महाराष्ट्र सरकार ने 6 तीर्थस्थलों व किलों के लिए ₹993.72 करोड़ मंजूर, भीमाशंकर से परली वैजनाथ तक होगा कायाकल्प
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 18 मई 2026 को राज्य के 6 प्रमुख तीर्थस्थलों, किलों और ऐतिहासिक स्थलों के विकास, संरक्षण और आधुनिकीकरण के लिए कुल ₹993.72 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली शीर्ष समिति ने यह निर्णय लिया। यह स्वीकृति ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण राज्य वित्तीय सावधानी बरत रहा है।
किस परियोजना को कितना मिला
सरकारी बयान के अनुसार, श्री क्षेत्र परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर के विकास के लिए सबसे अधिक ₹301.54 करोड़ आवंटित किए गए हैं। एलोरा स्थित श्री क्षेत्र घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग विकास योजना को ₹210 करोड़ मिले हैं।
श्री क्षेत्र भीमाशंकर आदर्श गांव विकास योजना के लिए ₹172 करोड़, सातारा के ऐतिहासिक अजिंक्यतारा किले के संरक्षण हेतु ₹134.80 करोड़, सांगम माहुली समाधि स्थल परियोजना (सातारा) के लिए ₹133 करोड़ और देहू स्थित संत तुकाराम महाराज जन्मस्थल के संरक्षण के लिए ₹41 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
भीमाशंकर में क्या बदलेगा
श्री क्षेत्र भीमाशंकर विकास योजना के तहत मई 2027 तक आधुनिक बस स्टेशन और पार्किंग सुविधा तैयार करने का लक्ष्य है। यातायात दबाव कम करने के लिए बाईपास सड़कें बनाई जाएंगी और मौजूदा 2.7 मीटर चौड़ी सड़कों को 7 मीटर तक चौड़ा किया जाएगा।
परियोजना में पैदल मार्ग, ढके हुए कॉरिडोर, एम्फीथिएटर, 257 केएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नया पुलिस स्टेशन और विश्राम गृह भी शामिल हैं। भविष्य की योजनाओं में दिंभे बांध क्षेत्र में सब-स्टेशन, रोपवे सुविधा और एमटीडीसी रिजॉर्ट का विकास भी प्रस्तावित है।
अजिंक्यतारा और सांगम माहुली का पुनरुद्धार
सातारा के अजिंक्यतारा किले में दर्शक दीर्घा, नए पैदल मार्ग, लैंडस्केपिंग, राज सदर का पुनर्निर्माण, बुर्जों का संरक्षण, सस्पेंशन ब्रिज और पर्यटक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
सांगम माहुली समाधि स्थल परियोजना के तहत महारानी ताराबाई, महारानी येसूबाई और छत्रपति शाहू महाराज की समाधियों का संरक्षण और आसपास के क्षेत्र का व्यापक विकास किया जाएगा।
घृष्णेश्वर विकास: तीन चरणों में होगा काम
मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्देश दिया है कि मंदिर विकास कार्य तीन चरणों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। पहले चरण में भव्य प्रवेश द्वार, डिजिटल कतार प्रबंधन प्रणाली, अन्नक्षेत्र और योग-ध्यान केंद्र बनाए जाएंगे।
दूसरे चरण में हरिहर और मार्कंडेय तीर्थ का वैज्ञानिक पुनर्जीवन, घाट, साइकिल ट्रैक, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं और सीसीटीवी प्रणाली स्थापित की जाएगी। तीसरे चरण में मेरु पर्वत विकास के तहत भगवान शिव की विशाल प्रतिमा, शिव पुराण एवं वैदिक संग्रहालय, लेजर लाइट एंड साउंड शो और ध्यान केंद्र विकसित किए जाएंगे।
आगे की राह
इन परियोजनाओं के पूरे होने पर महाराष्ट्र के धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास को सांस्कृतिक संरक्षण और रोजगार सृजन दोनों दृष्टिकोण से प्राथमिकता दी है। क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता यह तय करेगी कि यह निवेश श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव को वास्तविक रूप से बदल पाता है या नहीं।