रहता है।

नवरात्रि के दौरान मां के शांत और उग्र रूपों की पूजा होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जंगलों में गुप्त रूप से एक मां विराजमान हैं, जिन्हें तंत्र की देवी कहा जाता है? हम यहां बात कर रहे हैं मसान मेलडी माता की, जो उज्जैन के जंगलों में स्थित हैं और गुजरात की रक्षक के रूप में पूजी जाती हैं।

उज्जैन के भैरवगढ़ के पास स्थित जंगलों में भक्तों को अद्भुत शक्ति का अनुभव होता है। भक्तों का मानना है कि यहां आने पर मां की उपस्थिति का अहसास होता है। जंगल में छिपी मां मेलडी का मंदिर, प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। मां मेलडी को मुख्यतः गुजरात की देवी माना जाता है। आज भी गुजरात के ग्रामीण इलाकों में लोग मसान मेलडी को गुजरात की रक्षिका के रूप में पूजा करते हैं।

उज्जैन के भैरवगढ़ के जंगलों में स्थित मां मसान मेलडी का दृश्य अद्वितीय और डरावना है, क्योंकि मंदिर तक का मार्ग सरल नहीं है। मार्ग में लंबे बांस के जंगल हैं और वहां के पेड़ तंत्र के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। पेड़ों पर बड़ी कीलें, नींबू, और कपड़े से बनी गुड़ियां लटकी हुई दिखती हैं। ऐसा माना जाता है कि अघोरी रात में मां की तपस्या करते हैं और अपनी तंत्र विद्या की सिद्धि के लिए अनुष्ठान करते हैं।

मंदिर का आकार भले ही छोटा है और यह टीन के शेड में बना है, लेकिन वहां मां की चरण पादुका है। भक्त दर्शन करने आए तो मां के चरणों पर तेल या परफ्यूम चढ़ाते हैं। ऐसा माना जाता है कि मां के दर्शन मात्र से भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है। लेकिन, यह ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर में सूरज ढलने के बाद जाना मना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, शाम के समय मां की साधना तांत्रिक करते हैं, यही कारण है कि आम लोग वहां जाने से परहेज करते हैं।

मां मसान मेलडी वास्तव में मां दुर्गा का ही स्वरूप हैं, जिन्होंने असुर अमरुवा का अंत किया था। ऐसा माना जाता है कि असुर अमरुवा मां पार्वती के क्रोध से बचने के लिए गाय के कंकाल में छिपा था। मां पार्वती ने अपनी पवित्रता के कारण अमरुवा को मारना उचित नहीं समझा और अपनी शक्ति से मां मसान मेलडी को उत्पन्न किया। तब मां मेलडी ने असुर अमरुवा का अंत कर बुराई का नाश किया।

Point of View

यह ध्यान देने योग्य है कि मां मसान मेलडी का मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में तंत्र विद्या की गहराई को भी दर्शाता है। यहां की मान्यताएं और परंपराएं स्थानीय निवासियों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

मां मसान मेलडी कहां स्थित हैं?
मां मसान मेलडी उज्जैन के भैरवगढ़ के जंगलों में स्थित हैं।
क्या मां मसान मेलडी को तंत्र की देवी माना जाता है?
हां, मां मसान मेलडी को तंत्र की देवी माना जाता है।
मंदिर में जाने का सही समय क्या है?
मंदिर में सूरज ढलने के बाद जाना मना है।
भक्त यहां किस प्रकार की पूजा करते हैं?
भक्त मां के चरणों पर तेल या परफ्यूम चढ़ाते हैं और उनकी आराधना करते हैं।
मां मसान मेलडी का महत्व क्या है?
मां मसान मेलडी का महत्व बुराई के विनाश और तंत्र विद्या के प्रतीक के रूप में है।
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