टीकमगढ़: BJP छोड़ कांग्रेस में लौटे 5 पार्षद, 29 सितंबर को भोपाल में हुई घर वापसी
सारांश
मुख्य बातें
टीकमगढ़ नगर पालिका के पाँच पार्षदों ने 29 सितंबर 2026 को भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता पुनः ग्रहण की। ये पार्षद कुछ समय पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए थे और अब उन्होंने पार्टी में 'घर वापसी' की है। इस घटनाक्रम को कांग्रेस संगठन टीकमगढ़ में अपनी स्थिति मज़बूत होने के संकेत के रूप में देख रहा है।
किन पार्षदों ने की वापसी
कांग्रेस में पुनः शामिल होने वाले पार्षदों के नाम हैं — चीता भाई कुशवाहा, अरविंद सिंह, राखी ध्रुव यादव, अंशुल जैन और रामकुमार। इन सभी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।
यह कार्यक्रम टीकमगढ़ विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला के नेतृत्व में हुआ। इसमें राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे और वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह चौहान सहित अनेक कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
टीकमगढ़ नगर पालिका का सियासी संदर्भ
टीकमगढ़ नगर पालिका पिछले कुछ समय से राजनीतिक उठापटक का केंद्र बनी हुई है। नगर पालिका अध्यक्ष पप्पू मलिक को पद से हटाया गया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने उन्हें राहत देते हुए उनकी पुनः ताजपोशी संभव कराई।
गौरतलब है कि इस पृष्ठभूमि में पाँच पार्षदों की वापसी से कांग्रेस का स्थानीय संगठन और संख्या-बल दोनों को मज़बूती मिल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ BJP के सामने कांग्रेस लगातार संगठनात्मक विस्तार की कोशिश में जुटी है।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
इस अवसर पर उपस्थित कांग्रेस नेताओं ने सभी पार्षदों का स्वागत किया और कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनहित के लिए प्रतिबद्ध है। नेताओं ने इसे टीकमगढ़ में पार्टी के नए उत्साह और जनाधार के विस्तार का प्रतीक बताया।
कांग्रेस इस घटनाक्रम को एक 'बड़े राजनीतिक संदेश' के रूप में पेश कर रही है, हालाँकि आलोचकों का कहना है कि स्थानीय नगर पालिका स्तर की यह वापसी व्यापक राजनीतिक बदलाव का संकेत मानना जल्दबाज़ी होगी।
आगे की संभावनाएँ
पार्षदों की घर वापसी के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है और पार्टी टीकमगढ़ नगर पालिका में अपनी स्थिति और सुदृढ़ करने की दिशा में काम करेगी। नगर पालिका अध्यक्ष के मोर्चे पर पहले मिली न्यायिक राहत के साथ मिलकर यह घटनाक्रम आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिहाज़ से कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।