जलूद सोलर पॉवर प्लांट का लोकार्पण: CM मोहन यादव बोले — MP की बिजली से दिल्ली मेट्रो दौड़ रही है
सारांश
Key Takeaways
- CM मोहन यादव ने 29 अप्रैल 2026 को खरगोन के जलूद में ₹271 करोड़ की लागत से बने 60 मेगावॉट सोलर पॉवर प्लांट का लोकार्पण किया।
- यह देश का पहला पीपीपी मोड सोलर संयंत्र है जिसमें ग्रीन बॉन्ड स्कीम से आम नागरिकों को भागीदार बनाया गया है।
- नागरिक ₹1 लाख के अधिकतम 10 बॉन्ड खरीद सकते हैं, जिन पर 8%25 वार्षिक रिटर्न 20 वर्षों तक मिलेगा।
- संयंत्र से इंदौर नगर निगम को बिजली आपूर्ति होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- परियोजना का भूमि-पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में किया था।
- CM यादव के अनुसार, परियोजना की लागत 10 वर्षों में वसूल होगी और अगले 10 वर्ष केवल लाभ के होंगे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 अप्रैल 2026 को खरगोन जिले के महेश्वर के निकट जलूद में ₹271 करोड़ की लागत से निर्मित 60 मेगावॉट सोलर पॉवर प्लांट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में उत्पादित बिजली से अब दिल्ली मेट्रो संचालित हो रही है, जो राज्य की ऊर्जा क्षमता की राष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
जलूद सोलर पॉवर प्लांट देश का पहला ऐसा संयंत्र है जो पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में संचालित हो रहा है और जिसमें ग्रीन बॉन्ड स्कीम के माध्यम से आम नागरिकों को भागीदार बनाया गया है। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इस परियोजना में भारत सरकार का पूर्ण सहयोग मिला है। इस संयंत्र से इंदौर नगर निगम को सीधे बिजली की आपूर्ति होगी, साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
ग्रीन बॉन्ड से जनभागीदारी
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इस परियोजना में कोई भी नागरिक ₹1 लाख के अधिकतम 10 बॉन्ड खरीद सकता है। प्रत्येक बॉन्ड पर लगभग 8 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न मिलेगा, जिसका लाभ 20 वर्षों तक प्राप्त होगा। आवश्यकता पड़ने पर इन बॉन्ड को बेचा भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार राज्य सरकार ने घर बैठे आम नागरिकों को निवेश और आय का अवसर प्रदान किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रखी थी नींव
गौरतलब है कि जलूद सोलर पॉवर प्लांट का भूमि-पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में किया था। लोकार्पण समारोह में प्रदेश में हरित ऊर्जा पर जारी कार्यों पर केंद्रित एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताई जा रही है।
आर्थिक लाभ और भविष्य की संभावनाएँ
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि इस परियोजना की पूरी लागत 10 वर्षों में वसूल हो जाएगी और अगले 10 वर्ष केवल लाभ के होंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक समय मध्य प्रदेश में रात तो क्या, दिन में भी बिजली कटौती आम बात थी। आज राज्य न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि देश के अन्य राज्यों को भी बिजली आपूर्ति कर रहा है। मध्य प्रदेश को देश का सबसे सस्ती बिजली देने वाला राज्य बताया जा रहा है। हरित ऊर्जा के क्षेत्र में यह उपलब्धि राज्य के ऊर्जा परिदृश्य में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।